Wednesday, September 12, 2007

संयुक्त राष्ट्र वाले मूर्ख हैं क्या?

संयुक्त राष्ट्र में पेश की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि “आतंकवाद से लड़ने के लिये भारत की तैयारी और प्रतिबद्धता काफ़ी कम है और उसे कानूनों में सुधार और सीमाओं पर चौकसी बढ़ाने की आवश्यकता है।“ जिस किसी अधिकारी या संस्था ने यह रिपोर्ट बनाई है और “मासूम” से संयुक्त राष्ट्र ने उसे जस का तस पेश भी कर दिया है, वे भोले हैं, या नादान हैं, या मूर्ख हैं यह तय कर पाना मुश्किल हो गया है। क्या ये लोग नहीं जानते हैं कि –

(१) भारत में देशप्रेम या देश के नाम पर कुछ नहीं किया जाता, यहाँ एक महान (?) लोकतन्त्र है इसलिये यहाँ सब कुछ “वोट” के लिये किया जाता है।

(२) इस देश में राष्ट्रभक्ति १५ अगस्त या २६ जनवरी पर “बासी कढ़ी में उबाल” जैसी आती है, या फ़िर एक मेक-अप की हुई नकली देशभक्ति, “ताज” पर वोट देने के दौरान आती है।

(३) यहाँ “देश की सीमायें” नाम की कोई चीज वजूद में नहीं है, भारत एक “विशाल धर्मशाला” है, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, नेपाली, तिब्बती कोई भी यहाँ कभी भी आ-जा सकता है कितने भी समय रह सकता है।

(४) राष्ट्रीय चरित्र की बात करने वाले को क्या मालूम कि भ्रष्ट कांग्रेस का एक सांसद इस देश का नागरिक ही नहीं है, फ़िर भी संसद में है, फ़र्जी वामपंथियों को बंगाल या असम में घुसपैठ नहीं दिखाई देती, नकली भाजपा वाले रामसेतु के आंदोलन कर रहे हैं, जबकि मध्यप्रदेश में सड़कें ही नहीं हैं। ५२५ सांसदों में से आधे से ज्यादा पर गम्भीर आपराधिक मामले हैं, और संसद में “अपना भत्ता बढ़वाने” के अलावा वे किसी बात पर सहमत नहीं होते हैं।

(५) यहाँ “अफ़जल” को फ़ाँसी से बचाने वाले भी मौजूद हैं, और चालीस-चालीस साल तक मुकदमा चलने के बावजूद फ़ैसला न देने वाली अदालतें मौजूद हैं। अनाथ बच्चों, विकलांगों और वृद्धों को मिलने वाली आर्थिक योजनाओं में भी करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाले सरकारी कर्मचारी हैं, धर्म की अफ़ीम पिलाकर “पाप-पुण्य” की कथायें सुनाने वाले बाबा मौजूद हैं, ज्योतिष-वास्तु-फ़ेंगशुई “बेचने” वाले कलाकार मौजूद हैं।

(६) और अन्त में “सौ बात की एक बात” – पड़ोसी के यहाँ खून होते देखकर अपना दरवाजा बन्द कर लेने वाली जनता, नेताओं की करतूतों को खामोशी से सहने वाली जनता, वोट देकर “सो” जाने वाली जनता, “एसएमएस” करने में भिड़ी हुई जनता, सेंसेक्स को टकटकी लगाये देखने वाली जनता, एकाध लालची अफ़सर को न मार कर खुद मर जाने वाले किसान, “स्टिंग” और टीआरपी के खेल में लगा हुआ मीडिया, सब-सब तो मौजूद हैं।

अब बताईये भला कैसे भारत आतंकवाद से लड़ेगा? पहले हम हर बात में पैसा तो खा लें, फ़िर सोचेंगे देश-वेश के बारे में....

7 comments:

Sanjeet Tripathi said...

शानदारम!!

अरुण said...

सही कहा है जी लेकिन देख सोच समझ कर कहा करो..कही कोर्ट वोर्ट के लफ़डे मे मत फ़स जाना..सच बोलना पाप है "सत्यमेव जयते"बस अकेले मे रहो कह्ते..:)

Gyandutt Pandey said...

भारत में दोष भी पर्याप्त हैं और प्रचुर है दोषदर्शिता भी. फिर भी काम चल रहा है. हम उन देशों से तो बेहतर हैं - जहां इस पर चर्चा ही कठिन है!

Shrish said...

बहुत ही धांसू आँखें खोलने वाला सटायर। ये लेख संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजा जाना चाहिए।

Raj said...

कोई तो सच बोला,प्र्णाम भाई,

संजय बेंगाणी said...

सही कहा.

Anonymous said...

नकली भाजपा वाले रामसेतु के आंदोलन कर रहे हैं, जबकि मध्यप्रदेश में सड़कें ही नहीं हैं ye baat kuch samajh nahin aai? ?? agar madhya pradesh men sadken nahin hain to SHREE RAM SETU par aandolan nahin hona chahiye kya