“ज्योतिष” विज्ञान नहीं, कोरी कल्पना और अनुमान है
Astrology, Science, Fiction and Predictions
मेरे एक लेख “क्या आप भगवान को मानते हैं?” के जवाब में कुछ ज्योतिषी बन्धु बहुत लाल-पीले हुए थे और मुझे अधर्मी, अज्ञानी का खिताब दिया था। अक्सर अपने धन्धे की मार्केटिंग के लिये ज्योतिष को “विज्ञान” बताया जाता है, ताकि शिक्षित लोग भी उसके झाँसे में आ जायें। इसी विषय को लेकर मैंने कुछे मुद्दे उठाने की कोशिश इस लेखमाला में की है, जिस पर विचार किया जाना, बहस-मुबाहिसा किया जाना, नये-नये तर्क दिया जाना आवश्यक है ताकि भ्रम छँटे और वास्तविक स्थिति लोगों के सामने आ सके।
यह बात तो सभी मानेंगे कि जब तक ज्योतिष और ग्रहों के तथाकथित असर जब तक साबित नहीं हो जाते, कम से कम तब तक तो ज्योतिष विद्या एक “अप्रायोगिक विश्वास” ही है, लेकिन सिर्फ़ यही आधार ज्योतिष को विज्ञान नहीं होना सिद्ध नहीं करता, कुछ और भी आधार हैं जिन पर विचार किया जाना आवश्यक है ताकि साबित किया जा सके कि ज्योतिष विज्ञान नहीं है, बल्कि कोरे अनुमान, ऊटपटाँग कल्पनायें और खोखला अंधविश्वास है।
सिर्फ़ यह कह देने भर से कि रोजाना हजारों ज्योतिषियों के लाखों अनुमान गलत साबित होते हैं, इसलिये ज्योतिष विज्ञान नहीं है, भी काफ़ी नहीं होगा। ज्योतिष-भाग्य-पूर्वजन्म आदि को मानना न मानना हरेक का व्यक्तिगत मामला है, लेकिन जब ज्योतिष को “विज्ञान” बताया जाता है तब असली आपत्ति शुरु होती है। सबसे पहला प्रश्न तो उठता है- विज्ञान क्या है? ऑक्सफ़ोर्ड के एक शब्दकोष के अनुसार – “ज्ञान की एक शाखा, विशेषकर वह जो वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हो, एक संगठित संस्था द्वारा एकत्रित प्रयोग आधारित जानकारी पर आधारित सूचनाओं का भंडार”। विज्ञान की इस परिभाषा को यदि ‘ज्योतिष’ पर लागू किया जाये तो इनमें से कोई भी सिद्धांत ज्योतिर्विज्ञान पर लागू नहीं होता है, न तो वैज्ञानिक परिभाषायें ना ही भौतिक अवस्थायें, कैसे? आगे देखते हैं
“इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका” के अनुसार, “ग्रहों के काल्पनिक वृत्त (या निशान) अथवा कोई काल्पनिक गोलाकार (जैसे- राशियाँ आदि) किसी प्रकार की “शक्ति” से लैस होते हैं या उनके कोई विशेष प्रभाव होते हैं, यह सिद्धांत विज्ञान को मान्य नहीं हैं”। इसमें एक और बात भ्रम पैदा करने वाली यह है कि भारतीय ज्योतिषियों और पश्चिमी “एस्ट्रोलॉजी” के सिद्धांतकारों में भी इन “शक्तिशाली ग्रहों” के स्थान आदि पर भारी मतभेद हैं, इसी से ज्योतिष सम्बन्धी सारे अनुमान विसंगतिपूर्ण हो जाते हैं। ज्योतिष का मूल सिद्धांत यह है कि तमाम ग्रह या नक्षत्र अपने-अपने स्थान (घर) में स्थित होकर उसी के अनुसार व्यक्ति को फ़ल या कुफ़ल देते हैं, पूरी तरह से काल्पनिक और मात्र पूर्व अनुमानों पर आधारित होता है। ये कल्पनायें भी इस प्रकार हैं- “ग्रहों को अपना खुद का ज्ञान होता है”, “सारे ग्रह ज्योतिषियों की तरह जानकारी रखते हैं और जिस ‘घर’ में वे होते हैं उसी के अनुरूप वे सदा पवित्र या अपवित्र शक्तियाँ मानवों को देते चलते हैं”, जो कि ज्योतिषी तमाम गणनायें करके बताते हैं। इस प्रकार की अनोखी और अलौकिक कल्पनायें विज्ञान की कसौटी पर कहीं से कहीं तक खरी नहीं उतरतीं। इस तर्क का ज्योतिष विज्ञानी(?) कभी भी खंडन नहीं करते, इसलिये “ज्योतिष विज्ञान नहीं है, सिर्फ़ कल्पना है” इस बात को बल मिलता है।
क्या मनुष्य के जीवन को ग्रह प्रभावित करते हैं?
“स्वर्गीय” या ग्रहों के प्रभाव पृथ्वी पर दो तरह से असर डाल सकते हैं- पहला है प्राकृतिक या भौतिक और दूसरा है ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार।
(१) भौतिक रूप – सूर्य और चन्द्रमा मनुष्य जीवन को प्रभावित करते हैं, भौतिक स्वरूप में। मनुष्य जीवन ऊर्जा से चलता है, और सूर्य हमें अपनी भौतिक किरणों से हमें ऊर्जा और ऊष्मा प्रदान करता है। सूर्य के कारण ही भिन्न-भिन्न मौसम, वर्षा, ठंड आदि आते-जाते हैं। सूर्य और चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण और चुंबकीय बलों के कारण धरती पर समुद्र में ज्वार-भाटा आदि आते हैं, इससे सिद्ध होता है कि सूर्य और चन्द्रमा मानव जीवन पर अपना भौतिक असर डालते हैं। इन प्रभावों को हम तमाम वैज्ञानिक विधियों और उपकरणों से नाप सकते हैं, प्रभाव को कम-ज्यादा कर सकते हैं। लेकिन क्या बाकी के सारे ग्रह भी इसी प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं? इसका उत्तर है कि- यदि मान लिया जाये कि उन सभी ग्रहों का कुछ असर होता भी है तो उनकी दूरी के कारण वह बेहद अप्रभावी और लगभग उपेक्षा करने योग्य होता होगा। क्योंकि आज तक किसी ज्योतिषी ने किसी उपकरण द्वारा यह नहीं बताया है कि किसी ग्रह विशेष की किरणों(?) से मनुष्य को कितना नुकसान हुआ है? एक खास बात ध्यान देने वाली यह है कि सूर्य और चन्द्रमा के जो भी प्रभाव मनुष्य पर पड़ते हैं, वे सार्वजनिक और समानुपात से सभी पर पड़ते हैं, ना कि ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार, जिसमें “मंगल” चुन-चुनकर लड़कियों या लड़कों को अपना निशाना बनाता है। सीधी बात है कि किसी ग्रह का असर सभी मनुष्यों पर समान रूप से पड़ना चाहिये, न कि व्यक्तिगत रूप से (यदि यह विज्ञान है, तो)।
(२) दूसरा रूप विशुद्ध ज्योतिष के अनुसार- कि प्रत्येक ग्रह मनुष्य जीवन पर प्रभाव डालता है। ये और बात है कि आज तक प्रायोगिक रूप से इस बात को किसी महान ज्योतिषी ने साबित नहीं किया है, न कोई वैज्ञानिक उपकरण से मापा गया है, ना ही किसी अन्य विधि से सर्वमान्य रूप से इसे सिद्ध किया गया है, बस मान्यता है कि ऐसा होता है, कैसे और क्यों होता है, इसके बारे में पूछना बेकार है और ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति विशेष पर ही क्यों पड़ता है, समूची धरती पर एक साथ नहीं? कार्ल ई.कोपेन्शर ने तथाकथित “मंगल प्रभाव” को सिरे से गलत साबित कर दिया है, साथ ही इस बात को भी गलत साबित कर दिया कि ग्रहों का प्रभाव अनुवांशिकी भी होता है (जैसी कि मान्यता है कि पिता और पुत्रों की कुंडलियों में काफ़ी समानतायें पाई जाती हैं)। इसलिये अब तक इस बारे में कोई पक्का सबूत पेश नहीं किया गया है कि ग्रहों और नक्षत्रों का प्रभाव होता है, या मनुष्य पर पड़ता है।
खगोल विज्ञान और ज्योतिष का घालमेल करना-
प्रत्येक ज्योतिषी और भारत में ज्योतिष को मानने वाले सदा जपते रहते हैं कि पृथ्वी और अन्य दूरस्थ ग्रहों का आपस में कुछ सम्बन्ध होता है। वे यह बात जन्म से ही मानकर चलते हैं और जमाने भर को घुट्टी में पिलाते रहते हैं, कि तारे और ग्रह कोई विशेष प्रकार की किरणें छोड़ते हैं जो धरती पर इन्सानों और यहाँ तक कि घटनाओं को भी प्रभावित करती है। तत्काल यह प्रश्न उठना चाहिये कि ये ज्योतिषीय प्रभाव या किरणें या असर (या जो भी कुछ है), वह पृथ्वी तक पहुँचता कैसे है? विज्ञान ने यह सिद्ध किया है कि किसी भी प्रकार के बल या तरंगों को दूर तक प्रवास करने और वहाँ कुछ असर डालने के लिये तीन प्रकार के बलों की आवश्यकता होगी ही –
(१) इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण (Electromagnetic Radiation)
(२) गुरुत्वाकर्षण (Gravitational Attraction) या
(३) चुम्बकीय तरंगे (Magnetic Fields)
अब कम से कम विज्ञान तो इन तीन कारणों के अलावा और कोई कारण नहीं जानता, जिससे कि सुदूर स्थित कोई पिंड अपना प्रभाव धरती तक पहुँचा सके। अब कुछ क्षणों के लिये मान भी लिया जाये कि इनमें से किसी एक कारण से कोई ग्रह हमें प्रभावित करता है तो यह देखना होगा कि ज्योतिषीय सिद्धांत इनमें से किसमें “फ़िट” बैठता है। ... जारी रहेगा भाग-२ में भी....
अगले भाग में इन्हीं सिद्धांतों पर जरा विस्तार से चर्चा करूँगा और साथ ही कुछ और तर्क...
Astrology, Astronomy, Science, Fiction, Predictions, Grah Nakshatra, Kundli, Stars, ज्योतिष, खगोल विज्ञान, विज्ञान तर्क, अनुमान, कल्पना, ग्रह, नक्षत्र, तारे![]()


