Tuesday, August 7, 2007

सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं ? (भाग-१)

जब इंटरनेट और ब्लॉग की दुनिया में आया तो सोनिया गाँधी के बारे में काफ़ी कुछ पढने को मिला । पहले तो मैंने भी इस पर विश्वास नहीं किया और इसे मात्र बकवास सोच कर खारिज कर दिया, लेकिन एक-दो नहीं कई साईटों पर कई लेखकों ने सोनिया के बारे में काफ़ी कुछ लिखा है जो कि अभी तक प्रिंट मीडिया में नहीं आया है (और भारत में इंटरनेट कितने और किस प्रकार के लोग उपयोग करते हैं, यह बताने की आवश्यकता नहीं है) । यह तमाम सामग्री हिन्दी में और विशेषकर "यूनिकोड" में भी पाठकों को सुलभ होनी चाहिये, यही सोचकर मैंने "नेहरू-गाँधी राजवंश" नामक पोस्ट लिखी थी जिस पर मुझे मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली, कुछ ने इसकी तारीफ़ की, कुछ तटस्थ बने रहे और कुछ ने व्यक्तिगत मेल भेजकर गालियाँ भी दीं (मुंडे-मुंडे मतिर्भिन्नाः) । यह तो स्वाभाविक ही था, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि कुछ विद्वानों ने मेरे लिखने को ही चुनौती दे डाली और अंग्रेजी से हिन्दी या मराठी से हिन्दी के अनुवाद को एक गैर-लेखकीय कर्म और "नॉन-क्रियेटिव" करार दिया । बहरहाल, कम से कम मैं तो अनुवाद को रचनात्मक कार्य मानता हूँ, और देश की एक प्रमुख हस्ती के बारे में लिखे हुए का हिन्दी पाठकों के लिये अनुवाद पेश करना एक कर्तव्य मानता हूँ (कम से कम मैं इतना तो ईमानदार हूँ ही, कि जहाँ से अनुवाद करूँ उसका उल्लेख, नाम उपलब्ध हो तो नाम और लिंक उपलब्ध हो तो लिंक देता हूँ) ।
पेश है "आप सोनिया गाँधी को कितना जानते हैं" की पहली कडी़, अंग्रेजी में इसके मूल लेखक हैं एस.गुरुमूर्ति और यह लेख दिनांक १७ अप्रैल २००४ को "द न्यू इंडियन एक्सप्रेस" में - अनमास्किंग सोनिया गाँधी- शीर्षक से प्रकाशित हुआ था ।
"अब भूमिका बाँधने की आवश्यकता नहीं है और समय भी नहीं है, हमें सीधे मुख्य मुद्दे पर आ जाना चाहिये । भारत की खुफ़िया एजेंसी "रॉ", जिसका गठन सन १९६८ में हुआ, ने विभिन्न देशों की गुप्तचर एजेंसियों जैसे अमेरिका की सीआईए, रूस की केजीबी, इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये और एक नेटवर्क खडा़ किया । इन खुफ़िया एजेंसियों के अपने-अपने सूत्र थे और वे आतंकवाद, घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान-प्रदान करने में सक्षम थीं । लेकिन "रॉ" ने इटली की खुफ़िया एजेंसियों से इस प्रकार का कोई सहयोग या गठजोड़ नहीं किया था, क्योंकि "रॉ" के वरिष्ठ जासूसों का मानना था कि इटालियन खुफ़िया एजेंसियाँ भरोसे के काबिल नहीं हैं और उनकी सूचनायें देने की क्षमता पर भी उन्हें संदेह था ।
सक्रिय राजनीति में राजीव गाँधी का प्रवेश हुआ १९८० में संजय की मौत के बाद । "रॉ" की नियमित "ब्रीफ़िंग" में राजीव गाँधी भी भाग लेने लगे थे ("ब्रीफ़िंग" कहते हैं उस संक्षिप्त बैठक को जिसमें रॉ या सीबीआई या पुलिस या कोई और सरकारी संस्था प्रधानमन्त्री या गृहमंत्री को अपनी रिपोर्ट देती है), जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी पद पर नहीं थे, तब वे सिर्फ़ काँग्रेस महासचिव थे । राजीव गाँधी चाहते थे कि अरुण नेहरू और अरुण सिंह भी रॉ की इन बैठकों में शामिल हों । रॉ के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने दबी जुबान में इस बात का विरोध किया था चूँकि राजीव गाँधी किसी अधिकृत पद पर नहीं थे, लेकिन इंदिरा गाँधी ने रॉ से उन्हें इसकी अनुमति देने को कह दिया था, फ़िर भी रॉ ने इंदिरा जी को स्पष्ट कर दिया था कि इन लोगों के नाम इस ब्रीफ़िंग के रिकॉर्ड में नहीं आएंगे । उन बैठकों के दौरान राजीव गाँधी सतत रॉ पर दबाव डालते रहते कि वे इटालियन खुफ़िया एजेंसियों से भी गठजोड़ करें, राजीव गाँधी ऐसा क्यों चाहते थे ? या क्या वे इतने अनुभवी थे कि उन्हें इटालियन एजेंसियों के महत्व का पता भी चल गया था ? ऐसा कुछ नहीं था, इसके पीछे एकमात्र कारण थी सोनिया गाँधी । राजीव गाँधी ने सोनिया से सन १९६८ में विवाह किया था, और हालांकि रॉ मानती थी कि इटली की एजेंसी से गठजोड़ सिवाय पैसे और समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है, राजीव लगातार दबाव बनाये रहे । अन्ततः दस वर्षों से भी अधिक समय के पश्चात रॉ ने इटली की खुफ़िया संस्था से गठजोड़ कर लिया । क्या आप जानते हैं कि रॉ और इटली के जासूसों की पहली आधिकारिक मीटिंग की व्यवस्था किसने की ? जी हाँ, सोनिया गाँधी ने । सीधी सी बात यह है कि वह इटली के जासूसों के निरन्तर सम्पर्क में थीं । एक मासूम गृहिणी, जो राजनैतिक और प्रशासनिक मामलों से अलिप्त हो और उसके इटालियन खुफ़िया एजेन्सियों के गहरे सम्बन्ध हों यह सोचने वाली बात है, वह भी तब जबकि उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी (वह उन्होंने बहुत बाद में ली) । प्रधानमंत्री के घर में रहते हुए, जबकि राजीव खुद सरकार में नहीं थे । हो सकता है कि रॉ इसी कारण से इटली की खुफ़िया एजेंसी से गठजोड़ करने मे कतरा रहा हो, क्योंकि ऐसे किसी भी सहयोग के बाद उन जासूसों की पहुँच सिर्फ़ रॉ तक न रहकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो सकती थी ।
जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दी, इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहा, उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़ कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़ बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन था, वाल्टर विंसी, सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक था कि उसे इसमें कमीशन मिला था, लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थीं, जबकि इंदिरा गाँधी जीवित थीं । दो साल बाद १९८६ में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका मिला, और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ अधिकारी के हाथों जिनेवा (स्विटजरलैण्ड) पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह ये पैसा मिलान (इटली) में चाहता है, विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह "कैश" चेक नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बी.जी.देशमुख ने अपनी हालिया किताब में उल्लेख किया है, हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा लगभग व्यर्थ चला गया । इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा था, एक जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में पड़ सकती है, घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दी,लेकिन वह ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।
राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा करने लगीं, खासकर उस वक्त जब राहुल और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन १९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन (फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन १९८६ में जिनेवा स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैं, खिसियाये हुए रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था । जिनेवा का पुलिस कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र था, लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थी, है ना हास्यास्पद लेकिन चिंताजनक... उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि "तुम्हारे प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है" । बुरी तरह से अपमानित रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ । अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों, भारतीय सुरक्षा और भारतीय दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैं, और यह निश्चित ही भारत की छवि खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँ, एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । (ओट्टावियो क्वात्रोची के बार-बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया ?) उनके निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में रहते थे, रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी, लेकिन जैसी की उनकी आदत (?) थी वे मौन साध कर बैठ गये ।
संक्षेप में तात्पर्य यह कि, जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैं, राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह सकती हैं, सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर अविश्वास दिखा सकती हैं, तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे है, वे क्या-क्या कर सकती हैं, बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि "मैं भारत की बहू हूँ" और "मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगी" आदि वे यदा-कदा बोलती रहती हैं, लेकिन यह असली सोनिया नहीं है । समूचा पश्चिमी जगत, जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही हो, उनके बारे में सब कुछ जानता है, लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं ? (भारत भूमि पर जन्म लेने वाला व्यक्ति चाहे कितने ही वर्ष विदेश में रह ले, स्थाई तौर पर बस जाये लेकिन उसका दिल हमेशा भारत के लिये धड़कता है, और इटली में जन्म लेने वाले व्यक्ति का....)
(यदि आपको यह अनुवाद पसन्द आया हो तो कृपया अपने मित्रों को भी इस पोस्ट की लिंक प्रेषित करें, ताकि जनता को जागरूक बनाने का यह प्रयास जारी रहे)... समय मिलते ही इसकी अगली कडी़ शीघ्र ही पेश की जायेगी.... आमीन
नोट : सिर्फ़ कोष्ठक में लिखे दो-चार वाक्य मेरे हैं, बाकी का लेख अनुवाद मात्र है ।
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64 comments:

अरुण said...

यही तो असली भारत है दोस्त ,पहले भी हम लायक राजाओ के नालायक पुत्रो को झेलते रहे इसी मानसिकता के चलते पहले मुस्लिमो और फ़िर अग्रेजॊ के गुलाम रहे और अब अग्रेजीदा लोगो तथा काग्रेस परिवार की गुलामी करने के लिये अभिशिप्त है..?

संजय बेंगाणी said...

इस प्रकार के अनुवाद जारी रखे.

mamta said...

इस लेख से भी लोगों के सोचने मे कोई फर्क नही आने वाला क्यूंकि जो जनता वोट देती है वो ये सब नही पढ़ती है।

संजय तिवारी said...

गुरूमूर्ति के पास जानकारियां बहुत रहती हैं और उनके लिखने में धार होती है. आपने स्तरीय अनुवाद किया है. भाषा का फ्लो बना हुआ है.
काफी मेहनत कर दी है आपने.

रजनीश मंगला said...

यह जानकारी हिन्दी में उपलब्ध करवाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Udan Tashtari said...

अनुवाद बढ़िया रहा.

Sanjeet Tripathi said...

शुक्रिया इस अनुवाद को हम तक पहुंचाने का!!

परमजीत बाली said...

आप अपना अनुवाद का कार्य जारी रखे ।इसे हिन्दी मे अनुवाद कर आप हम जैसे हिन्दी भाषीयों पर बहुत उप्कार कर रहे हैं। आप का कार्य सराहनीय है।बहुत बढिया जानकारी दी है।धन्यवाद।

DR PRABHAT TANDON said...

अगर गुरुमूर्ति की बातों मे सच्चाई है तो यह भारत की बहुत ही भयानक तस्सवीर को दिखा रही है , लेख को हिन्दी मे उपलब्ध कराने के लिये धन्यवाद !

अनूप शुक्ला said...

इसे पढ़वाने के लिये शुक्रिया!

संजीव कुमार सिन्हा said...

सोनिया की योग्यता क्या है, यब सवाल मुझे भी तंग करता है। इस लेख ने आंखें खोल दी हैं। अब भी चेतो भारतवासियों। वरना सब कुछ लुटने वाला है।

हरिराम said...

कृपया अपने लेखन में पूर्णविराम के पूर्व स्पेश टंकित नहीं करें। इससे पूर्णविराम अक्सर अगली पंक्ति के आरम्भ में सरक जाता है जो गलत होता है। विशेष विवरण हेतु यहाँ देखें।

हम भारतीय । said...

वंश वाद क्या होता है था राज्य करने के लिए यह महान लोग (?) क्या क्या करते है था क्या कर सकते है ईसका पुरा विवरण ही आपने यहा दिया है , बहोत ही उपयोगी तथा विचार करने योग्य लेखन ।
मित्रवर्य आप की अनुमती के बिना ही मै ने यह लेख आप के नाम सहीत अपने मित्रों में बटवा दिया है, कृपया क्षमा करे परंतू लेख पढने के बाद मुझ से रहा नही गया तथा जो सोनिया सोनिया कह रहे थे उन्हे थमा दिया है ।

Sanjeeva Tiwari said...

धन्‍यवाद सुरेश भाई, हम भी अपना कर्तव्‍य निभायेंगे । अगली कडी का इंतजार रहेगा ।

बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

Shrish said...

वाह अच्छा पोल खोल अभियान चलाया आपने। इस प्रकार की उपयोगी जानकारी देना जारी रखें। अगली कड़ी का इंतजार है।

Amit said...

१९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता था, उनके साथ भेजा गया था, ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन (फ़्रांस) में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है, दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना नहीं चाहती थीं, और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती थीं ।

अब बहुत मज़ेदार बात आपने कही है जिस पर किसी का कदाचित्‌ ध्यान नहीं गया है। 1985 में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव नहीं वरन्‌ राजीव गांधी थे। नरसिम्हा राव तो 1991 में राजीव गांधी की मृत्यु के पश्चात प्रधानमंत्री बने थे और 1996 तक रहे थे। तो यानि कि आपकी लिखी यह बात जो मैंने ऊपर कोट की है वह सत्य नहीं हो सकती। यदि सन्‌ की गलती है और आपने 1995 की जगह 1985 लिखा है तो भी मामला गड़बड़ हो जाता है क्योंकि 1995 में राजीव गांधी सपरिवार फ्रांस जा ही नहीं सकते थे, वे तो 5 वर्ष पूर्व one way टिकट कटा निकल चुके थे!! आपने कदाचित्‌ इस लेख का अनुवाद किया है। यहाँ पर यदि आप पढ़ें तो Section 5.14 में पाएँगे कि राजीव गांधी 1985 में फ्रांस अवश्य गए थे और उनको उस दौरान और 1989 में जब फ्रांस जाने की सोच रहे थे उस दौरान भी सिख आतंकवादियों से धमकियाँ मिली थीं। तो यानि कि नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बता कर बात कही जा रही है वह सरासर गलत ही लगती है!! जो व्यक्ति अगले 6 वर्षों तक प्रधानमंत्री नहीं बनने वाला(जिससे पहले 2 प्रधानमंत्री बन लेंगे) वह कैसे एक प्रधानमंत्री के होते स्वयं प्रधानमंत्री बन पहले प्रधानमंत्री की पत्नी को एहसान दे सकता है?

मुझे नेहरू-गांधी परिवार से कोई सहानुभूति नहीं है, जितना मैंने पढ़ा-देखा है, भारत की ऐसी-तैसी इन्हीं के राज्यकाल में हुई है, लेकिन आपसे इतना अवश्य कहूँगा कि इस तरह के लेख छापने से पहले उसकी जाँच कर लें और आँख मूँद किसी चीज़ पर केवल इसलिए न विश्वास करें क्योंकि वह आपके प्रिय विषय की है। बहुत सा वाहियात मसाला इंटरनेट पर पहले से ही पड़ा है, अभी हाल ही में कोई Flickr.com के फोरमों में ताजमहल के खिलाफ़ स्पैम कर रहा था कि उसको वोट न दो वह एक हिन्दु मंदिर पर बनाया गया मक़बरा है!!

amit said...

वैसे जिस वेबसाइट का लेख आपने अनुवादित किया है, वह हिन्दुत्व को प्रमोट करने वाली एक extremist वेबसाइट है, देख लें और अपनी समझ से कार्य करें। :)

Anonymous said...

its total crap

SUNIL DOGRA जालि‍म said...
This comment has been removed by the author.
SUNIL DOGRA जालि‍म said...

लेख आपकी भडास का प्रतीक है निष्पक्षता का नहीं...

prashant said...

Suresh jee aapko bahut-bahut sadhubaad,aapne saty se sakshatkaar karbaya.isi tarah hindutw ka alakh jagate rahe tatha congress roopee nishachar ka naash karne me kalam se apna yogdaan de.
dhanybaad.

दीपक said...

पहली बार आपकी पोस्ट पढी और सब्से धांसु लगी यह पोस्ट!!आभार

नदीम अख़्तर said...

यह लेख अति उत्साह में अनुदित किया प्रतीत होता है। आपने तथ्यों की प्रमाणिकता पर गौर किये बिना ही अनुवाद कर डाला और स‌ोचा कि बहुत बढ़िया मसाला परोस रहा हूं। दरअसल, अमित जी ने जो बातें लिखीं हैं कमेंट बाक्स में, मैं उन्हीं बातों को कमेंट के रूप में लिखनेवाला था, लेकिन देखा कि पहले स‌े ही जिन बातों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है, उसे फिर स‌े बोलने का कोई मतलब नहीं। कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी लेख को स‌िर्फ लेखक का नाम देखकर स‌त्य मान लेना भूल ही नहीं बल्कि अपराध है। अरुण शौरी भी लिखते हैं, लेकिन यकीन मानिये ऎसा आउट ऑफ कन्टेक्स्ट लिखते हैं कि ऎसे लोगों को लेखक कहने वालों को भी जूता मारने का दिल करता है। वाहियात लोगों की जमात कूड़ा ही परोस स‌कती है, इनसे दूर ही रहिये और कुछ रचनात्मक चीजें हैं, उनका अनुवाद कर डालिए। इन स‌ब चीज़ों स‌े क्या मिलनेवाला है?

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

मैं ये खबर पहले अंगरेजी मैं पढ़ चूका था | phir भी हिंदी मैं पढ़ कर अच्छा लगा | मैं समझ सकता हूँ की आपने कितनी मिहनत की होगी इसे लिखने मैं | अनुवाद भी अच्छा है |

और एक बात आप जब ऐसा लेख लिखते है तो नेहरु परिवार को देवता मान ने वाले लोगों की गाली सुनने को भी तैयार रहिये |

mehta said...

sachhai se avgat karwane ke liye dhanywad lekin hindustan to so rha hai use jagane ke liye yahi bat media walo ko bhi apna kartvya iss parkar samjhna hoga

RAJENDRA said...

Bhai suresh ji - logon ke apne apne tareeke hain gariyane ke - aap likhte rahiye- par pramanikta ka dhyaan rakhna jaroori hai - itihas itna puraana bhi nahin hai ki aap kisi pradhanmanttri ke karyakaal ko theek n likh payen -dhanyavad

narendra nandi said...

Jara yaha najar daliye hujur ! http://mafiamadame.wordpress.com/2010/07/02/sonia-gandhi-a-roman-catholic-saint-or-an-isi-trained-sex-worker-2/

Tausif Hindustani said...

अगर पूर्ण साक्ष्यके साथ में प्रस्तुत किया जाता तो विश्वास किया जा सकता था , ऐसे भी नेहरु खानदान कोई दूध का धुला नहीं है ,
जिस नेहरु ने हमारे सबे बड़े नेता शुभाष चन्द्र भोष को जलावतन रहने पर विवश किया , उन्हें आखिर में गुमनामी का जीवन व्यतीत करने पर विवश किया हो , उस से कोई अच्छी उम्मीद करना बेमानी है
dabirnews.blogspot.com
ajabgazab.blogspot.com

Anonymous said...

So India has lost its freedom again. How to regain India's independence? What is the path? Instead of criticizing Antonia a.k.a Soniya, we should capitalize her.

Anonymous said...

sonia gandhi kae bara ma praman sahit padna ho to www.jantaparty.org logon kara subranmaniam swami presedant janto party rajabje aur sonia kae niket raha hee mrs indera gandi kae bhe niket raha hae,sudarshanje nae jo kaha ussae bhe adhik aur praman(avedance sahit )
2 sonia ka sach namak book padeya , please forgive me for spalling mistakes , sabhe ko depavalli ka ram ram ,

prasad said...

agar koi mard ka bachha hae to sonia per financial corraption ka case kara ,net per kafee facts to subraminiam swami na already dal rakha hae aur sonia ka such book padkar proff mil jayaga gabah mil jayagae , janch commision beetha sakta ho , 2 million us dollor to swami na rissa sa he lana bataya hae , kyotroche ,aur searial muders ka bhe dose suramaniam swami sonia ko bata rahae hai , ab konsa praman chaya ,, jo banta surdarsanje na kahee hae bo sare aur jada swami ka article 'sonia gandhi the modern robart clive ' ma saf likh raha hae ' www.jantaparty.org ka sara 5 article praman hae pado aur case karo ,dud ka dud aur pani ka panee ho jayga ,lagaoo court ma janhit yacheka ,,,,apka lakh sachha hae apko sadhubad ....

Anonymous said...

kya tum uss samay itane bade ho gaye the ke tum ye sab jankari ikthi kar sako ya tumne kahi se padh kaR YE SAB LIKHA HAI agar sonia ko kuch galt karna hota to 5 saal hi kafi the par unko 10 saal ho gaye hein India ki rajniti mein pehle tum prove karo k tum sahi ok tumhare bolne se kya hota hai abhi mai bolun k tum tererist ho to tum maan loge kya........?

rajeev said...

@Anonymus जी गांधी दासों (गांधी परिवार के दास) के लिए कितने भी सबुत दो सब बेकार ही है. पिछले दस वर्षों कि ही बात किजिये कांग्रेस और अन्य के उच्च पदों पर सोनिया जी के क्रिस्त्तियन सिपह सलार खूब आगे आए और मौज कर रहे हैं. पर इससे गाँधी दासों को फर्क पड़ता है? भारतीय जनता को तो सोनिया की दस वर्षों की राजनीति की कोई सुन्दर उपलब्धि नहीं दिखती, पर मीडिया और गांधी दासों के हिसाब से गाँधी परिवार के बिना भारत का अस्तित्व ही खतरे में है.

गांधी दासों (गांधी परिवार के दास) के लिए अपने देश से बड़ा गाँधी परिवार है तभी तो आतंकवादी-देशद्रोही कितना भी अपने राष्ट्र-संस्कृति का अपमान करे इनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती ... जैसे ही किसी ने सोनिया, राहुल आदि के बारे में कुछ कहा इन गाँधी दासों के भावनाएं इतनी आहात हो जाती है कि ये गाँधी दास खून-खराबे पे उतर आते हैं.

gandhi je said...

us india or es india me kafe antar hai.
samay ke santh insan ke soch bhe badalte hai.
mughe nahe lagta ke ab soniya ji ke dimag me aise kuch bate ho.
or jo bhe es lekh me hai bo aaj se 25year pahle ka hai ab samay badal gaya hai bhai or india bhe badal gaya hai.

sarvachan said...

vastav me lekh bahut accha tha ise poore hintushtan ko padhna chahiye or italy ki is avaidh santan ke bare me sabako janana chahiye,

bahut bahut dhanyavad

past life therapist said...

achach raha anuvad itni achichi jankari ke liye thanks

JANARDAN MISHRA said...

सुरेशजी
कुछ चमचों के लिए "सोनिया" तमेव माता च पिता तमेव तमेव बंधू च सखा तमेव,,,,,,,,, से भी बढ़ कर भक्ति है और वह इशी में लीन हैं

Anupam Singh said...

Suresh bhai..
jan jaagran ka ye karya jaari rakho aap.
Anuvaad beshak hi ek kalaa hai aur jo ise rachnatmak nahi maante unke ardhgyaan ki hi sirf duhaai de sakte hain hum.

ye link avashya dekhein.. http://talk2anupamsingh.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

arun said...

please hame sacchi & acchi jankariya hamesa dete rahe i m a new joiner

अमीत तोमर said...

aapka ye pryas srahniye he dhaneyvad is jankari ke liye (jra isse bhi dekhen http://www.bharatyogi.net/2011/05/blog-post_06.html )

अमीत तोमर said...

aapka ye pryas srahniye he dhaneyvad is jankari ke liye (jra isse bhi dekhen http://www.bharatyogi.net/2011/05/blog-post_06.html

Bhawana said...

wow sir,really a bitter truth,it is a irony of our country always it sufferring from fraud citizens,i m enlightened from your blog,thanks sir for being a faithful indian.waiting for the next blog.
jai hind,jai bharat,

Dilip said...

आप हमें ऐसी जानकारी पहुंचाते रहे ताकि भारतिय जनता इन हरामखोरो को समझ कर इनको
सुमूल नष्ट करने में आसानी हो!

D.P,Chahar said...

कृपया अति उत्साह में ऐतिहासिक तथ्यों को अनदेखी करते हुए अन्य लेखो का अनुवाद करके अपनी वेब साईट पर नही डाले अन्यथा अमित जैसे लोग सिर्फ आपकी कमियों को पकड़ कर इतना प्रचारित करेंगे कि लोगों का आपकी बातो से विश्वास उसी तरह उठाने लगेगा जैसे वी.जे.पी. पर से दिन पर दिन उठाता जा रहा है| आपके निस्वार्थ परिश्रम के लिए धन्यवाद|

BAPAN said...

MAIN YEH SIRF MANTA NAHI BISWAS KARTA HOON KI SONIA KI LEAD ME YEH DESH ME BAHUT GOTHALA HOGA AUR USSE BHI BARA GHOTALA HONE WALA HE.CONGRESS KA TRADITION HE PAISE LOOTNA AUR SONIA NE USE JARI RAKHA HE.AUR RAHUL BHI ANE WALA HE IS LIST ME.AUR SOCHIYE US AFSAR KA JISE VIDESH ME APMAAN HUA UR YEH BHARAT KA APMAAN HE.

Indra Bajpai said...

जिसने जिसने नेहरू-गाँधी परिवार की सच्चाई बताने का प्रयास करा है , या तो उसकी किताबे पर रोक लगा दी गयी है और या फिर उसकी लेखनी पर ही रोक लगा दी गयी है....अंधों की भीड़ कम नही है यहाँ, आपकी सारी बातें सत्य है, लोगों को अगर १००% सही ना भी लगे तो भी वो लोग ये तो जाँएंगे ही की इसमे से ८०% तो सही है...अगर वो इतना भी समझे तो भी इस अंधी जनता को सोनिया/ कोंग्रस का असली रूप तो समझ ही आएगा...आप अनुवाद जारी रखे

arvind gupta said...

suresh ji
hamari jaankari badhane ke liye dhanyawad.
kya mein 1985 ki jagah kaunsa year aana tha jan sakta hu

rajiv said...

dr subramanityam swamy tell sonia as "vishkanya" .in www.jantaparty.org also available many article with proof about sonia and rahul

prashant said...

mujhe samjha mai nahi aata app log iss tareh ki kahaniya kaha sai bana lete hain

bharatwasi said...

जबतक देश में राजनेता पार्टी को देश के ऊपर मानेगे देश में कभी भी प्रजातंत्र स्थापित नहीं होगा देश की सबसे पुराणी पार्टी के नेताओ को और बाकि पार्टी के नेतोको भी परिवारवाद से ऊपर उठकर सची राजनीती को अपना होगा नहीं तो एसे और भी कई किस्से होंगे जिससे देश की मासूम जनता अनजान होगी और मेहनत की कमाई टेक्स के रूप में देकर इन नेताओ के घरो भरती रहेगी ....

atulshrivastava said...

LEKH PADA ACHHA LAGA.KYA SATYA HAI KYA JHOOTH ES PRARANCH ME MAIN NAHI PADANA CHAHATA.MERA JHUKAO KISI BHI PARTY KIOR NAHI HAI KYOKI PARTIYA VICHAR DHARA KE AADHAR PAR CHALTI HAI AB TO EK HI VICHAR DHARA DIKHATI HAI KURSI O BHI AN KEN PRAKAREN .YAHA CHUNKI SONIYA GANDHI KI KAHANI HAI IS LIYE MAI CONG. KI BAT KAROONGA O BHI JYADA GAHARAI ME NA JATE HUYE.CONG KO EK SIHAWLOKAN KI JAROORAT HAI PARTY AB PURNTAH KACHARA HO CHUKI HAI USME AMUL CHUL PARIWARTAN KI JAROORAT HAI.AUR IS PRAKRIYA ME USE VANSHWAD SE UBARANA PAREGA .AB RAHUL GHANDHI Ka muh dekh rahe hai.kya inke pas netao ka aakal pad gaya hai?thope huye log kab tak chalenge.jameen se jude log kaha gaye?agar is lekh me kuch logo ko sab jhoot dikh raha hai to un logo ko main drishtrashtra hi kahooga.nir chir karane ke liye hans banana padega.anna ji anshan ke samay sansad ko sunana tha sab khisiyani billi khamba noche dikh rahe the.kahi kahi to vicharo ki abhivyakti apane nimn star par thi. kya yahi desh ke karan dhar hai.jab desh ke log hi swayam ko desh se upar samajhenge to anya logo ko kya kahege.aap anuwad ke liye saduwad ke patra hai .vichar manthan ki prakriya sada prawahit hoti rahana chahiye.aaj hi aapake blog se juda hu kamiyo ko door kaengge.

Anonymous said...

bahut achchha likha aapne,desh ka midia bhi in bato ko ujakar kar janta ko batane lag jawe to aaj ki pristithi me desh ke liye sachchi rastrbhakti hogi,kyoki sonia ki asliyat samne nahi aai to we desh ko punh gulam bana degi

Anonymous said...

amit madarchod ke bare me mujhe ye kehna hai ki pehle apne itihas ko jaan le phir bakwas kare. tajmahal hindu mandir tha hai aur rahega...

Bhrugu Bhargav said...

Suresh ji,

Meine ek RAW office ka likha hua post padha tha. Agar aap woh padh le apko lagega ki Soniya ka Rajiv ke saath milap koi "Akasmic" nahin tha par karvaya gaya tha. "It was not pure coincidence but she was definitely planted as part of the bigger conspiracy by pop & Italy".

Please read this eye-opening post -
http://indianintelligence2009.blogspot.com/2009/09/playing-with-nations-choices.html

Anonymous said...

Yes i agree with you....

Ashish Rana said...

writer ji aapse se bus ek question puchna h........ Sonia gandhi ki behan ka naam Anushka kaise ,,,,ye to Indian naam h jabki Sonia Gandhi ki sister to Italian thi

Anonymous said...

अब बहुत मज़ेदार बात आपने कही है जिस पर किसी का कदाचित्‌ ध्यान नहीं गया है। 1985 में प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव नहीं वरन्‌ राजीव गांधी थे। नरसिम्हा राव तो 1991 में राजीव गांधी की मृत्यु के पश्चात प्रधानमंत्री बने थे और 1996 तक रहे थे। तो यानि कि आपकी लिखी यह बात जो मैंने ऊपर कोट की है वह सत्य नहीं हो सकती। यदि सन्‌ की गलती है और आपने 1995 की जगह 1985 लिखा है तो भी मामला गड़बड़ हो जाता है क्योंकि 1995 में राजीव गांधी सपरिवार फ्रांस जा ही नहीं सकते थे, वे तो 5 वर्ष पूर्व one way टिकट कटा निकल चुके थे!! आपने कदाचित्‌ इस लेख का अनुवाद किया है। यहाँ पर यदि आप पढ़ें तो Section 5.14 में पाएँगे कि राजीव गांधी 1985 में फ्रांस अवश्य गए थे और उनको उस दौरान और 1989 में जब फ्रांस जाने की सोच रहे थे उस दौरान भी सिख आतंकवादियों से धमकियाँ मिली थीं। तो यानि कि नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बता कर बात कही जा रही है वह सरासर गलत ही लगती है!! जो व्यक्ति अगले 6 वर्षों तक प्रधानमंत्री नहीं बनने वाला(जिससे पहले 2 प्रधानमंत्री बन लेंगे) वह कैसे एक प्रधानमंत्री के होते स्वयं प्रधानमंत्री बन पहले प्रधानमंत्री की पत्नी को एहसान दे सकता है?


hmmmm is baare me m jo soch raha hu to wo ye h k ye likhne me galti ki wajah se hua h jub rajiv sahparivar bahar gaye the to narsimha rao PM nahi balki karyakari PM bane honge jaisa ki hota aaya h, jyada knowledge nahi h mujhe in sabki lekin mujhe ye 1 possibility lag rahi hai.

EZAZ said...

Soniya Gandhi "Illuminati" hai. ye illuminati pure world ko kha jayenge. inki haqikat koi nahi jaan paya. inke baare me janne ke liye YOUTUBE pe video hai use zarur dekhe. ILLUMINATI pe ek movie hai ushe bhi zaroor dekhe

amanlobana said...

Agar hindutva ko promote kar rahe hai....toh aapko mirch kyu lagi?????
Aap hindu nahi ho kya???????
Aap jaaise hinduo ki vajah se hi sab hindu ikathe nahi hote.
Arey ek kauvve(crow) ko maaro toh hazaaron kauvve ikathe ho jaate hain.....hum toh fir insaan hain.

jitu rajguru said...

SURASH JI AAPKA BAUT BAUT AABAR...KI AAPSAY HAMKO BE SONIYA KI ASLIYT KAY BARY MAY. JANKARI MELE...PAD KAR BAUT....LAHB..UA. JI
JAI SREE RAM

jitu rajguru said...

AAPKA BAUT BAUT ABAHAR SURASHJI KI AAPNY H
HAMKO JANKARI ...DE

B.l. Kaushik said...

Thank amit ji aap ne sahi bat ka sath diya.

Ashish Shukla said...

देश को बर्बाद कर दिया इस परिवार ने....
मेरव ब्लॉग पर भी आये http://pratibimbprakash.blogspot.in/

अजय said...

इस परिवार को देश से ही निकाल देना चाहिऐ