Monday, November 12, 2007

फ़लज्योतिष परखने के लिये कुछ प्रयोग (करके देखें)

Experiments for Astrology Try yourself

अपने पिछले ब्लॉग में जब मैंने अपनी कुंडली का उदाहरण दिया था उस वक्त सदा की तरह Anonymous (बेनामी) महोदय ने सदाबहार उत्तर दिया था कि आपकी जन्म कुंडली ही गलत होगी तो कोई भी ज्योतिषी कैसे सही भविष्यकथन करेगा। उससे एक सवाल दिमाग में कौंधा कि यदि इसका उलटा प्रश्न ज्योतिषी महोदय से किया जाये कि यदि जन्म समय सही हो और उसी अनुरूप कुंडली बनी हो तो क्या भविष्यकथन सही होगा? क्या उत्तर मिलेगा? उत्तर भी हमें पहले ही मालूम है- “मूलतः जन्म समय को लेकर ज्योतिषियों में विवाद हैं”....

तर्कबुद्धि से देखा जाये तो जिस समय गर्भधारणा होती है उसे ही जन्म समय माना जाना चाहिये, लेकिन वह समय तो कोई भी नहीं बता सकता। बच्चा जब बाहर आकर रोता है या कहें पहला श्वास लेता है उसे ही आमतौर पर जन्म समय माना जाता है। पहले बालक का सिर दिखने, बच्चा पूरी तरह से बाहर आने, नाल कटने आदि अनेक बातों पर जन्म समय निर्धारित की जाती थी। इससे एक बात तो साफ़ है कि “जन्म का अचूक समय बता पाना लगभग असम्भव है”। अचूक जन्मसमय पर ही कुंडली की सार्थकता सिद्ध होती है। उसी अचूक कुंडली पर भविष्यकथन आधारित होता है, मतलब यदि भविष्यकथन सही नहीं निकला तो “आपकी जन्म कुंडली गलत होगी”, यह तर्क तत्काल आगे कर दिया जाता है। अब ज्योतिषी महोदय ही अज्ञानियों को बतायें कि वे किस जन्म समय के आधार पर बनी कुंडली को अचूक जन्म कुंडली मानेंगे?

जब हम किसी से “कितने बजे हैं” पूछते हैं तो वह कभी भी ऐसा नहीं कहता कि 3 बजकर 58 मिनट और 50 सेकंड हुए हैं, सीधे “चार बजे हैं” कहा जाता है। डिजिटल घड़ी में भी 03.59 के बाद अगले मिनट पर 04.00 दर्शाता है, वैसे देखा जाये तो एक ही मिनट बढ़ा, लेकिन तीन की जगह चार का अंक आ गया होता है। ठीक यही कुंडली के समय भी होता है, इस प्रकार के “बॉर्डर” पर आये हुए समय में नर्स या डॉक्टर समय का एक मोटा अन्दाज बताते हैं, क्या उससे एकदम सही कुंडली बनाना सम्भव है? जबकि 5-10 मिनट के अन्तर पर कुंडली के प्रथम स्थान राशि का आँकड़ा बदल सकता है। सामन्यतया ज्योतिषी जो कुंडली देखते हैं उसे “गुटका” कुंडली कहना चाहिये, क्योंकि उसमें पाँच-दस मिनटों का हेर-फ़ेर की सम्भावना होती है। हालांकि ज्योतिषी ऐसा आभास देते हैं मानो उन पाँच मिनटों के अन्तराल से भारी उलटफ़ेर हो जायेगा, क्योंकि यदि ऐसा वे नहीं करेंगे तो “आपकी कुंडली गलत बनी हुई है” वाला तर्क कभी नहीं दे पायेंगे। और यदि उनके बताये अनुसार जन्म समय की कुंडली बनाई जाये तब भी वे यह दावे से नहीं कह सकते कि जातक के भविष्यकथन की अस्सी प्रतिशत बातें भी सही निकलेंगी (बीस प्रतिशत का Standard Error हम मान लेते हैं)। तात्पर्य यह कि जन्म समय की अचूकता पर कुंडली अध्ययन और भविष्य निर्भर नहीं होता।

गत्यात्मक ज्योतिष की संगीता जी ने ज्योतिष की वैज्ञानिकता को जाँचने के लिये एक उदाहरण दिया है, वह तो ठीक है ही, एक दो सुझाव हमारी तरफ़ से भी हैं। वैसे देखा जाये तो डॉ.अब्राहम कोवूर वाले मॉडल में दिये गये प्रयोग भी बेहतरीन हैं, जिससे ज्योतिषियों के भविष्य और फ़लित सम्बन्धी कथनों की जाँच हो सकती है। जिन व्यक्तियों को ज्योतिष पर पूरा विश्वास है और वे ऐसा मानते हैं कि फ़लज्योतिष में कुछ तथ्य हैं उनके लिये एक आसान सी जाँच पद्धति इस प्रकार है-

1. आपके आज तक के जीवन में घटित हुई चुनिंदा प्रमुख (अच्छी और बुरी) घटनायें और उनके निश्चित समय एक कागज पर नोट कर लें (जाहिर है कि ये प्रमुख घटनायें आपके जन्म के समय भविष्य के गर्भ में थीं, लेकिन अब तो आप उन घटनाओं से गुजर चुके)। फ़िर आप उस जन्म कुंडली को किसी जाने-माने ज्योतिषी को दिखायें, जिन पर आपकी पूरी श्रद्धा है। आप ध्यान से देखें कि जन्मकुंडली के अध्ययन से उन घटनाओं के बारे में (जो आपके कागज पर पहले से ही नोट हैं) ज्योतिषी महोदय क्या बताते हैं। उनका काम और आसान करने के लिये थोड़ी देर के बाद कुछेक घटनाओं के स्वरूप के बारे में उन्हें बता दीजिये, फ़िर देखिये कि क्या वे उनके घटित वर्ष या समय सही बता पाते हैं?

2. इसी प्रकार कुछ ज्योतिषी ऊँची हाँकते हैं कि वे मृत्यु का सही समय बता सकते हैं, उनके पास एकाध-दो मृत व्यक्तियों की कुंडली ले जायें और देखें कि वे उनके भविष्य(?) बारे में क्या बताते हैं, फ़िर काम और आसान करने के लिये उन्हें बता दें कुंडली वाले की तो मृत्यु हो चुकी है, सिर्फ़ उसका वर्ष/समय उन्हें बताना है।

3. एक और प्रयोग किया जा सकता है- दो ग्रुप तैयार करें पहले “अ” ग्रुप में 15 कुंडलियाँ लें जिनमें विभिन्न व्यवसाय जैसे डॉक्टर, शिक्षक, किराने वाला, सिपाही, कलाकार, इंजीनियर, वकील, राजनीतिज्ञ आदि की कुंडलियाँ हों और दूसरा ग्रुप जिसमें 30 कुंडलियाँ हों जिनमें से 15 कुंडलियाँ पहले वाले ग्रुप की ही रहें और बाकी की 15 दूसरी Randomly चुनी हुई हों। अपना डाटा तैयार करें और अब ज्योतिषियों से पहले का सम्बन्धित डाटा इकठ्ठा करें, उनकी आपस में तुलना करवायें। यदि दूसरे ग्रुप की कुंडलियाँ और पहले ग्रुप की कुंडलियाँ व्यवसाय के अनुसार या व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार अस्सी प्रतिशत भी मिल जायें तो वाकई यह अद्‌भुत होगा। लेकिन यदि इस सारी कवायद के बावजूद यह न पता चल सके कि कुंडली स्त्री की है या पुरुष की? जीवित की है या मृत की? विवाहित की है या अविवाहित की? इस व्यवसाय वाले की है या उस व्यवसाय वाले की? तात्पर्य यह कि जब इस शास्त्र का वश वर्तमान पर ही न चल रहा हो तो कैसे वह भविष्य की घटनाओं का कथन कर सकते हैं, यह मेरी अतिसामान्य तर्कबुद्धि में नहीं आता।

ये सारे प्रयोग कई-कई ज्योतिषियों के साथ करें ताकि प्रयोगों की सफ़लता या असफ़लता का प्रतिशत बढ़ जाये। पूरी सम्भावना है कि ऐसे प्रयोगों के नाम पर अधिकतर ज्योतिषी भाग खड़े होंगे। इससे क्या सिद्ध होता है यह मैं पाठकों की तर्कबुद्धि पर ही छोड़ता हूँ।
(विशेष नोट – Anonymous [बेनामी] टिप्पणियों पर ध्यान देना तो दूर, उन्हें हटा भी दिया जायेगा)

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5 comments:

prabhakar said...

आपने काफी गूढ़ और गंभीर लिखा है,
अब तो ध्यान से आपको पढ़ना पड़ेगा।

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

प्रिय सुरश,

बहुत अच्छा सुझाव. कोई भी प्रस्ताव सही है या गलत इसे प्रयोगों द्वारा ही सिद्ध करना होगा. यही विज्ञान के युग की मांग है. आपका लेख इस दिशा में एक सही कदम है -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
इस काम के लिये मेरा और आपका योगदान कितना है?

gatyatmak jyotish said...

आपने जो सुझाव दिए हैं , वे ज्योतिष को जॉचने के लिए नहीं ज्योतिषियों को जॉचने के लिए पर्याप्त हैं। यदि आपके ज्योतिषी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर पाते तो इसका मतलब यह तो नहीं कि ज्योतिष ही गलत है।
संभावनाओं का कोई विज्ञान श्त-प्रतिशत सटीक नहीं हो सकता , यह मेरा दावा है।जब हम ज्योतिषी स्वयं यह मान रहे हैं कि ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव तो पृथ्वी के जड़-चेतन के साथ-साथ मानव-जीवन पर भी पड़ता है और इस तरह मानवजीवन को प्रभावित करने में एक बड़ा अंश विज्ञान के नियम का होता है , परंतु साथ ही साथ मानव जीवन को प्रभावित करने में छोटा अंश तो सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक- तथा देश-काल-परिस्थिति का भी होता है। फिर ज्योतिष की भविष्यवाणियों के शत-प्रतिशत सही होने की बात आ ही नहीं सकती।ज्योतिष से शत-प्रतिशत सही भविष्यवाणी न होते दिखाई पड़ने से आजतक ज्योतिष को अविकसित विज्ञान की ही श्रेणी में छोड़ दिया जाता रहा है , विकासशील विज्ञान की श्रेणी में भी नहीं आने दिया जाता , फिर भला यह विकसित विज्ञान किस प्रकार बन जाए ?

sumant mishra said...

sureshji,aisha lagta hai ki aap jyotish ko sire se hee nakaarna chahate hain?aap swatantra hain,aisa karne ke liye.parantu sambhavtah aap khagol shastra ko maante prateet hote hain,yadi yah theek hai too kripya kya aap yah batainge ki kya khagol kaa bhoogol se tatha khagol kaa manav se koee sambandha hai? aap ke uttar per hee yah nirbhar karega ki aap se aage charcha kee jaye yaa nahee:sumant mishra

Manoj Sharma said...

सुरेश जी आपके हिन्दी और हिंदुस्तान के लिए किए जा रहे प्रयास के लिए धन्यवाद.

ज्योतिष पूर्णतया वैज्ञानिक है. कुंडली तो दूर की बात है. हमारे हाथों में भी सब कुछ दर्ज होता है. जन्म तिथि, उम्र, आयु, स्वास्थ्य, मानसिक झुकाव आदि. जरा गूगल तो कीजिये.