Tuesday, June 19, 2007

उज्जैन भी महानगर बन गया !

मध्यप्रदेश का हमारा धार्मिक शहर उज्जैन भी अब महानगरों की होड़ में आ गया है... ना, ना, यह न समझिये कि यहाँ कोई बडी़ इंडस्ट्री लगने वाली है या कोई मॉल खुलने वाला है, दरअसल उज्जैन में भी पहली बार अश्लील MMS पकडाया है, जो खालिस उज्जैन के लडकों द्वारा अपने मित्रों के लिये बनाया गया है और एडिटिंग, डबिंग से लेकर "काम" करने वाले और वालियाँ एकदम निखालिस उज्जैन के, और यहाँ हमें पता ही नहीं था कि उज्जैन के युवकों में इतनी प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है । लडकी भी एक सम्भ्रान्त परिवार की है और लडके (चार हैं) भी एक से बढकर एक "कुलदीपक" । अब लडकी कह रही है कि मेरा चेहरा लगाकर यह सीडी और MMS बनाई गई है (क्या बात है ! सभी लोग ऐसा ही कहते हैं), और लडके कहते हैं कि "मुझे तो मेरे दोस्त ने भेजा था मैं कुछ नहीं जानता", क्या नौनिहाल हैं, ना बाप को पता है कि उनके लडके कैमरे वाले मोबाईल से क्या गुल खिला रहे हैं और ना माँओं को पता है कि उनकी लडकियाँ कहाँ-कहाँ जाती हैं, क्या सीन है... इसीलिये मैं उज्जैन के महानगर बनते जाने पर धीरे-धीरे ही सही गौरव (?) महसूस करने लगा हूँ, वरना आज तक तो इस हीनभावना से ही ग्रस्त रहता था कि हमारा छोटा सा शहर इन्दौर के कारण विकसित नहीं हो पा रहा है । इन्दौर को सारी सुविधायें मिलती हैं उज्जैन को बारह साल में एक बार (जब कुम्भ मेला लगता है तब), लेकिन मुझे अब जरा भी मलाल नहीं हो रहा है, उज्जैन में भी अश्लील MMS बनने लगे हैं, डकैतियाँ पडने लगीं है, महान धर्मनिरपेक्ष सोहराब भाई तो उज्जैन जिले के ही हैं, गरज यह कि हम भी छाती फ़ुला कर कह सकते हैं कि "ऐ..हम भी बडे शहर में रहते हैं, गाँव वाला मत समझ लेना हाँ.."

7 comments:

Shrish said...

बधाई आपको महानगर वासी होने पर। आपके शहर के युवाओं की प्रतिभा के बारे में जानकर अब हम उसके भविष्य के प्रति आश्वस्त हैं। :(

अतुल शर्मा said...

बधाई :(

Sanjeet Tripathi said...

हां भाई उज्जैन के महानगर बनने की सूचना खबरिया चैनल से मिली, इस दुख की घड़ी मेरा मतलब है कि आपके महानगर वासी बनने का हमें अफ़सोस है!!

अरुण said...

भाइ बधाई हो अब आप प्रगतिशील और आधुनिक समाजिक जीवन मे प्रवेश कर रहे है,उम्मीद है जल्द ही आप का शहर अत्याधुनिक सामाजिक परिवेश को प्राप्त कर सारे सामाजिक बंधनो से मुक्त हो पूर्ण विकसित समाज का हिस्सा बने जाये

जोगलिखी संजय पटेल की said...
This comment has been removed by the author.
जोगलिखी संजय पटेल की said...

जोगलिखी संजय पटेल की said...
सुरेश भाई;
महानगरीकरण के नतीजे तो हमें भुगतना ही पड़ेंगे. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर,पं.सूर्यनारायण
व्यास,डाँ.वाकणकर,डाँ.शिवमंगलसिंह सुमन,भावसार बा,चिंतामणि उपाध्याय,पवनकुमार मिश्र,डाँ.प्रभातकुमार मिश्र,हरीश निगम,सिध्देश्वर सेन के एम.एम.एस भेजते थोडे़ ही नज़र आएगा हमारे ये तथाकथित हीरो.और तो और अब एक ऐसी पीढी़ बडी़ हो गई है इन पन्द्रह - बीस बरसों में जो इन महान नामों से नावाक़िफ़ नज़र आएगी .बडी़ बडी़ डिग्रियों और हाई प्राइस पैकेजेज़ की दौड़ में हम कहाँ से कहाँ आ हैं...और कहाँ जाएंगे पता नहीं...दर-असल हमारे इन शहज़ादों के हाथ में हमने मोबाइल और इंटरनेट रूपी जो खिलौने दे दिये हैं न वे हमारे लिये विष साबित हो रहे हैं .ग्लोबलीकरण की बात करने वालों से पूछा जाना चाहिये क्या यही सब देखने के लिये हमने इस नये ज़माने की जमावट की थी.हिन्दी ब्लाँग्स पर नियमित रूप से इस विषय पर लिखा जाना चाहिये ..घर घर की कहानी है भाई..रोकना होगा हमें इन हालातों को.

Udan Tashtari said...

बधाई स्विकारें महानगर वासी!! आप तो अब बड़े लोगों की जमात में आ गये. :)