Friday, October 26, 2007

१०,००० हिट्स और मेरी ब्लॉग यात्रा

10000 hits and Blogging

अमूमन मैं अपने ब्लॉग का “स्टैट काऊँटर” नहीं देखता (ब्लॉग पर काफ़ी नीचे लगा हुआ है, और उस पर मेरी निगाह नहीं पड़ती), लेकिन कल जब अचानक उस पर मेरी नजर पड़ी तो मैं चौंक गया क्योंकि वह दस हजार का आँकड़ा पार कर गया था। मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा। फ़िर मैंने हिसाब लगाना शुरु किया, कि २६ जनवरी २००७ को ब्लॉगिंग की दुनिया में कदम रखने के बाद अभी तो मात्र नौ महीने ही हुए हैं और हिट्स का आँकड़ा दस हजार पार कर गया, मतलब लगभग औसतन एक हजार से अधिक पाठक प्रत्येक माह में। यानी लगभग ३५ पाठक रोजाना (मन में सोच रहा हूँ कि “not bad”)। मुझे इस प्रगति से सन्तुष्ट होना चाहिये, क्योंकि २३ पाठक तो मेरे “सब्स्क्राईबर” हैं (यह तो तकनीकी लोग ही बतायेंगे कि सबस्क्राईब करने वाले की हिट्स भी इसमें शामिल होती हैं या नहीं, क्योंकि आमतौर पर सब्स्क्राइब करने वाला दोबारा ब्लॉग पर हिट नहीं करता)

मैं “नेटवर्किंग” के मामले में बहुत कमजोर हूँ। जिस तन्मयता और लगन से “उड़न तश्तरी” टिप्पणियाँ करते हैं, वैसी यदि मैं करता तो न जाने यह आँकड़ा कहाँ का कहाँ होता (कई वरिष्ठ ब्लॉगरों की यह सलाह है कि यदि हिट्स की संख्या बढ़ानी हो तो दूसरों के चिठ्ठों पर जा-जाकर टिप्पणियाँ करो)। लेकिन मैं इस मामले में बहुत नालायक हूँ, ब्लॉग पढ़ तो लेता हूँ, लेकिन “बहुत अच्छा”, “अच्छा लिखा है”, “मजा आ गया” जैसी औपचारिक टिप्पणियाँ मुझसे होती ही नहीं, जब तक लिखने वाले ने ऐसा कुछ ना लिखा हो जिससे कोई नई बात सूझे, या कोई विवाद की स्थिति हो तब तक मैं टिप्पणी कर ही नहीं पाता (इसे मेरा स्वभाव कहा जा सकता है), ना ही मैंने कोई “ब्लॉग-रोल” बनाया हुआ है, ना ही मैंने अपने चिठ्ठे पर “मेरे पसन्दीदा” नामक लिस्ट लगाई हुई है (इसका समय ही नहीं मिल पाता)। अपने छोटे से काम-धन्धे में से बड़ी मुश्किल से समय चुराकर ब्लॉग लिखना पड़ता है (घर पर कम्प्यूटर नहीं है), अब ब्लॉग लिखूँ, उस ब्लॉग पर रिसर्च करूँ, फ़िर उसे तरतीबवार जमाऊँ और पोस्ट करूँ, तो फ़िर दूसरे ब्लॉग पर टिप्पणी करने का समय ही नहीं मिल पाता (आशा है मित्रगण मुझे माफ़ करेंगे)।

लेकिन इन नौ-दस माह के ब्लॉग प्रवास के दौरान “उड़न-तश्तरी”, “ई-पंडित”, “सागर भाई”, "पंगेबाज" आदि का नियमित स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहा, वरना मैं तो अखबारों में ही लिखने में मस्त था। ब्लॉगिंग नाम की “खुजली” जब से लगी है, न दिन को चैन है ना रातों को आराम.... जब कोई विषय दिमाग में घूमता है, तब से लेकर उस पर शोध, अध्ययन और उसके पोस्ट होने तक की “प्रसव-पीड़ा” का बयान करना मुश्किल है। इस कालखंड में “सोनिया गाँधी” वाली सीरिज पर खूब गालियाँ भी खाई, वहीं “उच्चारण और वर्णमाला” सीरिज के लिये काफ़ी तारीफ़ भी पाई। अब ज्योतिषियों के पीछे पड़ा हूँ...क्या करूँ.... आदत से मजबूर हूँ, छोटे-छोटे ब्लॉग लिख ही नहीं पाता (जब तक बाल की खाल ना निकाल लूँ आराम नहीं आता), इसलिये सीरिज में लिखना पड़ता है (कई मित्रों को बुरा लग सकता है, लेकिन यहाँ मैं यह उल्लेख करना उचित समझता हूँ कि मराठी ब्लॉग विश्व के मुकाबले हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में बड़े-बड़े लेख पढने का मिजाज़ अभी पाठकों में नहीं आया है, कम से कम मुझे तो ऐसा प्रतीत हुआ है).... साथ ही हिन्दी ब्लॉगिंग में हिट्स और टिप्पणियाँ उन्हें अधिक मिलते हैं, जिनके चिठ्ठे पर कोई विवादित, सांप्रदायिक या महिलाओं से सम्बन्धित बात हो, जबकि तथ्यपरक, खोजपरक और स्वस्थ बहस को जन्म देने वाले ब्लॉग की संख्या काफ़ी कम है। बहरहाल.... ब्लॉग के सेंसेक्स के दस हजार छूने पर सभी मित्रों, पाठकों, समर्थकों और विरोधियों का आभार... ऐसे ही प्रेम बनाये रखें... मैं उम्दा लिखने की भरसक कोशिश जारी रखूँगा ही...फ़िलहाल मैं २३ सब्स्क्राइबर और रोज की औसतन ३०-३५ हिट्स से सन्तुष्ट हूँ.... देखते हैं कि आगे-आगे क्या होता है...

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12 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत बहुत बधाई लिजिये. अब तो जल्दी ही आप देखेंगे कि १००००० पार कर लिया. बस इसी तनमन्यता से लिखते चलें और कभी कभी टिपियते भी. :) दोस्त गलत सलाह नहीं दे रहे हैं आपको.

मुकेश कुमार said...

आप को बधाई आप एसे ही आगे बढे
पर आप को एक जानकारी देता हु मेने केवल 45 दिन मे ही 17400 Hits पा लिये व आजकल प्रतिदिन लगभग 1200 Hits हो रहें ......


www.gossindia.blogspot.com

उन्मुक्त said...

दस हजार का आंकड़ा पार करने की बधाई। आप एक लाख का आंकड़ा पार करे, ऐसी कामना।

Raviratlami said...

सुरेश जी, बधाईयाँ.

और,बाइ द वे, मुकेश जी, जो अंग्रेजी सामग्री आपने अपने जाल स्थल पर भर रखी है उस हिसाब से तो 1200 हिट्स नेग्लीजिबल हैं!

Sagar Chand Nahar said...

सुरेशभाई
हमारी तरफ से भी बधाई स्वीकार कीजिये। देखिये अब कितनी जल्दी १० से २० हो जाते हैं।

अनिल रघुराज said...

सुरेश जी, मेरी भी विलंबित बधाई स्वीकार करें। और मुकेश जी के gossindia के बारे में मैं भी रतलामी जी राय से पूरा इत्तेफाक रखता हूं।

Shastri JC Philip said...

बधाई हो, बधाई !!!

खुशी की बात है, आश्चर्य की नहीं. जब आप पढने के लिये अच्छी सामग्री प्रदान करेंगे तो पाठक तो आयेंगे ही.

फीडस आपके काऊंटर पर नहीं आते हैं अत: उनको आप अतिरिक्त संख्या के रूप में जोड दें.

लिखते रहें ! कल उन चिट्ठाकारों का होगा जो विषयाधारित, सटीक, सामयिक, कालजाई, एवं संक्षिप्त लिखेंगे !!!

-- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है

काकेश said...

बधाई जी.आपकी लगभग हर पोस्ट पढ़ता हूँ आपकी मेल मिलने के बाद :-) बस टिप्पणी कभी कभी ही करता हूँ.

आपकी हिट जल्दी जल्दी बड़ें इसी कामना के साथ.

आपका http://kakesh.com

अजित said...

सुरेशभाऊ की जय जयकार हो...आनंद आया आपकी पोस्ट पढ़कर। ये कम नहीं कि अपना पीसी न होते हुए भी आप इतना सब कर रहे हैं। टिप्पणी करना और पाना दोनों ही महत्वपूर्ण नहीं है। आपके लिखे पर एक सार्थक सराहना भी मिले तो समझें कि दुनिया देख रही है।
आपकी सारी बातों से इत्तेफाक रखता हूं।
मुकेश जी के उत्साह का भी मान बढ़ाइयो और आप भी बढ़े चलिये। शुभकामनाएं ।

Gyandutt Pandey said...

बधाई हो जी! ऐसे ही आंकड़े के दायीं ओर बिन्दु बढते रहें - 100,000 फिर 1,000,000!

PD said...

बधाई हो आपको.. उम्मीद है आपका ये ब्लौग बहुत आगे जायेगा...
@ मुकेश जी : अभी तक हिन्दी ब्लॉगिंग अपने शैशव काल में ही है, नहीं तो मैं कुछ ऐसे अंग्रेजी के ब्लौग को जानता हूँ जिस पर प्रतिदिन ५०००० से ज्यादा हिट्स होते हैं...

Shrish said...

बधाई हो सुरेश जी दस हजारी क्लब में शामिल होने की। आपका लेखन दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करे, यही कामना है।