Thursday, November 15, 2007

ज्योतिष : अखबार और पत्रिकायें

Astrology, Newspaper, Magazines

यदि ज्योतिष कोई शास्त्र या विज्ञान नहीं है तो विभिन्न पत्र-पत्रिकाएं और अखबार क्यों राशि-भविष्य आदि छापते हैं?

यह प्रश्न कई बार हमसे लोगों ने किया है, उसके जवाब के लिये पहले एक मजेदार कथा सुनें- इंग्लैंड के एक स्कूल में मैडम ने बच्चों से पूछा कि अब तक पृथ्वी पर सबसे महान विभूति कौन सी हुई है, यदि यह सवाल कोई बच्चा बता दे तो मैं उसे दस डालर दूँगी। कई बच्चों ने कई प्रकार के जवाब दिये, जैसे आइंस्टीन, गैलिलीयो, सेंट थॉमस, सेंट पीटर, मदर टेरेसा आदि, लेकिन मैडम ने सभी को नकार दिया। फ़िर एक गुजराती बच्चा बोला- मैडम मेरा जवाब है “ईसा मसीह”। मैडम ने खुश होकर कहा- वेलडन बच्चे एकदम सही जवाब, ये लो दस डालर। मुझे खुशी है कि तुमने एक भारतीय होकर भी राम और कृष्ण का नाम नहीं लिया और जीसस का नाम लिया।
गुजराती बच्चा बोला- मेरा दिमाग भी जवाब में कृष्ण ही कहता है, लेकिन धंधा तो धंधा है।

ठीक इसी प्रकार अखबारों और पत्रिकाओं के लिये भी ज्योतिष सम्बन्धी समाचार, भविष्यवाणियाँ, विज्ञापन, तस्वीरें आदि लगातार छापना उनकी व्यवसायगत मजबूरी है। भारत की जनसंख्या यदि एक अरब बीस करोड़ भी मान लें, तो औसतन बारह राशियों के हिसाब से एक राशि के दस करोड़ लोग तो होंगे। अब रोजाना भविष्यवाणी में कुछ भी ऊटपटाँग लिखा भी जाये तो जाहिर सी बात है कि लाखों व्यक्तियों पर वह कथन सही ही बैठेगा (Law of Probability), किसी का प्रमोशन होता है, किसी की दुर्घटना होती है, किसी का विवाह तय होता है, कोई यात्रा करता है, किसी को धंधे में नफ़ा-नुकसान होता है, इसमें कोई नई या वैज्ञानिक बात नहीं है।

अखबारों या पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली भविष्यवाणियाँ राशि आधारित होती हैं, जाहिर है कि वे पूरी तरह से अवैज्ञानिक और सिर्फ़ अनुमान भर हैं, क्योंकि उसमें लग्नराशि, ग्रहयोग या कुंडली स्थान बल आदि पर विचार नहीं किया जाता। यहाँ तक कि अग्रगामी और आधुनिक कहे जाने वाले कई अखबार भी ये भविष्यवाणियाँ आदि छापते रहते हैं, क्योंकि ये धंधे का सवाल है, यदि अखबार मालिक तर्कबुद्धि से विचार करने लगें तो उन्हें लाखों रुपये रोजाना का नुकसान हो सकता है। “सिर्फ़ सिद्धांतवाद से काम नहीं चलता, धंधा-पानी और कमाई ज्यादा महत्वपूर्ण है”।

न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य पाश्चात्य अखबार भी इस प्रकार की राशियाँ आदि छापते रहते हैं। सिगरेट के पैकेट पर छपी चेतावनी को नजरअंदाज करके भी करोड़ों लोग लगातार धूम्रपान करते ही रहते हैं, यदि उसी प्रकार सभी ज्योतिषी यदि कुंडलियों पर यह छापने लगें कि “कुंडली के आधार पर भविष्य पर विश्वास करना मूर्खता है”, तब भी उनकी कमाई में कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। लोकसत्ता के सम्पादक श्री माधव गड़करी ने खुद एक बार यह स्वीकार किया था कि अखबार में छपने वाला राशि भविष्य उन्होंने कई बार उलट-पुलट कर वही-वही वाक्य अलग-अलग बार दोहरा कर छाप दिये। लोग उन भविष्यवाणियों को पढ़ते हैं एक आनंद लेने के तौर पर। यदि उसमें व्यक्ति के पक्ष का कुछ लिखा हो तो वह खुश हो जाता है, विपक्ष का कुछ लिखा हो तब भी वह उसे खास महत्व नहीं देता। इसलिये सिर्फ़ अखबारों में या यत्र-तत्र ज्योतिष के बारे में लिखा जाता है यह कहकर ज्योतिष को विज्ञान या महान शास्त्र नहीं कहा जा सकता।

ज्योतिष के एक पक्ष का तो मैं भी समर्थन कर सकता हूँ, वह पक्ष है “इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव”। एक अच्छा ज्योतिषी एक अच्छा मनोवैज्ञानिक होता है, बल्कि होना भी चाहिये। भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है यह कोई नहीं बता सकता चाहे वह कितना ही महान क्यों न हो। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी और निरन्तर संघर्षों से एक सामान्य आदमी घबरा जाता है, कई बार निराश-हताश हो जाता है (दुःख, परेशानियाँ, कष्ट लगभग 95 प्रतिशत लोगों के जीवन में होते ही हैं) तब उस वक्त वह आसान रास्ते के तौर पर ज्योतिषी के पास जाता है। ज्योतिषी उसे उसके भविष्य के बारे में कुछ (बल्कि अधिकतर) अच्छा बताकर उसे दिलासा देते हैं, “अगले एक वर्ष तक तुम पर शनि-मंगल का साया है”, या फ़िर “आप मेहनत तो बहुत करते हैं लेकिन राहु-केतु आपको सफ़ल होने से रोक रहे हैं” आदि कहकर उसे मनोवैज्ञानिक धैर्य देने की कोशिश करते हैं और उसमें सफ़ल भी होते हैं, क्योंकि आमतौर पर ज्योतिषी से मिलने के बाद व्यक्ति में एक स्थैर्य का भाव आ जाता है “कि अपनी किस्मत ही खराब है इसलिये यह हो रहा है, लेकिन महाराज ने कहा है कि अगले एक-दो साल में स्थिति बदलेगी”, फ़िर वह लगातार संघर्ष करता जाता है, अपनी तरफ़ से कुछ न कुछ उपाय करता ही है, कभी वह सफ़ल हो जाता है तो क्रेडिट ज्योतिषी को देता है, और पुनः असफ़ल हो जाता है तो ज्योतिषी को कभी दोष नहीं देता, अपनी किस्मत को देता है। यह मानव स्वभाव है, कि कष्टों में जहाँ से उसे मानसिक आधार मिले उसे वह अपना मान लेता है। उसके दुःख के सामने उसकी सामान्य तर्कबुद्धि भी काम करना बन्द कर देती है और फ़िर वह छोटी-छोटी बातों के लिये भी ज्योतिषी के चक्कर लगाने लगता है।

इस विस्तृत और विवादित लेखमाला को फ़िलहाल स्थगित करते हुए इतना ही कहना चाहूँगा कि –

(१) मेरा यह दावा कभी नहीं रहा कि मैं ज्योतिष को सम्पूर्ण रूप से जानता हूँ।
(२) एक आम आदमी की सामान्य तर्कबुद्धि में जो शंकायें आती हैं या आ सकती हैं, यह उन्हें उठाने की एक कोशिश भर थी।
(३) कई ज्योतिषी भी मानते हैं कि ज्योतिष कोई सम्पूर्ण शास्त्र नहीं है, लेकिन वे इस पर विवाद, चर्चा, प्रयोग आदि करने से भी बचना चाहते हैं।
(४) शत-प्रतिशत भविष्यवाणी यदि कोई कर दे तो वह ‘ब्रह्मा” ही न हो जाये, लेकिन किसी शास्त्र या विज्ञान या सिद्धान्त को साबित करने के लिये कम से कम अस्सी प्रतिशत सम्भावनायें तो खरी उतरनी ही चाहिये, यही हमारा आग्रह है कि प्रयोगों के जरिये कम से कम अस्सी प्रतिशत सफ़लता हासिल की जाये, फ़िर जो इसे नहीं मानते हैं वे भी इसका लोहा मानेंगे और ज्योतिष समर्थकों के पास एक “डाक्यूमेंट्री प्रूफ़” भी होगा। इसे एक विकसित विज्ञान बनाने के लिये सतत प्रयोग करना ही एकमात्र उपाय है। इसके लिये ज्योतिष विद्वान और वैज्ञानिक साथ में एकत्रित हों, पूर्वाग्रह छोड़कर नवीन प्रयोग करें, और इसे आम जनता तक आसान और तर्कपूर्ण भाषा में पहुँचायें, तब इस पर चढ़ा हुआ रहस्यमयी आवरण भी हटेगा।


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6 comments:

आशीष said...

सर इस बार की आउटलुक में काफी बड़ा लेख इसी पर हैं

BHUVNESH SHARMA said...

बढिया लेख खासकर माधव गड़करीजी की बात सौ फीसदी सही है.....

संजय तिवारी said...

सही लेख. धंधा तो धंधा है.

रजनीश मंगला said...

बहुत सही लिखा है। आपकी लेखनी में जादू है। आप हर पहलू से नज़र डालते हैं। बहुत खूब।

सागर चन्द नाहर said...

बड़ी तगड़ी मेहनत कर रहे हो दोस्त, लगे रहो एक एक का नंबर लो। पहले.... और अब ज्योतिष!
कोई छूटने ना पाये :)

P K Surya said...

BHAIYA jo bhi he mujhe pata he 1 hazar me 1 jotishacharya he baki sale upayacharya hen me bhi ek jyotish hun ap mujhe apna date of birth, time of birth, place of birth den sath me mujhe apne vivah ka date de jab vivah ke date pakki hui thi, me apko bahut kichh bata sakta hun, bus prashna uchit hona chahiye,jyotish puri tarah se ganana par adharit he, mujhe ap phone kar sakte hen, P K Surya08800313941