Thursday, July 5, 2007

लादेन के नाम एक खत

ओसामा बिन लादेन जी
नमस्कार, हाल में आपने फ़रमाया कि अमेरिका, ब्रिटेन और इसराईल के साथ-साथ भारत भी हमारा दुश्मन है, ये बात कुछ समझ नहीं आई... सबसे ज्यादा आपत्ति इसी बात को लेकर है और आपको पत्र लिखने का खयाल भी इसी बात को लेकर आया कि आपने अमेरिका, ब्रिटेन और भारत को एक समान मान लिया । मैंने सुना है कि आप बहुत अमीर आदमी हैं, करोडों-अरबों की दौलत आपके पास है, आपके पास हवाई जहाज, तेल के कुँए, महंगे हथियार और डॉलर हैं, मैने तो इनमें से एक भी चीज आज तक नहीं देखी । सुना है कि आप अमेरिका से लड़ रहे हो, हो सकता है आप सही भी हों । आपके बारे में तो ज्यादा पता नहीं है, लेकिन अमेरिका के बारे में जरूर बहुत पता है कि वह एक व्यवसायी देश है जो गरीबों का खून चूस-चूस कर अमीर बना हुआ है । बचपन में दादाजी कहा करते थे कि जब अचानक कहीं कोई टीला या ढेर उठा हुआ देखो तो समझ जाओ कि कहीं ना कहीं गढ्ढा हो गया होगा । बचपन में तो समझ नहीं पाते थे, लेकिन अब समझ में आने लगी हैं । अमेरिका के वैभव और चकाचौंध के टीले और भारत-पाकिस्तान में दरिद्रता के गढ्ढे अब मुझे साफ़ दिखाई देने लगे हैं । हमें और ईरान-इराक को आपस में लड़वाकर, हमें ही हथियार बेचकर कमाया, फ़िर इराक पर दादागिरी करके तेल पर कब्जा करना, विश्व बैंक को आगे करके गरीब देशों की गरदन पर सवार होना, खुली अर्थव्यवस्था के नाम पर उसकी कम्पनियों द्वारा खुल्लमखुल्ला नोट चरना, अनेक बातें हम देख चुके हैं, देख रहे हैं, तो उसकी मंशा तो पहले से ही साफ़ है, लूटना और मतलब निकल जाने के बाद लात मार देना । हम ही बेवकूफ़ हैं जो उसकी चरण-वन्दना में लगे हुए हैं । और भारत ने आपका क्या बिगाडा़ है पता नहीं ? आपको तो ये भी पता नहीं होगा कि भारत में जितने मुसलमान रहते हैं, उतनी तो कई मुस्लिम देशों की कुल जनसंख्या भी नहीं है । शिरडी वाले सांई बाबा और अजमेर के ख्वाजा का तो आपने नाम भी नहीं सुना होगा, रहीम, कबीर और खानखाना से आपका कोई वास्ता कभी नहीं पडा़ होगा, तो भला आप भारत को कैसे जानेंगे ? भारत का एक और पहलू अमेरिका और ब्रिटेन से अलग है... यहाँ की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा निरक्षर है, तीस फ़ीसदी से ज्यादा लोग रात को आधे पेट सोते हैं, और हम जैसे निम्न-मध्यमवर्गीय लोग जब बारह-चौदह घंटे काम करते हैं तब कहीं जाकर इज्जत की रोटी मिलती है । आपने हिम्मत कैसे की अमेरिका के साथ भारत की तुलना करने की बन्दापरवर...भारत पर आतंकवादी हमला करके आपको कुछ नहीं मिलने वाला... ना ! कोई फ़ायदा नहीं होने वाला.. हमारे यहाँ की जनता बहुत सहनशील है, बहुत ! मतलब बहुत ज्यादा सहनशील है... इतनी.. कि पिछले पचपन -साठ साल से एक जैसे निकम्मे नेताओं को झेलती जा रही है, कष्ट उठाये जाती है, पर विद्रोह नहीं करती । हमारे यहाँ खामख्वाह लोग मारे जाते हैं, अकाल से, बाढ से, ठंड से, गरीबी से, भूख से, मलेरिया से, भूकम्प से, फ़ुटपाथ पर कुचलकर... गोया कि हजारों तरह से मौत रोज दस्तक देती है । जम्मू-कश्मीर में हजारों जवान मारे जा चुके हैं, श्रीलंका में जबरन ही सैकडों शहीद हो गये थे, देश धर्मशाला बना हुआ है, पाकिस्तानियों आओ, तिब्बतियों यहाँ बसो, बांग्लादेशियों डाके डालो, नेपालियों अपना घर समझो, जिसकी जब मर्जी हो आओ-जाओ... इस सबका यहाँ की जनता पर कोई असर नहीं होता और नेताओं के कानों पर ढक्कन लगा होता है । तो भाई भारत को दुश्मन समझने की गलती मत करो... हमारा जीवन भी उतना ही कठिन है, जितना पाक, या बांग्लादेश में रहने वाले का.. और एक बात ध्यान रखना गरीब आदमी मरने से नहीं डरता, क्योंकि वो तो रोज ही मरता है । डरता है अमीर, उसे डर होता है कि जो उल्टे-सीधे धंधे करके कमाया है, कहीं हाथ से निकल ना जाये, मर गये तो इतने पैसे का क्या होगा । अमेरिका भी इसीलिये डरा हुआ है और इतना डरा हुआ है कि अफ़गानिस्तान में रस्सी को साँप समझ कर मिसाइल चला देता है । हमें कोई डर नहीं है, क्योंकि हमें मालूम है कि हमारा कुछ नहीं बिगडेगा, दो-चार हजार आदमी मारे जायेंगे, एकाध नेता मारा जायेगा, थोडा़ बहुत हो-हल्ला मचेगा, राजनीति होगी, एकाध सरकार उलटेगी, एक डाकू जायेगा दूसरा आ जायेगा, फ़िर वही कुछ होगा जो आज भी हो रहा है । भ्रष्टाचार, साँठगाँठ, अनैतिकता, गंदी राजनीति इन सबने मिलकर हमारा जीवन तो पहले से नर्क बना रखा है तुम हमें क्या मारोगे ? हमारी दुश्मन है अशिक्षा, बेरोजगारी, जनसंख्या और गरीबी.. इनके सामने आप तो कहीं नहीं लगते भाई । हाँ.. यह जरूर होगा कि आपको मारने के लिये अमेरिका ने हजारों मिसाइलें और बम गिराये हैं, उनकी कीमत वह हमसे वसूलेगा, वो नये-नये तरीके लायेगा हमें चूसने के लिये, क्या फ़र्क पडेगा, जिन्दगी जो पहले से ही कठिन है और कठिन हो जायेगी । सुना है कि एक मिसाइल की कीमत बीस लाख डॉलर होती है, रुपये में कितना होगा यह तो पता नहीं, लेकिन ये पता है कि इतने पैसों में कई अस्पताल बन सकते हैं, सैकडों स्कूल खोले जा सकते हैं, हजारों भूखों को भोजन करवाया जा सकता है..। इस लडाई से न तो आपको कोई नुकसान होगा, ना अमेरिका का । असली नुकसान होगा हम जैसे और हमसे भी अधिक गरीबों का होगा, चाहे वह झाबुआ-कालाहांडी का आदिवासी हो जो दिन भर गढ्ढे खोदकर शाम को पचास रुपये पाता है, या फ़िर कराची की गंदी गलियों में घूमने वाला महमूद हो जो कडी मेहनत के बावजूद परिवार नहीं पाल पाता, या फ़िर ढाका के किसी सीलनभरे कमरे में कालीन सीकर उँगलियाँ तुडवाने वाला इम्तियाज हो...। रही बात कि मैं कौन हूँ या मेरा क्या परिचय है, यह कतई महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि मैं एक आम मध्यमवर्गीय हूँ, जो रोजमर्रा के रोजीरोटी के संघर्ष में इतना घिस-पिट चुका हूँ कि मेरी पहचान खो चुकी है और ये मध्यमवर्गीय आदमी भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश या श्रीलंका कहीं का भी हो सकता है । मुख्य बात ये नहीं है उसकी राष्ट्रीयता क्या है बल्कि यह है कि उसके सरोकार क्या हैं ? उसकी जिन्दगी का संघर्ष क्या है ? उसके जीवन का लक्ष्य क्या है ? मोटे तौर पर देखा जाये तो सबके समान हैं, चाहे वह कोई भी देश हो । आपने लुटेरे जमींदार की लड़की को छेड़ दिया है, अब वह पूरे गाँव को सजा देगा । माहौल ये है कि दो साँडों की लडा़ई में रोटी खरीदने आये मजदूर की टाँग टूटने का खतरा है, और ये आदमी पहले भी जापान में, वियतनाम में, इराक और अफ़गानिस्तान में बहुत चोट खा चुका है.. थोडे़ लिखे को बहुत समझना और आगे से कभी भी इजराईल, अमेरिका के साथ हमें मत रखना... कहाँ वो और कहाँ हम ?

9 comments:

ओसामा बिन लादेन said...
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ओसामा बिन लादेन said...

देको अम आपका चिटी पडा,हम आपके वास्ते इन्दिया को नई दमकाया फ़िर बी आपका बात अमको बौत अच्चा लगा तुम अमको अपना पता बी लिको,अम तुमको चोटा मिसाईल बेजेगा,पिर ना तुमको तकलीफ़ होगा ना तुम अमको तकलीफ़ देगा
अल्ला सब टीक करेगा,शब्बा कैर
तुमारा
दोस्त
ओसामा बिन लादेन

Bush said...

ओह् माय डियर हिन्दुस्तानि
तुम ये क्या लिकता हे हम कुन चुस्ता हे हम गरिब लोगो क कुन चुस्ता हे गलत बात किया
और तुम बात करता हे तुम गरिब हे आदे पेत कना कता हे तुम हिन्दुस्तानि कि तो पुरानि आदत हे भिक मान्ने कि
तुम तो केता हे इन्दिआ इज ग्रेट अबि तुम ओसामा के सामने रोता हे हमसे बडा खून चूस्ने वाला तो तुमारा नेता लोग हे और वो नेता लोग तुमहारा हि आदमि हे हम तो नए बेजा न इडर अम्रिका से तुम हम् को बद्ननाम करता हे
जाओ जाओ पेला अपने नेता लोगो को सुधरो मतलब खुद सुधरो फिर बात करने का अबि हमारे पास टाइम नय हे
ओसामा से हमारा मीटिन्ग हे

rooh-e-mohammad gul said...

मजहब यही सिखाता, काफिर का कत्ल करना
मजहब यही ्है मेरा, मझहब के खातिर मरना

Sanjeet Tripathi said...

सही है!!

Shrish said...

बहुत अच्छा लिखा, काश लादेन ये चिट्ठी पढ़ पाता।

जोगलिखी संजय पटेल की said...

लादेन दादा के नाम चिठ्ठी बाँची ...मेरी तरफ़ से आपके ख़त में ये टीप भी जोड़ देना.

-ले जाओ लादेन दादा लादकर हमारे यहाँ कीभुखमरी
-ले जाओ उन ग़ुंडों को जो हमारी बहन-बेटियों की
आबरू से दिन रात खेलते हैं.
-पुस्तकें ख़रीदने के नाम पर झूठे टेंडर पास करने वाले नौकरशाहों को ले जाओ.
-ले जाओ उन पत्थर दिल नेताओं को जो बाढ़ में डूबे इलाक़ों का हवाई सर्वेक्षण भर कर लेते है.
-ले जाओ उन राजनेताओं को जो शहीदों के शरीर को सहेजने वाली काँफ़िन की ख़्ररीद में भी कमीशन खाते वक्त शर्मसार नहीं होते.
-ले जाओ उन आफ़िसरों को जो स्कूल में बच्चों को खिलाए जाने वाले भोजन के बिल में भी पैसे खा लेते हैं.
-ले जाओ उस नौजवान पीढी़ को जो अपने मध्यमवर्गीय बीमार बाप पर रहम नहीं खाती और उसके पैसे पर स्मैक,शराब,सट्टा,जुआँ खेलती है और मासूम लड़कियों को फ़ाँसने में फ़ख्र महसूस करती है.
-ले जाओ उन लोगों को जो धर्म और मज़हब के नाम पर आम और भोली भाली जनता को ठगती है.
-ले जाओ हमारी सांसों में से प्रमाद , आलस्य और निठ्ल्लेपन के उस भूत को जो बैठे-बैठे रोटी तोड़ रहा है जिसे ज़माने की चुनौतियों का भय नहीं और जो भारतमाता की आन बान और शान के लिये क़ुर्बान हो चुकी रानी झाँसी,तात्या टोपे,बहादुर शाह ज़फ़र,अज़ीमुल्ला खा़न ,चंद्रशेखर आज़ाद , भगत सिंह और सुभाष बाबू के अवदान को भुला चुकी है..

रही भारत - पाकिस्तान की बात तो आओ लादेन दादा आओ ..हिन्दुस्तान और पाकिस्तान में तमाम फ़र्क़ के बावजूद समानता ये है कि पचास साल से दोनों देशों के अवाम को राजनीति के नाम पर ठगा जा रहा है..वादों के आँक्सीजन पर जीने के आदी हो गये हैं हम..भुखमरी,ज़िल्लत,वादा-ख़िलाफ़ी,शोषण,हत्या,बलात्कार और हत्याओं की ख़बर सुन कर हमारा खू़न नहीं ख़ौलता और सबसे बडी़ समानता हम दोनों मुल्कों में ये है कि हम दोनों ग़रीब हैं ये ग्लोबलाइज़ेशन गुड़-गोबर है ,,,हमारा असली क्वालिफ़िकेशन है ग़रीबी ...आइए..आइये इन दो ग़रीब मुल्कों में आपका इस्तेक़बाल है.

Anonymous said...

3 major curses on earth ISLAM, AIDS and CANCER need to be eradicated asap. All other religions including Hinduism, Christianity and Judaism must work togather for this social cause.

Sudeep Sakalle said...

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी ।
सिदयों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा


लादेन , या कोई और
बहुत सारे लोगो को ये मु्गालते रहे है और रहन्गे ,


सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः |
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् || ||
May everybody be happy, may everybody be free from disease,
may everybody see goodness, may none fall on evil days.RS.


Sudeep Sakalle (06/July/2007)London

http://www.kanhaiya.com/infovinity