Wednesday, June 13, 2007

ताजमहल पर जारी मूर्खता

ताजमहल को लेकर हमारे देश में एक मुहिम चलाई जा रही है, एसएमएस भेजो, ईमेल करो, रैली निकालो, तस्वीरें छपवाओ, अपीलें जारी करो, और भी ना जाने क्या-क्या । जिससे कि ताज को सात आश्चर्यों में शामिल करवाया जा सके । अव्वल तो यह शायद ही हो, और मान लो चलो ताज सात आश्चर्यों में आ भी गया, तो उससे क्या होगा ? समर्थक कहते हैं - इससे पर्यटन बढेगा, ताज के संरक्षण के लिये विदेशी मदद मिलेगी, देश का गौरव बढेगा... आदि-आदि...
एक बात समझ में नहीं आती कि यदि ताज "सेवन वंडर्स" में नहीं आ पाया तो पर्यटन कैसे घटेगा, जबकि सरकारी संस्थायें गला फ़ाड़-फ़ाड़कर हमें बता रही हैं कि भारत में पर्यटन पच्चीस प्रतिशत की दर से बढ रहा है, फ़िर ताजमहल उसमें कितना बदलाव ला पायेगा ? क्या विदेशी पर्यटन पचास प्रतिशत तक पहुँच जायेगा ? या विदेशी लोग ताज देखने आना बन्द कर देंगे ? अरे, जब खजुराहो जैसी घटियातम सुविधाओं के बावजूद वे वहाँ जाते हैं तो ताजमहल तो वे देखेंगे ही चाहे वह "अजूबों" में शामिल हो या ना हो । दूसरी बात, ताज के संरक्षण के लिये विदेशी मदद की । जो लाखों मूर्ख रोजाना करोडों एसएमएस भेज रहे हैं, यदि उनसे सिर्फ़ एक रुपया प्रति व्यक्ति लिया जाये (SMS के तीन रुपये लगते हैं) तो भी करोडों रुपया एकत्रित होता है जो ताज के संरक्षण के लिये काम में लिया जा सकता है, और विदेशी मदद मिल भी गई तो क्या कर लेंगे ? विदेशी मदद तो झुग्गी-झोंपडी हटाने के लिये हर साल लाखों डालर मिलती है, झाबुआ के आदिवासियों की दशा सुधारने के लिये भी कई बार विदेशी मदद मिली, उसका क्या होता है पता नहीं है क्या ? हम तो इतने बेशर्म हैं कि अपनी आस्था की केन्द्र गंगा को साफ़ करने / रखने के लिये भी विदेशी मदद ले लेते हैं, और उसी में अपना कूडा़ डालते रहते हैं । एक तरफ़ ताज को स्थान दिलाने के नाम पर कई कम्पनियाँ और ग्रुप नोट छाप रहे हैं, दूसरी तरफ़ राष्ट्रपति चुनाव के लिये सौदेबाजी के तहत माया के खिलाफ़ ताज कॉरीडोर मामले में मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी गई, ये है हमारे देश का चरित्र....। और फ़िर ताजमहल को उक्त स्थान दिलाकर उसके साथ क्या करने वाले हो... वहाँ जाकर प्लास्टिक की बोतलें फ़ेंकेगे, जगह-जगह मूतेंगे, दीवारों पर खोद-खोद कर दिल का आकार और "आई लव यू" लिखेंगे, चारों ओर झुग्गियाँ बनाकर जमीनों पर कब्जा करेंगे, यमुना को नाला तो पहले ही बना दिया है, अब कीचड़ भरा डबका बनाओगे... क्या-क्या करोगे ? खोखला देशप्रेम अपने पास ही रहने दो भाईयों, नौजवानों की "अंगूठा-टेक" पीढी़ (एसएमएस के लिये अंगूठा ही लगता है ना !) पैसे का मोल क्या जाने, कईयों को तो आसानी से मिला है, कईयों के बाप अपना-अपना पेट काटकर नौनिहालों के हाथ में मोबाईल सजाये हुए हैं... कल ये लोग कहेंगे कि सूरज पूरब से निकलता है या नहीं SMS भेजो, तुम्हारा बाप तुम्हारा ही है या नहीं, कम से कम सौ SMS भेजो...

9 comments:

maithily said...

"नौजवानों की "अंगूठा-टेक" पीढी़ (एसएमएस के लिये अंगूठा ही लगता है ना !) "

बहुत तीखा लिखा है. :)

अतुल शर्मा said...

सुरेशजी, ताज के लिए तो लोग पागल हुए जा रहे हैं, जरा सोचिए क्या ये लोग रामसेतु बचाने के लिए भी ऐसे ही पागल होंगे या हमें पागल समझेंगे?

रंजन said...

बहुत सटीक है, मजा आ गया... बहुत दिनों से सोच रहा था इस मुर्खता के बारे में.... आपने अच्छा लिखा है.. धन्यवाद..

joglikhisanjaypatelki said...

पूरा एक नेक्सस है सुरेश भाई...आज ताज... कल गंगा..परसों हिमालय...आगे इन सब के लिये भी समस मंगवाए जा सकते हैं कि ये सब भारत में हैं साबित कीजिये.एक संभावित सूचि दे रहा हूं....सोमनाथ...महाकाल,नर्मदा,साबरमती आश्रम,वैष्णो देवी,काशी विश्वनाथ,लाल क़िला,शिरडी,क़ुतुब मीनार.हद है यार लोगों को बरग़लाने की..और ये लोग भी कैसे..अस्पताल में अपने बूढे़ दादा की तबियत देखने नहीं जाएंगे,मोहल्ले हुई किसी ग़मी की मातमपुर्सी के लिये वक़्त नहीं निकाल पाएंगे,घर का गेहूं पिसवाने की फ़ुर्सत नहीं निकालेंगे,आंगन नहीं बुहारेंगे,गमलों में पानी नहीं डालेंगे,बाप की दवाई लाकर नहीं देंगे,चचा की पासबुक अपडेट करने बैंक नहीं जा सकेंगे,स.म.स करवा लो मुर्खताओं के लिये ...खूब टाइम है इनके पास ...कौन हैं ये...अपने ही परिवारों के नौनिहाल..वाह हमारे सपूतों...26 जनवरी और 15 अगस्त पर घर पर ही टी.वी पर आ रहे राष्ट्रीय पर्वों के सीधे प्रसारणों के दौरान लहलहाते हुए तिरंगे के लिये या शहीद दिवस पर सीमा पर शहादत दे चुके रणबांकुरों के लिये श्रद्धा प्रकटीकरण के लिये चन्द सैकण्ड नहीं निकाल सकते...क्या ये भारतीय कहलाने के हक़दार हैं.

Shrish said...

बाकी सब तो ठीक है लेकिन ताज के लिए वोटिंग करने वारे सबसे पहले मुझे आपसे ही मेल मिली थी। :)

mahashakti said...

:)

Akhil Gokhale said...

This is interesting. Even I am thinking in same way. Its a total waste of money and time. Nothing can be achieved. It is just a method to earn more money (for cell companies).

-Akhil

काकेश said...

सही है..लोग तो बरगलायेंगे ही .. समझ तो अपनी होनी ही चाहिये कि हम इन बातों में ना पड़ें ...

Sudeep Sakalle said...

सर्व प्रथम तो सुरेश चिपलूनकर जी को यह लेख लिखने के लिये मै कोटिशह्: धन्यवाद देता हुं

वैसे समझ बिलकुल आपनी ही होना चाहिये , पर आंख बंद कर के तत्थ्यो से दूर नही हुआ जाता मित्र काकेश (आपने ऊपर टिप्पणी करी है इस् लिये आप को सम्भोधित करा है )

सही और प्रमाणिक जानकारी होना मानवता के विकास मे ही योगदान देगी. यही सोच के हम लोगो ने अपने ब्लोग (www.kanhiaya.com/infovinity ) पर ताज्-महल या (तेजोमहालय)के बारे मे श्री ओक के लेख प्रकाशित करे है, हमे ताज पर अभी भी उतना ही गर्व है जितना ताज के तेजोमहालय होने पर होता ,

ताज को 7-wonders मे शामिल करवाने के लिये एकरसता से वोट करे , बाद मे देखा जायेगा कि ये शाहजंहा ने बनवाया या किसी हिन्दु शासक ने , वैसे भी अगर ताज जगत प्रस्सिध हो जाता है तो सत्य से आवरण हटने मै ज्यादा समय नही लगेगा. हमारे यहां की परंपरा रही है कि हम लोग चीख चीख के कुछ भी बोल ले पर किसी के कान मे जुं भी नही रेन्गन्गी , वही अगर यही बात कोई विदेशी बोलेगा तो वोह हडकंप मचा देगी, इस लिये मेरा सभी से नम्र निवेदन है कि आप लोग भी आपने ताज आपने तेजोमहालय के लिये पुरज़ोर समर्थन दे और लोगो को भी प्रेरित करे .

धन्यावाद
सुदीप साकल्ले. (Sudeep Sakalle)
ब्लोग : www.kanhaiya.com/infovinity
लंदन (१८/०६/२००७)(London-18/06/2007)