Tuesday, November 6, 2007

हे ज्योतिष समर्थकों, ताने-उलाहने नहीं ज्ञान दो...

Astrology Supporters Logic Question

ज्योतिष सम्बन्धी मेरे पिछले लेखों “यह” और “यह” पर जैसी अपेक्षित थी वैसी ही प्रतिक्रिया आई, अर्थात अधिकतर विरोध में या फ़िर तटस्थ रूप में। ज्योतिषियों और ज्योतिष समर्थकों से ऐसी ही कुछ उम्मीद की थी मैने, लेकिन मुझे सबसे अधिक आश्चर्य इस बात का हुआ कि मेरे तर्कों के समर्थन में या उन्हें आगे बढ़ाते हुए कोई टिप्पणी तो दूर एक ई-मेल तक नहीं मिला। मैंने सोचा था कि बहस-मुबाहिसा होगा, कुछ नये विचार जानने को मिलेंगे, लेकिन सब व्यर्थ... इससे मेरी इस धारणा को और बल मिला कि या तो बुद्धिजीवी वर्ग और जनता इस विषय पर कुछ अप्रिय बोलने से बचते है, या फ़िर मन में गहरे बसे संस्कार उसे इस प्राचीन अध्ययन का विरोध करने या उसमें नुक्स निकालने से रोकते हैं। “प्राचीन अध्ययन”, मैने इसलिये कहा क्योंकि यह है ही प्राचीन... लेकिन हरेक प्राचीन विद्या या खोज हमेशा ही सच नहीं मानी जा सकती (यह मैंने नहीं महात्मा बुद्ध ने कहा है).... हमेशा यह नहीं कहा जा सकता कि वेदों, पुराणों और ग्रंथों मे यह लिखा है, इसलिये सतत्‌ यह खरा माना जायेगा, हमें इस पर विश्वास है.... जबकि असल में इसी का नाम अंधविश्वास है।

मजे की बात तो यह है कि मेरे विरोध में Anonymous (बेनामी) टिप्पणियाँ और ई-मेल भी आये, मानो पहचान उजागर हो जाने पर मैं उनका गला पकड़ लूँगा। तो तमाम ज्योतिष समर्थकों से मैं सिर्फ़ यही कहना चाहता हूँ कि भाई लोगों मैं तो पहले ही कह चुका हूँ कि मैं अज्ञानी हूँ, मुझे ज्ञान दो, मुझे समझाओ कि राहु-केतु कहाँ स्थित हैं? मेरे दिमाग में बैठाओ कि दूरस्थ ग्रहों का असर कैसे और किस सीमा तक होता है? कोई reference देकर मुझे बतायें कि फ़लाँ-फ़लाँ पुस्तक में इनके जवाब हैं, तो मैं उसे पढ़ सकूँ, लेकिन सिर्फ़ “तू अज्ञानी है, तू मूर्ख है, तू विधर्मी है, तुझे इस महान विद्या के बारे में कुछ पता नहीं है” आदि कहने से तो काम नहीं चलेगा ना... आईये देखते हैं एक ऐसी ही टिप्पणी को... सज्जन “बेनामी” हैं, और लिखते हैं –

aatmamugdhata ki parakashtha he aapke lekh.mere kuch chote chote aur tuccha prashno ka uttar dijiye taki mujhe aapka mansik star samajh aaye jyotish k vishay me ....
1.aap khud kitna jante he jyotish k bare me?
2.kitne jyotish k granth aapne khud padh liye he ?
3.sanskrit ka kitna gyan he aapko ki aap yeh granth padh paye?
4.aapne jo bhi likha he usme aapke khud k anubhav,ya shodh kiye huye kitne tatthya he ?
....pahle khud ko tatoliye janab aur fir aage ki baatein kijiye .....pahle us star par to aaiye ki aapko kuch samjhaya jaye....fir aapke tathakathit adhunik vaigyanik prashno k uttar aapko jaroor diye jayenge....


इस टिप्पणी से जाहिर है कि ये कोई महान(?) ज्योतिषी ही होंगे, मुझे “आत्ममुग्ध” तो बताते ही हैं, साथ में मुझे “नालायक” भी घोषित करते हैं, मैं राहु-केतु के बारे में पूछता हूँ तो “पहले कुछ बनिये, फ़िर बात करेंगे” वाली पर आ जाते हैं, भाई साहब चलो मान लिया कि मैं तो कीड़ा-मकोड़ा हूँ, एकदम तुच्छ प्राणी, जिसे कोई ज्ञान नहीं, लेकिन ज्ञान लेने ही तो ब्लॉगिंग की दुनिया में आया हूँ (यह सोचकर कि यहाँ एक से बढ़कर एक ज्ञानी-ध्यानी हैं और मुझे कुछ नया मिलेगा), फ़िर आप मुझे संक्षेप में ही सारे प्रश्नों का उत्तर क्यों नहीं देते? क्या ज्योतिष सम्बन्धी सारी पुस्तकें और ग्रन्थ संस्कृत में ही हैं? मेरे तर्क नासमझ ही सही, लेकिन क्या उनके लिये भी ग्रंथ पढ़ना पड़ता है, सामान्य बुद्धि से काम नहीं चलेगा? मेरा मानसिक स्तर तो बहुत घटिया है, लेकिन आप अपना भी तो मानसिक स्तर बताइय़े ना, ताकि यह पता चले कि जो अपना नाम तक जाहिर करने से डर रहा है, कितना विद्वान है?

रही बात मेरे व्यक्तिगत अनुभव की, तो मैंने ज्योतिष के प्रयोग(?) देखने के लिये अपनी कुंडली अब तक 17 ज्योतिषियों को दिखाई है और हर बार मुझे बहुत मजा आया (जॉनी वॉकर की कॉमेडी से भी ज्यादा), कोई बताता है कि तुम्हारा भाग्य ३० वर्ष की उम्र के बाद पलटेगा और बहुत पैसा आयेगा (जबकि ४३ वर्ष की उम्र में अभी भी मेरे पास एक पुरानी बाइक ही है), एक ने बताया था कि तुम शिक्षा में बहुत नाम कमाओगे (जबकि मैं बी.एससी. भी पूरी नहीं कर पाया), एक ने बताया था कि तुम सरकारी नौकरी में जाओगे (मैं बिजनेस करता हूँ), अब इनका मैं क्या करूँ, या तो वे सब के सब नालायक हैं, या फ़िर मेरा तथाकथित मंगल-राहु-शनि आदि इतने भारी-भरकम हैं कि वे इन ज्योतिषियों पर भी भारी पड़ते हैं... इसे विज्ञान का नाम कैसे दिया जा सकता है? विज्ञान में एक जैसे 17 प्रयोगों के परिणाम अलग-अलग नहीं आयेंगे।

अब आते हैं कुछ तथ्यात्मक टिप्पणी पर, “गत्यात्मक ज्योतिष” नामक ज्योतिष की एक नई शाखा के बारे में सुश्री संगीता जी काफ़ी लिखती हैं, और अच्छा लिखती हैं, उन्होंने कहा-
“मैं बस इतना ही कह सकती हूं कि योगा और आयुर्वेदा की तरह ही जब तक ज्योतिष ज्योतिशा के रुप में हमारे देश में वापस नहीं लौटेगा , हम इसके महत्व को स्वीकार कर ही नहीं पाएंगे।“

इसमें उन्होंने योग और आयुर्वेद को ज्योतिष से जोड़ दिया, जबकि योग और आयुर्वेद Result Oriented हैं, दोनों ने यह सिद्ध किया है कि फ़लाँ आसन लगाने से फ़लाँ बीमारी में फ़ायदा होता है या आयुर्वेद के अनुसार कोई दवा-काढ़ा पीने से कोई रोग ठीक होता है, ऐसा कुछ ज्योतिष ने तो सिद्ध नहीं किया है, कि इस कुंडली में यह योग बन रहा है तो यह होकर ही रहेगा। बहुत सारे “किन्तु-परन्तु, कर्म, भाग्य आदि के पुछल्ले जोड़कर” एक संभावना व्यक्त की जाती है, इसलिये इसे योग और आयुर्वेद से जोड़ना उचित नहीं है (ज्योतिष में तो जन्म समय पर ही विवाद है), संगीता जी ने अपने ब्लॉग पर Date of Birth के अनुसार विश्लेषण करके चुनौती दी कि इस दौरान जन्मे लोगों का जीवन अशांत होगा... आदि-आदि,

तो मैं आदरणीय संगीता जी से सिर्फ़ इतना ही कहना चाहता हूँ कि डॉ.अब्राहम कोवूर द्वारा दी गई चुनौतियों में से आज तक एक पर भी काम क्यों नहीं हुआ? ज्योतिष को विज्ञान सिद्ध करने का वह एक सुनहरा अवसर और अध्ययन है। सारे ज्योतिष विरोधियों के मुँह बन्द हो जायेंगे। और रही बात “योगा” और “आयुर्वेदा” की, तो “ज्योतिषा” पर भी पश्चिम में काफ़ी शोध हुए हैं, चर्चायें हुईं, प्रकाशन हुए हैं और उनमें से अधिकतर ने फ़लज्योतिष, मंगल प्रभाव या भविष्यकथन को तथ्यों से दूर ही पाया है (इनके reference मैं आपको आपके blog पर ही दूँगा)। अगली टिप्पणी में आप पायेंगे ज्योतिषियों का सनातन बहाना, जरा गौर फ़रमायें (ये भी मुझे बेनामी ही प्राप्त हुई है)-

“ab koi apni ladki ki patrika thik se kyon nahi padh paya...iske peeche do karan hain - jyotish koi brahmawakya nahi hai...jyotishi bhi manushya hai, ganana mein galtiyan ho sakti hain...dusara, jyotishi jo bhi bhavishya baanchata hai woh khara isliye bhi nahi utarta yeh manushya ke karmon pe nirbhar karta hai....hamara ek bhavishya hai...lekin hum karam bhi karte hain....aur unhi karmon ki wajah se hamara bhavishya badal sakta hai.”

ये साहब फ़रमाते हैं कि ज्योतिष कोई ब्रह्मवाक्य नहीं है, गणना में गलती हो सकती है आदि-आदि... तो साहब यही तो मैं भी कह रहा हूँ कि आप मानिये ना कि ज्योतिष कोई स्थापित विज्ञान या सत्य नहीं है, यह सिर्फ़ सम्भावना व्यक्त करता है भाग्य, कर्म, जन्म आदि का पुछल्ला लगाकर, तो भाई यदि सभी कुछ भाग्य के अनुसार ही होना है तो ज्योतिषी किस मर्ज की दवा हैं?

एक सज्जन ने तर्क दिया कि जब एलोपैथी के भी काफ़ी प्रयोग असफ़ल हो जाते हैं तो वे फ़िर नई दवा ईजाद करते हैं, एलोपैथी भी सम्पूर्ण ज्ञान नहीं है आदि-आदि... मैं भी तो यही कह रहा हूँ कि कोई भी ज्ञान सम्पूर्ण नहीं होता, उसमें सतत्‌ प्रयोग चलते रहना चाहिये, अनुसन्धान होते रहना चाहिये। डॉक्टर कम से कम अपनी असफ़लता को स्वीकार तो करते हैं कि “हाँ, हमसे “डायग्नोस” करने में गलती हुई” या फ़िर “अब इसके आगे हमारे मेडिकल साइंस में कुछ नहीं है, मरीज को घर ले जाओ और दुआ करो”। डॉक्टर और चिकित्सा तो उपभोक्ता कानून के अन्तर्गत भी आते हैं, उन पर जिम्मेदारी आयद होती है, तय की जाती है, सजा होती है, अदालते हैं, मेडिकल फ़ोरम है..... ज्योतिष में यह सब नहीं है, कोई जिम्मेदारी नहीं, गलती हो जाये (जो कि कई बार हो ही जाती है) तो कोई सजा नहीं, कोई उपभोक्ता अदालत में घसीटने वाला नहीं है (सरकार से मैं माँग करता हूँ कि “यजमान” को भी ज्योतिषी की सेवाओं का उपभोक्ता माना जाना चाहिये), गरज यह कि एकदम बगैर किसी जिम्मेदारी का धन्धा है ज्योतिष, भविष्यवाणी सही निकली तो हमारी जय-जय, और गलत निकली तो तुम्हारे कर्म-भाग्य फ़ूटे हुए... यानी मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू... ऐसे काम नहीं चलता है भईया।

अन्त में मेरा सिर्फ़ यही कहना है कि सिर्फ़ विरोध करने के लिये विरोध मत करो, कुछ तर्क रखो, कुछ तथ्य रखो, कुछ “रेफ़रेंस” दो, किसी पुस्तक का अध्याय बताओ..... मैं तो मूढ़मति हूँ, इसलिये मेरे दिमाग में तो ऐसे अटपटे सवाल ही आते हैं, जवाब नहीं मालूम हों तो टिप्पणी मत करो, और मालूम हों तो विस्तार से लिखो, नहीं लिख सकते तो सिर्फ़ बताओ कि यहाँ-यहाँ-यहाँ तुम्हारे सवालों के जवाब हैं, खगोल शास्त्र और ज्योतिष का घालमेल मत करो, सिर्फ़ गरियाने या प्रतिकूल टिप्पणी से मैं डिगने, डरने वाला नहीं हूँ, ऐसे असुविधाजनक सवाल तो मैं पूछता रहूँगा...खुल्लमखुल्ला बगैर नाम छुपाये... और जल्दी ही आने वाले समय में कई लोग मेरे सवाल “धंधेबाजों” के सामने दोहराते हुए मिल जायेंगे...

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10 comments:

आलोक said...

सुरेश जी,
बात आपकी वाजिब है, और चर्चा न हो पाने की वजह शायद यह भी थी कि आपने प्रकाशित टिप्पणियों के जवाब नहीं दिए। टिप्पणियों के जवाब देने से(मुद्दे के बारे में, व्यक्ति के बारे में) यह प्रकट होता है कि आप चर्चा को बढ़ावा देना चाहते हैं। मेरा अनुरोध है कि आप यह चर्चा जारी रखें।

हाँ, लोग चर्चा से इसलिए भी कतराते हैं कि "विरोधी" गाली गलौज करेंगे। आप यह शर्त भी रख सकते हैं कि कोई व्यक्तिगत आक्षेप नहीं होंगे। इससे भी चर्चा में शामिल होने के इच्छुक लोग सामने आएँगे।
आलोक

आलोक said...

मुद्दे के बारे में, व्यक्ति के बारे में
मुद्दे के बारे में, व्यक्ति के बारे में नहीं

Anonymous said...

Ok,here Anonymous again,
I wud like to suggest u this book and sply this chapter-16.(but to acquire capability to understand this stuff some spirituality is mandatory...this material is just to initiate a systematic discussion instead of ur aggressive and highly bigotries arguments)
http://www.crystalclarity.com/yogananda/chap16.html
Mean while some more interesting facts regarding medical astrology
http://www.astrologer-drsudhirshah.com/art_intro_of_astrology.html.
I would be happy if once u come to category of learners.At present u r saying that u wnt to knw, u want to learn and bla bla bla.....but u knw the reality that u r very much prejudiced and ur mind is preoccupied and not ready to take anything new,it will take some time so once u come out of this stage i'll surely expose my identity and make so many stuff available to u.
and my dear 1 basic mistake u have made,do u think real expertise astrologers use to read ur blog or they spend their time to surf on net or to post blogs ?then unfortunately ur absolutely wrong.practically still our expertise astrologers are not that much adict of internet.(Just check in ur own city ..how many astrologers use internet? and how many are eager/able to put their knowlege on internet)infact if u use ur commonsense u'll conclude that most of these kind or arts and knowledge are still behind curtains....they will not come to u...u need to go their to find out the truth not thru net but thru ur physical presence (coz to obtain heavenly treasures u need to die first)
and about ur horoscope then my poor friend understand one thing that predictions done by astrologers are based on ur horoscope.can u take guarantee that horoscope provided by u is accurate,no mistake is made from ur side.
Neways will continue this chat in next session i'll like to inform u about some other basic things.but only when i have confidence that now u r a learner.and i dont need to mention that this decision will be taken by me as u have already taken so many prejudiced decisions which are not much impressive.

Anonymous said...

One more thing i forgot to mention that
"Only in quite waters do things mirror themselves undistorted
only in a quite mind is adequate perception of the World"

So first cool down ...no need to be Red..
though probably it will tough to u coz ur words reflect ur own personality and on basis of ur words it can be easiluy concluded that u r very much short tempered and frustrated person....sorry for this prediction and its without ur horoscope:)
have a nice time ahead.:)

नितिन व्यास said...

लेख अच्छा है, Anonymous जी आप भी अपना पक्ष शांति से रखें, तो चर्चा में आनंद आयेगा।

Anonymous said...

yes Nitin ji,
abhi to yeh angdai he....

neways, I generally avoid to be a part of blog discussion but this time me too enjoying it...

vaise bhi "baat nikali he to fir door talak jayegi...."

so u can expect something nice from my side.

:)

Anonymous said...

Go thru this....

http://www.vedicstore.com/jyotish.html

gatyatmak jyotish said...

हर विज्ञान की एक सीमा होती है और इसके अंदर ही कार्य किया जा सकता है। यदि मैं कहूं कि मेरे गावं के दसों बीमार , जो सदीZ , खॉसी , जुकाम से लेकर एड्स तक से पीिड़त हैं , को एलोपैथी ठीक कर दे , तीाी वह विाान है , अन्यथा यह गलत , तो आप मान लेंगे क्या ? डॉ.अब्राहम कोवूर द्वारा दी गई चुनौतियों में से अपने तर्क को सही रख पाने की पूरी व्यवस्था है। इसलिए इस चुनौती को हम नहीं स्वीकार कर सकते। किसी व्यक्ति की आयु को समझ पाना बहुत ही मुिश्कल कार्य है। प्राचीनकाल में जब मेडिकल साइंस विकसित अवस्था में नहीं था, तो अधिकांश बालक बचपन में ही भगवान को प्यारे हो जाते थे। एक बार किसी बीमारी का प्रकोप होता तो सब माताओं की गोद सूनी हो जाती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है, आज दो बच्चों को जन्म देने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की माताएं भी परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल शौक से करती हैं। उस समय की तुलना में आज मृत्यु-दर में काफी कमी देखी जा रही है, परंतु ग्रहो की स्थिति पर गौर किया जाए, तो हम पाएंगे कि उसमें कोई अंतर नहीं आया है। तब तो यह नििश्चत तौर पर कहा जा सकता है कि आज मनुष्य की आयु उसके अपने कारनामों से ही बढ़ी है, उसमें ग्रहों का खास प्रभाव नहीं है। हॉ, कभी-कभी जीवन में शारीरिक मृत्युतुल्यकष्ट आने की संभावना बनी होती है, किन्तु उस कष्ट को झेलने के बाद पुन: उनका जीवन अच्छा हो जाता है । कभी-कभी किसी खास प्रदेश में किसी प्राकृतिक दुघZटना के घटने से उस क्षेत्र के आधे से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के अन्य प्रदेशों में जन्म लेनेवालों से अलग समयांतराल में होता है ? नहीं। ऐसा नहीं माना जा सकता। किन्तु किसी जनमकुंडली से उसकी सारी परिस्थितियों को बतलाया जा सकता है।

gatyatmak jyotish said...

ज्योतिष की विवादास्पदता को दूर करने के लिए मैं एक उपाय बताना चाहूंगी। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के पॉच लोगों की टीम हो , सभी ज्योतिष के प्रति किसी प्रकार के पूर्वाग्रह से ग्रसित न हों। सािा ही उनके सही जन्मविवरण मौजूद हों। वे एक प्रतियोगिता का आयोजन करें , जिसमें उनका जनमविवरण रखा जाए । सभी व्यक्तियों से उनकी जन्मकुंडली का विष्लेषण करने को कहा जाए , चाहे वह ज्योतिषी हों या न हों। इसके बाद अपनी-अपनी टिप्पणियों को पॉचों सजजन पढ़ें और तय करें कि ज्योतिष विवादास्पद है या नहीं ?

रजनीश मंगला said...

ज्योतिष को मैं भी नहीं मानता। मेरे हिसाब से आप ठीक हैं।