Thursday, August 9, 2007

सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं? (भाग-२)

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सोनिया गाँधी भारत की प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं या नहीं, इस प्रश्न का "धर्मनिरपेक्षता", या "हिन्दू राष्ट्रवाद" या "भारत की बहुलवादी संस्कृति" से कोई लेना-देना नहीं है। इसका पूरी तरह से नाता इस बात से है कि उनका जन्म इटली में हुआ, लेकिन यही एक बात नहीं है, सबसे पहली बात तो यह कि देश के सबसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन कराने के लिये कैसे उन पर भरोसा किया जाये। सन १९९८ में एक रैली में उन्होंने कहा था कि "अपनी आखिरी साँस तक मैं भारतीय हूँ", बहुत ही उच्च विचार है, लेकिन तथ्यों के आधार पर यह बेहद खोखला ठहरता है। अब चूँकि वे देश के एक खास परिवार से हैं और प्रधानमंत्री पद के लिये बेहद आतुर हैं (जी हाँ) तब वे एक सामाजिक व्यक्तित्व बन जाती हैं और उनके बारे में जानने का हक सभी को है (१४ मई २००४ तक वे प्रधानमंत्री बनने के लिये जी-तोड़ कोशिश करती रहीं, यहाँ तक कि एक बार तो पूर्ण समर्थन ना होने के बावजूद वे दावा पेश करने चल पडी़ थीं, लेकिन १४ मई २००४ को राष्ट्रपति कलाम साहब द्वारा कुछ "असुविधाजनक" प्रश्न पूछ लिये जाने के बाद यकायक १७ मई आते-आते उनमे वैराग्य भावना जागृत हो गई और वे खामख्वाह "त्याग" और "बलिदान" (?) की प्रतिमूर्ति बना दी गईं - कलाम साहब को दूसरा कार्यकाल न मिलने के पीछे यह एक बडी़ वजह है, ठीक वैसे ही जैसे सोनिया ने प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति इसलिये नहीं बनवाया, क्योंकि इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद राजीव के प्रधानमंत्री बनने का उन्होंने विरोध किया था... और अब एक तरफ़ कठपुतली प्रधानमंत्री और जी-हुजूर राष्ट्रपति दूसरी तरफ़ होने के बाद अगले चुनावों के पश्चात सोनिया को प्रधानमंत्री बनने से कौन रोक सकता है?)बहरहाल... सोनिया गाँधी उर्फ़ माइनो भले ही आखिरी साँस तक भारतीय होने का दावा करती रहें, भारत की भोली-भाली (?) जनता को इन्दिरा स्टाइल में,सिर पर पल्ला ओढ़ कर "नामास्खार" आदि दो चार हिन्दी शब्द बोल लें, लेकिन यह सच्चाई है कि सन १९८४ तक उन्होंने इटली की नागरिकता और पासपोर्ट नहीं छोडा़ था (शायद कभी जरूरत पड़ जाये) । राजीव और सोनिया का विवाह हुआ था सन १९६८ में,भारत के नागरिकता कानूनों के मुताबिक (जो कानून भाजपा या कम्युनिस्टों ने नहीं बल्कि कांग्रेसियों ने ही सन १९५० में बनाये) सोनिया को पाँच वर्ष के भीतर भारत की नागरिकता ग्रहण कर लेना चाहिये था अर्थात सन १९७४ तक, लेकिन यह काम उन्होंने किया दस साल बाद...यह कोई नजरअंदाज कर दिये जाने वाली बात नहीं है। इन पन्द्रह वर्षों में दो मौके ऐसे आये जब सोनिया अपने आप को भारतीय(!)साबित कर सकती थीं। पहला मौका आया था सन १९७१ में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ (बांग्लादेश को तभी मुक्त करवाया गया था), उस वक्त आपातकालीन आदेशों के तहत इंडियन एयरलाइंस के सभी पायलटों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गईं थीं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सेना को किसी भी तरह की रसद आदि पहुँचाई जा सके । सिर्फ़ एक पायलट को इससे छूट दी गई थी, जी हाँ राजीव गाँधी, जो उस वक्त भी एक पूर्णकालिक पायलट थे । जब सारे भारतीय पायलट अपनी मातृभूमि की सेवा में लगे थे तब सोनिया अपने पति और दोनों बच्चों के साथ इटली की सुरम्य वादियों में थीं, वे वहाँ से तभी लौटीं, जब जनरल नियाजी ने समर्पण के कागजों पर दस्तखत कर दिये। दूसरा मौका आया सन १९७७ में जब यह खबर आई कि इंदिरा गाँधी चुनाव हार गईं हैं और शायद जनता पार्टी सरकार उनको गिरफ़्तार करे और उन्हें परेशान करे। "माईनो" मैडम ने तत्काल अपना सामान बाँधा और अपने दोनों बच्चों सहित दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित इटालियन दूतावास में जा छिपीं। इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी और एक और बहू मेनका के संयुक्त प्रयासों और मान-मनौव्वल के बाद वे घर वापस लौटीं। १९८४ में भी भारतीय नागरिकता ग्रहण करना उनकी मजबूरी इसलिये थी कि राजीव गाँधी के लिये यह बडी़ शर्म और असुविधा की स्थिति होती कि एक भारतीय प्रधानमंत्री की पत्नी इटली की नागरिक है ? भारत की नागरिकता लेने की दिनांक भारतीय जनता से बडी़ ही सफ़ाई से छिपाई गई। भारत का कानून अमेरिका, जर्मनी, फ़िनलैंड, थाईलैंड या सिंगापुर आदि देशों जैसा नहीं है जिसमें वहाँ पैदा हुआ व्यक्ति ही उच्च पदों पर बैठ सकता है। भारत के संविधान में यह प्रावधान इसलिये नहीं है कि इसे बनाने वाले "धर्मनिरपेक्ष नेताओं" ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आजादी के साठ वर्ष के भीतर ही कोई विदेशी मूल का व्यक्ति प्रधानमंत्री पद का दावेदार बन जायेगा। लेकिन कलाम साहब ने आसानी से धोखा नहीं खाया और उनसे सवाल कर लिये (प्रतिभा ताई कितने सवाल कर पाती हैं यह देखना बाकी है)। संविधान के मुताबिक सोनिया प्रधानमंत्री पद की दावेदार बन सकती हैं, जैसे कि मैं या कोई और। लेकिन भारत के नागरिकता कानून के मुताबिक व्यक्ति तीन तरीकों से भारत का नागरिक हो सकता है, पहला जन्म से, दूसरा रजिस्ट्रेशन से, और तीसरा प्राकृतिक कारणों (भारतीय से विवाह के बाद पाँच वर्ष तक लगातार भारत में रहने पर) । इस प्रकार मैं और सोनिया गाँधी,दोनों भारतीय नागरिक हैं, लेकिन मैं जन्म से भारत का नागरिक हूँ और मुझसे यह कोई नहीं छीन सकता, जबकि सोनिया के मामले में उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। वे भले ही लाख दावा करें कि वे भारतीय बहू हैं, लेकिन उनका नागरिकता रजिस्ट्रेशन भारत के नागरिकता कानून की धारा १० के तहत तीन उपधाराओं के कारण रद्द किया जा सकता है (अ) उन्होंने नागरिकता का रजिस्ट्रेशन धोखाधडी़ या कोई तथ्य छुपाकर हासिल किया हो, (ब) वह नागरिक भारत के संविधान के प्रति बेईमान हो, या (स) रजिस्टर्ड नागरिक युद्धकाल के दौरान दुश्मन देश के साथ किसी भी प्रकार के सम्पर्क में रहा हो । (इन मुद्दों पर डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी काफ़ी काम कर चुके हैं और अपनी पुस्तक में उन्होंने इसका उल्लेख भी किया है, जो आप पायेंगे इन अनुवादों के "तीसरे भाग" में)। राष्ट्रपति कलाम साहब के दिमाग में एक और बात निश्चित ही चल रही होगी, वह यह कि इटली के कानूनों के मुताबिक वहाँ का कोई भी नागरिक दोहरी नागरिकता रख सकता है, भारत के कानून में ऐसा नहीं है, और अब तक यह बात सार्वजनिक नहीं हुई है कि सोनिया ने अपना इटली वाला पासपोर्ट और नागरिकता कब छोडी़ ? ऐसे में वह भारत की प्रधानमंत्री बनने के साथ-साथ इटली की भी प्रधानमंत्री बनने की दावेदार हो सकती हैं। अन्त में एक और मुद्दा, अमेरिका के संविधान के अनुसार सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले व्यक्ति को अंग्रेजी आना चाहिये, अमेरिका के प्रति वफ़ादार हो तथा अमेरिकी संविधान और शासन व्यवस्था का जानकार हो। भारत का संविधान भी लगभग मिलता-जुलता ही है, लेकिन सोनिया किसी भी भारतीय भाषा में निपुण नहीं हैं (अंग्रेजी में भी), उनकी भारत के प्रति वफ़ादारी भी मात्र बाईस-तेईस साल पुरानी ही है, और उन्हें भारतीय संविधान और इतिहास की कितनी जानकारी है यह तो सभी जानते हैं। जब कोई नया प्रधानमंत्री बनता है तो भारत सरकार का पत्र सूचना ब्यूरो (पीआईबी) उनका बायो-डाटा और अन्य जानकारियाँ एक पैम्फ़लेट में जारी करता है। आज तक उस पैम्फ़लेट को किसी ने भी ध्यान से नहीं पढा़, क्योंकि जो भी प्रधानमंत्री बना उसके बारे में जनता, प्रेस और यहाँ तक कि छुटभैये नेता तक नख-शिख जानते हैं। यदि (भगवान न करे) सोनिया प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुईं तो पीआईबी के उस विस्तृत पैम्फ़लेट को पढ़ना बेहद दिलचस्प होगा। आखिर भारतीयों को यह जानना ही होगा कि सोनिया का जन्म दरअसल कहाँ हुआ? उनके माता-पिता का नाम क्या है और उनका इतिहास क्या है? वे किस स्कूल में पढीं? किस भाषा में वे अपने को सहज पाती हैं? उनका मनपसन्द खाना कौन सा है? हिन्दी फ़िल्मों का कौन सा गायक उन्हें अच्छा लगता है? किस भारतीय कवि की कवितायें उन्हें लुभाती हैं? क्या भारत के प्रधानमंत्री के बारे में इतना भी नहीं जानना चाहिये!

(प्रस्तुत लेख सुश्री कंचन गुप्ता द्वारा दिनांक २३ अप्रैल १९९९ को रेडिफ़.कॉम पर लिखा गया है, बेहद मामूली फ़ेरबदल और कुछ भाषाई जरूरतों के मुताबिक इसे मैंने संकलित, संपादित और अनुवादित किया है। डॉ.सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा लिखे गये कुछ लेखों का संकलन पूर्ण होते ही अनुवादों की इस कडी़ का तीसरा भाग पेश किया जायेगा।) मित्रों जनजागरण का यह महाअभियान जारी रहे, अंग्रेजी में लिखा हुआ अधिकतर आम लोगों ने नहीं पढा़ होगा इसलिये सभी का यह कर्तव्य बनता है कि महाजाल पर स्थित यह सामग्री हिन्दी पाठकों को भी सुलभ हो, इसलिये इस लेख की लिंक को अपने इष्टमित्रों तक अवश्य पहुँचायें, क्योंकि हो सकता है कि कल को हम एक विदेशी द्वारा शासित होने को अभिशप्त हो जायें !

23 comments:

Sanjeet Tripathi said...

शुक्रिया इसे पढ़वाने के लिए!!

Sanjeeva Tiwari said...

बहुत बहुत धन्‍यवाद सुरेश भाई


“आरंभ” संजीव का हिन्‍दी चिट्ठा

Neeraj Rohilla said...

"लेकिन १४ मई २००४ को राष्ट्रपति कलाम साहब द्वारा कुछ "असुविधाजनक" प्रश्न पूछ लिये जाने के बाद यकायक १७ मई आते-आते उनमे वैराग्य भावना जागृत हो गई और वे खामख्वाह "त्याग" और "बलिदान" (?) की प्रतिमूर्ति बना दी गईं"

कहते हैं कि सच भले ही लुप्त हो जाये लेकिन झूठ और अफ़वाहों की उम्र बडी लम्बी होती है । इस मुद्दे पर राष्ट्रपति भवन आधिकारिक तौर पर अपना पक्ष रख चुका है । राष्ट्रपति भवन और स्वयं कलाम ने कहा है कि सोनियाजी और कलामजी की मुलाकात में कलामजी ने कभी भी सोनिया के विदेशी मूल का मामला नहीं उठाया । न ही भारत के संविधान के अनुसार सोनियाजी को भारत के प्रधानमंत्री बनने में कोई कानूनी अडचन है ।

अगर ऐसा होता तो भाजपा और बाकी विपक्षी कानूनी लडाई लडते न कि कमर के नीचे प्रहार करने में लगे रहते ।

अगर आप अपने हाईलाईट करके लिखे गये तथ्य को साबित कर सकें तो मुझे खुशी होगी, वरना आपके विचार और उन दक्षिणपंथियों की वेबसाईट के हिन्दी अनुवाद में कोई भेद नहीं है ।

साभार,
नीरज रोहिल्ला

Anonymous said...

अरे भाया ये तो सोनिया के पीछु पड गया कुछ अच्छा लिखो

Raj said...

सुरेश भाई नमस्कार, हम भारतियो को अक्ल सब कुछ लुट जाने पर आती हे,ओर जो कोम बार बार लुटे उसे कया कहा जाये,भोली-भाली जनता ??

विष्णु बैरागी said...

इस लेख माला का पहला भाग नहीं पढ पाया हूं । यह दूसरा भाग पढ कर निराशा नहीं, हताशा हुई । इसमें नया और अनोखा कुछ भी तो नहीं है । सब कुछ एचएमवी के आरपीएम 78 रेकार्ड की तरह बासी (कृपया ध्‍यान दें - ठण्‍डा भोजन तो खाया जा सकता है, बासी नहीं । बासी को तो घूरे पर ही फेंकना पडता है ।) है ।
सारी बातें सच हो सकती हैं लेकिन उससे भी बडा सच यह है कि 1999 से 2004 तक जब 'राष्‍ट्र भक्ति के ठेकेदार' दिल्‍ली पर काबिज थे तब उनमें से एक भी माई का लाल इस 'माइनो' से देश को मुक्ति नहीं दिला सका ।
एक बात और समझ नहीं आ रही है । जो 'माइनो' 1971 और 1977 के संकटों में कन्‍दरा में जा छुपी थी वही 'माइनो' पति की म़त्‍यु के बाद इस देश में क्‍यों और किसके भरोसे रूक गई । उसे पारिवारिक और सामाजिक सुरक्षा देने वाला, उसके ससुराल पक्ष का परिन्‍दा भी इस देश में न तब था न अब है । 1971 और 1977 में तो उसे अपनी शक्तिशाली सास और 'खाते-कमाते' पति का भरोसा था ।
एक बात और । यह मान लिया जाना चाहिए कि 'माइनो' भारत को, इटली का उपनिवेश बना कर ही मानेगी और जो कुछ भी वह कर रही है वह सब इसी का हिस्‍सा है । लेकिन भारत के खिलाफ जासूसी करने या सुरक्षा सम्‍बन्‍धी उच्‍च स्‍तरीय गोपनीय सूचनाएं लीक करने का कोई 'नेक काम' उसने कभी किया हो - यह आज तक सामने नहीं आया है, तब भी नहीं, जब कि 'राष्‍ट्र भक्ति के थोक व्‍यापारियों' की सरकार दिल्‍ली में थी । इसके विपरीत, असंख्‍य खालिस भारतीय, ऐसी सूचनाएं देने और भारत के खिलाफ जासूसी करने के अपराध में सप्रमाण पकडे गए और उन्‍हें सजाएं भी हुईं ।
'माइनो' पहले तो देश के प्रधानमन्‍त्री की बहू थी और बाद में तो उसका पति ही प्रधानमन्‍त्री बन गया था । तब तो उसे जासूसी करने की असीमित सुविधा प्राप्‍त थी ।
कुछ लोग सोच कर बोलते/लिखते हैं, कुछ लोग लिख/बोल कर सोचते हैं । तीसरी किसम के लोग वे होते हैं जो न तो लिख्‍ाने/बोलने से पहले सोचते हैं और न ही बाद में ।
उम्‍मीद करें कि तीसरी किश्‍त में आप पहली श्रेणी वाले साबित होंगे ।

अनुनाद सिंह said...

ऐडविना ने जाल में फंसाकर नेहरू से भारत के विभाजन का रास्ता साफ कराया। माइनो क्या-क्या कर रहीं हैं और क्या-क्या करेंगी, यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन भारत को इतिहास से शिक्षा लेनी चाहिये; कल यह न कहना पड़े कि अब पछताये क्या भया, जब चिड़िया चुग गयी खेत।

सोनिया के बारे में किसी प्रकार की जानकारी का सर्वथा अभाव भी बहुत खतरनाक है। पंचतंत्र का यह सूत्र कितना मार्मिक है-

"अज्ञातकुलशीलस्य वासो देयो न कस्यचित्"

(जिसके कुल और चरित्र (शील) अज्ञात हों , उसे अपने घर में रहने की जगह नहीं देनी चाहिये।)

Shrish said...

बहुत अच्छी जानकारी सुरेश भाई, यह श्रृंखला जारी रखें।

Umesh said...

भारत को एक और स्वतंत्रता आन्दोलन की जरुरत है । चाटुकार कांग्रेसियो तथा वामपंथी देश्द्रोहियो ने फिर से भारत के तख्तो ताज पर एक फिरंगी महिला को बिठा दिया है । मन्मोहन तो बस नाम के लिए प्रम है । बडा दुख हुआ जब देखा की शरद पवार की भी मती मारी गई । आज देश मे मोबाइल फोन क्रांती चलाइ जा रही है, देश की यातायात व्यवस्था को हवाइ बनाया जा रहा है - क्योकी इनका बडा आर्थिक लाभ अमेरिका तथा अन्य चर्च प्रभावित राषट्रो को मिलने वाला है । हिन्दु राश्ट्र नेपाल को भारतीय दवाब मे धर्मे निरपेक़्श घोषीत कर दिया गया ताकी वहा बडे पैमाने पर धर्मांतरण हो सके । जागो भारत जागो ।

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सुरेश जी आपने अच्छा अनुवाद किया है |

अब वैरागी साहब की बात सुनिए उनका कहना है की "1999 से 2004 तक जब 'राष्‍ट्र भक्ति के ठेकेदार' दिल्‍ली पर काबिज थे तब उनमें से एक भी माई का लाल इस 'माइनो' से देश को मुक्ति नहीं दिला सका । " | मैं वैरागी साहब से पूछता हूँ की जब हमारे आंख के सामने सबकुछ दिखया जाता है phir भी हम इसे jhuthlaate rehte हैं | baamiyaan मैं buddha की purtee को toda गया sayad ही किसी muslim sangthan ने इसके khilaf कोई awaz uthai हो | ऐसी isthitee मैं yadi vajpayee sarkaar कुछ भी kehtee तो सबसे पहले वैरागी जी, मैं और हम hindu यही bolte की BJP galat कर रही है Sonia जी तो sar से पाँव तक bhartiya हैं, क्यों?

RAJENDRA said...

bhai sureshji kitna hee likho hame sharam aane wali nahin secular jo thahare ek soniaji hee esi neta hain jinhe Manmohan jese chmatkaari pradhanmantri mile hain pranabdaa lalooji khoob hoshiar hai gungaan karaqne main

Rakesh said...

WHAT U HAVE DONE FOR INDIA.......I M AS ASKING ABOUT U......DOOSRE KE BAARE MEIN LIKHNA YA BOLNA BAHUT AASAN HOTA HAI, LEKIN KUCH KAR K DIKHANA BAHUT MUSHKIL HOTA HAI. SONIA JI NE KAB ITALY KI NAGRIKTA CHHODI YA NAHI CHHODI ISSE KYA HOGA......KUCH INDIA K BAARE MEIN LIKHO YA SOCHO. KUCH KARAM KARO ATLEASE FOR INDIA........

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

@Rakesh, What have you done for India? Before asking or giving suggestion to others why can't you start doing the things you suggest?

I think Suresh ji is doing great thing to country by exposing the fake secular. Its duty of every Indian to know about Sonia madam, since she is the most powerful person in country at this moment.

JANARDAN MISHRA said...

सुरेशजी
आप कि जन जागृति बहुत सराहनीय है भगवन आप को सच्चाई लिखने कि एशि शक्ति प्रदान करे.....

पद्म सिंह said...

जनता को अधिकार है कि अपने हर नेता का आदि अंत और चरित्र जाने...
एक बात सोनिया जी के बारे मे छूट गयी है कि वो रूस की जासूसी संस्था के जी बी की सक्रिय एजेंट भी रह चुकी हैं... और यह सब को पता है कि के जी बी जैसी संस्था का एजेंट कितना होशियार या कहें (शातिर) हो सकता है

Manu said...

Suresh Ji,

I latched on to your blog recently. Havent really stopped for last 2 days. Your relentless efforts are laudible.

My 2 cents, whatever they are worth:-

1.I would request you to provide us with more information of positive deeds and actions done by nationalistic organisations.
2.Provide a direction to people visiting this blog. Give information on any person/organisation doing work on that issue so that action oriented persons can get a platform to work on.

I get a sense that people visiting your blog get motivated to work but lack of information/platform with which they can work is not there.

Thanks for enriching our lives and keeping us motivated through your writings.
Godspeed to your goal of national awakening,
Manu

kumarbiswakarma said...

बहुत ही अच्छा लेख है ! चाडक्य ने भी कभी कहा था किसी इंसान की पत्नी अगर विदेसी मूल की हो तो उसे कभी भी देश के उचे पद पर नहीं बिठाना चाहिए ! मगर क्या करे सुरेश जी देश की भोली भाली जनता को कब समझ आएगी पता नहीं ?

RKP said...

Hasan Ali Khan (50000 crore) .....if an ordinary person hide Rs. 5 ...sent to jail. Why the Govt is hiding the fact......saving the culprit.....what message it is giving to the honest tax payer...Suresh Ji many thanks to you God give you strength to keep enlighten us.

Mahender said...

jankari dene k bahut dhanyawad..... maine apne sare dosto ko forward kar diya hai.....

vikas said...

suresh bhai jankari ke liye bahut bahut dhanyawad

vijay upadhyay said...

चर्चा में यह बात आयी है कि 2004 में यूपीए के बहुमत की सूची के साथ सोनिया जी राष्ट्रपति भवन पहुंची थी उन्होने राष्ट्रपति को सूची देकर प्रधानमंत्री के पद की दावेदारी की ,राष्ट्रपति ने उन्हे गौर से सुना फिर कहा -हालांकि संविधान चुप है पर मुझे लगता है कि आपको प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाने के पहले सुप्रीम कोर्ट से राय ले लेना उचित होगा।" राष्‍ट्रपति के इस एक वाक्य ने कांग्रेस अध्यक्ष को त्याग की प्रतिमूर्ति में बदल दिया।

Anonymous said...

I am happy that some of us do really bother about our country.

Yeh rasta nahin asaan par...........
Keep it up.

Anonymous said...

राजीव को मरवा दिया अब सोच रही है कि कैसे बैचना भारत को लेकिन कामयाब नहीं होगी ये सोनिया राजीव के हत्यारो को माफ कर दिया पहले वादा किया कि तुम राजीव को मार दो फिर मे तुमे मे फासी नहीं होने दुगी अब आप लोग ही सोचे कि प्रतिभाजी ने फासी देने का हुक्म दे दिया तो फिर सोनिया ने माफ कैसे कर दिया इसका कारण एक ही है वो कि सोनिया ने ही राजीव को मरवाया और bjpजैसी बहुमत वाली पार्टी है नहीं तो कब का पेपर मे छप जाता कि सोनिया देसदरोहई है सोनिया ने बेचारे मनमोहनसिंह की भी बोलती बद कर दी अगर बोलेगा तो सीडी दिखा देगी जैसे सोनिया ने ही अरुणजी को भी मरवा दिया ये सब बातें रोज पेपर मे छपनी चाहिए लेकिन पेपर वाले भी डरते है कही ऊनकि चलती गाड़ी बंद न हो जाए अगर अब भी जनता को नहीं समझ मे आएगा तो प्रभु ही बचाए इस देश
"जय हिन्द"