Saturday, September 22, 2007

मूर्खतापूर्ण, निरर्थक और ऊलजलूल वक्तव्यों का देश

Ridiculous Foolish Statements

स्वतंत्रता के साठ वर्षों का जश्न हमने अभी-अभी ही मनाया। देश के पिछले साठ सालों पर सरसरी नजर डालें तो सबसे ज्यादा खटकने वाली बात हम पाते हैं नेताओं और प्रशासन द्वारा दिये गये मूर्खतापूर्ण, निरर्थक, ऊटपटाँग और उलजलूल वक्तव्य। नेता क्या बोलते हैं, क्यों बोलते हैं, प्रेस विज्ञप्ति क्यों जारी की जाती है, इस बात का न तो उन्हें कोई मतलब होता है, न ही जनता को इससे कुछ मिलता है। हम सभी रोज अखबार पढते हैं, उसमें प्रथम पृष्ठ पर स्थित कुछ “हेडलाइनों” पर नजर पड़ती ही हैं, लेकिन इतने सालों के बाद अब समाचार पर नजर पड़ते ही समझ में आ जाता है कि भीतर क्या लिखा होगा, कुछ वाक्यों की तो आदत सी पड़ गई है । आइये नजर डालें ऐसे ही कुछ बेवकूफ़ी भरे वाक्यों पर – “विकास का फ़ल आम आदमी को मिलना चाहिये”, “गरीबों और अमीरों के बीच की खाई कम होनी चाहिये”, “हमें गरीबी हटाना है”, “विकास की प्रक्रिया में सभी को समाहित करना आवश्यक है”, “आम आदमी का भला होना ही चाहिये”.... इस प्रकार के कुछ अनर्गल से वाक्य देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोग गाहे-बगाहे अपने मुखारविन्द से उवाचते रहते हैं, सतत और अनथक रूप से। बस भाषण देना है इसलिये देना है और इन वाक्यों का समावेश किये बगैर भाषण पूरा नहीं होगा, फ़िर उस “खास” (?) व्यक्ति ने बोला है तो अखबारों को छापना ही है, छपा है तो हम जैसों को पढ़ना ही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इन नेताओं को ये रटे-रटाये और निरर्थक वाक्य बोलने में शर्म नहीं आती? स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात लोकतंत्र स्वीकार करने के बाद आम जनता के लिये न्यायपालिका, प्रेस, अफ़सरशाही और विधायिका का गठन हो गया है, तो अब आम आदमी का भला करने से इन्हें कौन रोक रहा है, जनता ने चुनाव में वोट देकर सरकार बनवा दी तो अब विकास की दौड़ में सभी को शामिल करना उनका कर्तव्य है, इसके लिये लाऊडस्पीकर पर जोर-जोर से चिल्लाने की क्या जरूरत है? अब तो पन्द्रह अगस्त का प्रधानमंत्री का भाषण हो या छब्बीस जनवरी का राष्ट्रपति का भाषण, अव्वल तो कोई सुनता ही नहीं, सुनता भी है तो हँसी ही आती है, उसमें भी ऐसे ही वाक्यों की भरमार होती है, “ऐसी ऊँची-ऊँची रख-रख के देते हैं कि कनपटी सुन्न हो जाती है”, अरे भाई करके दिखा ना, कि बस यूँ ही बोलता रहेगा...लेकिन नहीं...साठ साल हो गये बकबक जारी है। साठ साल बाद भी प्रधानमंत्री यह कहें कि हमें गरीबी मिटाना है और आम आदमी का भला होना चाहिये तो बात कुछ समझ नहीं आती। ये तो ऐसे ही हुआ कि अंबानी अपने कर्मचारियों से कहे कि कंपनी की प्रगति होना चाहिये, सबको वेतनवृद्धि मिलनी चाहिये, लेकिन खुद मुकेश अंबानी कुछ ना करे। ये सब होना चाहिये, इसीलिये तो वह मालिक है, तमाम मैनेजर हैं, शेयर होल्डर हैं, मजदूर तो सिर्फ़ वही करेगा जो उसे कहा जायेगा। लेकिन “आम आदमी”... शब्द का उपयोग करके नेता सोचते हैं कि वे अपनी “इमेज” बना रहे हैं, जबकि लोग मन-ही-मन गालियाँ निकाल रहे होते हैं। यही हाल प्रत्येक आतंकवादी हमले के बाद आने वाली वक्तव्यों की बाढ़ का है – “सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है” (हँसी), “रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है” (तेज हँसी), “हम आतंकवाद के सामने नहीं झुकेंगे”, “दोषी को सजा दिला कर रहेंगे” (ठहाके मार कर दोहरा होने लायक), “आम जनता से शांति बनाये रखने की अपील की है”, “मरने वाले को इतना और घायल को उतना मुआवजा दिया जायेगा”... अगड़म-बगड़म-तगड़म... क्या बकवास है यह सब? न उन्हें शर्म आती है, न हमें, न उन्हें गुस्सा आता है, न हमें। जेड श्रेणी की सुरक्षा में बैठा हुआ नेता यह सब बोलता रहता है, अखबारों में छपता है, हम पढ़ते हैं, फ़िर उसी अखबार में बच्चे को हगवा कर उसे नाली में फ़ेंक देते हैं, अगले दिन के अखबार की “हेडिंग” पढ़ने के इंतजार में.....

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4 comments:

BHUVNESH SHARMA said...

अरे सुरेशजी आप तो साठ सालों में ही घबरा गये. आप ऐसा करेंगे तो आगे आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा जिन्हें भी ये सब झेलना है. :)

सागर चन्द नाहर said...

अंतिम पैसा में आपने सब कुछ कह दिया यानि ना हमें गुस्सा आता है
सच बात तो है कि हम ही दोषी है, इस सबके लिये क्यों कि या तो हम वोट देते ही नहीं या दे भी देते हैं तो दिमाग से नहीं दिल से काम लेते हैं।

Shrish said...

क्या कहें जी ये बातें सुनते-सुनते ही तो हम बड़े हुए हैं और लगता है इनको सुनते-सुनते ही हमारे बच्चे भी बड़े होंगे।

अब तो ऐसी आदत हो गई है कि जो नेता इन बातों को नहीं बोलता उसके नेता होने पर शक होने लगता है।

deepanjali said...

आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.