Monday, August 6, 2007

संजू बाबा (?) को छूट या माफ़ी मिलना चाहिये ?

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संजय दत्त को मिली सजा के विरोध में जिस तरह का बेतुका, तर्कहीन और भौंडा प्रदर्शन जारी है, उसे देखते हुए एक कानूनपसन्द व्यक्ति का चिंतित होना स्वाभाविक है । इस मुहिम को जिस तरह मीडिया हवा दे रहा है वह और भी खतरनाक है, क्योंकि मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी नेताओं से कहीं अधिक है, संजू बाबा ये कर रहे हैं, संजू बाबा ने वह किया, अब उन्होंने मुँह धोया, तब उन्होंने क्या खाया...इस सबसे आम जनता का क्या लेना-देना है ? संजय दत्त को सजा देने के विरोधियों के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं -
(१) वे एक संभ्रान्त और राष्ट्रवादी परिवार से हैं ।
(२) उनका अब तक का चाल-चलन अच्छा रहा है ।
(३) वे एक "सेलेब्रिटी" हैं और उन पर इंडस्ट्री का करोडों रुपया लगा हुआ है ।
(४) उन्हें एक गलती की सजा चौदह वर्ष बाद मिल रही है, आदि...आदि...
ये सारे तर्क मात्र भावनाओं में बहकर दिये जा रहे हैं, इनका वास्तविकता और तर्कपूर्ण दिमाग से नाता नहीं है । अब इन तमाम तर्कों के जवाब -
(१) क्या एक संभ्रांत और राष्ट्रवादी परिवार के सदस्य को सिर्फ़ इसी आधार पर माफ़ी दे दी जानी चाहिये ? कल्पना करें कि यदि कल को महात्मा गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी के हाथों कोई अपराध हो जाये तो क्या उन्हें सिर्फ़ इस आधार पर माफ़ किया जा सकता है ?
(२) उनका अब तक का चाल-चलन अच्छा रहा है, इसका अर्थ यह होगा कि सलमान ने एक बार लोगों को कुचलने के बाद आज तक गाडी़ की स्पीड चालीस से ज्यादा नहीं की, इसलिये उन्हें माफ़ कर देना चाहिये ? इसका दूसरा अर्थ यह भी है कि एक बार बलात्कार करने के बाद मैंने हर लड़की को माँ-बहन की नजर से देखा है, इसलिये मुझे माफ़ कर देना चाहिये । जिस वक्त की यह घटना है उस वक्त संजू बाबा (?) मात्र तैंतीस वर्ष के थे, अब यदि तैंतीस वर्ष के पूर्ण वयस्क व्यक्ति को यह नहीं मालूम कि एके ५६ रायफ़ल क्या होती है, उसके निहितार्थ क्या हैं, या अबू सलेम कोई समाजसेवी नहीं है, तो फ़िर उसकी अक्ल पर तरस खाने के अलावा और क्या किया जा सकता है ।
(३) यदि वे एक सेलेब्रिटी हैं तो इससे कानून तो नहीं बदल जाता ? वे सेलेब्रिटी बने हैं यह कांड कर चुकने के बाद, इसलिये यह तर्क तो वैसे ही बेमानी हो जाता है, रही बात उन पर करोडों रुपये लगे और फ़ँसे होने की, तो यह पैसा किनका है, बिल्डर-माफ़िया से साँठगाँठ रखने वाले चन्द धनी-मानी निर्माताओं का जिन्हें लाखों-करोडों में खेलने की आदत है... और करोडों रुपया तो उनका भी फ़ँसा था जो मुम्बई बमकांड में मारे गये या शेयर बाजार से सम्बन्ध ना होते हुए भी जीवन भर के लिये हाथ-पैर गँवा बैठे ।
(४) उनकी गलती की सजा यदि चौदह वर्ष बाद मिल रही है तो इसमें हमारी न्याय प्रणाली और पुलिस की जाँच की खामी है, फ़िर भी उन्हें यह राहत मिल चुकी है कि मात्र डेढ़ साल के बाद जज ने उन्हें जमानत दे दी और तो और वे टाडा के आरोपों से भी मुक्त कर दिये गये, क्या तब उनके समर्थकों को न्यायालय का यह मानवीय चेहरा दिखाई नहीं दिया ? इस जमानत की अवधि में उन्होंने करोडों रुपये कमाये, विदेश यात्रायें की, तमाम लव-अफ़ेयर किये तो फ़िर अब जबकि फ़ैसला आ गया है तो फ़िर यह हायतौबा क्यों ?
दरअसल यह एक मनोवृत्ति है, बल्कि मनोविकार कहना उचित होगा, कि चूँकि मैं सेलेब्रिटी (?) हूँ, मैं एक बडे़ और प्रसिद्ध बाप की औलाद हूँ, मेरे पास अकूत दौलत है, मेरा समाज और नेताओं में रसूख है, इसलिये मैं कुछ भी करूँ मुझे छूट मिलना चाहिये, इस मनोवृत्ति को कुचलने का वक्त आ गया है । यदि संजय दत्त को किसी भी प्रकार की छूट या माफ़ी मिलती है तो गलत संदेश जायेगा । समाज में एक विशेष स्थान रखने वाले व्यक्ति की आदर्श पेश करने की जिम्मेदारी तो और ज्यादा होती है, इससे पीछे हटना कैसा ? जब संजय दत्त से कई गुना अमीर और प्रसिद्ध पेरिस हिल्टन को सजा दी जा सकती है तो फ़िर संजय दत्त अपवाद क्यों होना चाहिये ?

7 comments:

संजय बेंगाणी said...

बिना भेदभाव सजा मिले.

Isht Deo Sankrityaayan said...

मित्र! इस तरह के प्रदर्शन होते नहीं, करवाए जाते हैं. ऎसी बेहूदी बैटन पर चर्चा के लिए नेता ही काफी हैं, हम-आप इन पर अपना समय क्यों बरबाद करें?

जोगलिखी संजय पटेल की said...

इयत्ता ठीक कह रहे हैं सुरेश भाई.और ये मीडिया ? लगता है इसके पास छापने के लिये कुछ रह ही नहीं गया है....भारत की स्वाधीनता की ६० वीं वर्षगाँठ अनक़रीब है...लेकिन क्या किसी अख़बार के प्रथम पृष्ठ पर कोई रचनात्मक सामग्री नज़र आई आपको आज ६ अगस्त तक.सुरेशभाई सेलिब्रिटीज़ को बनाता कौन है ? हमारे आप जैसे आम लोग...ज़रा इगनोर तो कीजिये पाँच दस साल इनको ..ये देश सुधर जाएगा.अख़बारों के रंगीन पन्नों में देह को उघाड़ती हमारे भोंडी तारिकाओं में हमें कौन रानी लक्ष्मीबाई जैसी नज़र आती है या इन संजूबाबाओं सल्लूओं में कौन से राजगुरू या आज़ाद जैसा चरित्र नज़र आता है हमें जो हम इन्हे इतना तोकते हैं ..ये कहते हैं न ...हम आम आदमी की ज़िन्दगी से जुडे़ लोग हैं ..तो भुगतो आम आदमी जैसी ही सज़ा.सीने में दर्द भी इनकी अदाकारी का हिस्सा ही लगता है मुझे.

कटारे said...

बिल्कुल सही कहा आपने मीडिया तो इस समय बहुत ही गैरजिम्मेदाराना काम कर रहा है। जिन बातों की चर्चा ही नहीं होना चाहिये उन्हीं की रस लेकर दिन भर चर्चा करता है जो कि बहुत खतरनाक है। संजय दत्त को सजा होने से न्याय प्रणाली में विश्वास जगा है। नहीं तो लोगों में धारणा बन रही है कि प्रभावशाली लोगों के लिये कोई कानून नहीं है। अब समय आ गया है कि कुछ और ज्यादा प्रभावशाली लोगों को फटाफट सजा देकर जेल की हवा खिलाई जाये .अन्यथा अपराध थमने का नाम नहीं लेंगे। मीडिया से प्रार्थना है कि वह ऐंसे लोगों के प्रति सामान्य व्यवहार रखे जैसा साधारण अपराधी के प्रति होता है।

Udan Tashtari said...

हम इस मसले पर चुप्पी धरे हैं. कुछ नहीं बोलेंगे. आप लिखे हैं इसलिये हाजिरी देने आये हैं बस. :)

परमजीत बाली said...

हमारे देश में ज्यादातर बड़े लोग अक्सर बच ही जाते हैं ऐसे मे ,बहुत मूश्किल से कुछ ही फैसले सही हुए हैं ।्हमें तो कानून का व न्याय का ही समर्थन करना चाहिए।

जोगलिखी संजय पटेल की said...

हिन्दी ब्लाँग्स पर अब तक का सबसे सुरीला कमेंट है उडन तश्तरी का यह

.हम इस मसले पर चुप्पी धरे हैं. कुछ नहीं बोलेंगे. आप लिखे हैं इसलिये हाजिरी देने आये हैं बस. :)