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Monday 28 May 2007

दो मजेदार कहानियाँ

(१) मजाक
एक मैनेजर साहब अपने मातहतों के साथ अक्सर मजाक किया करते थे और मजाक करते वक्त वे इस बात का ध्यान नहीं रखते थे कि उनके मजाक से किसी को बुरा लग सकता है । इसके कारण कर्मचारी उस मैनेजर से परेशान रहते थे । एक बार क्रिसमस की पार्टी में लोगों ने उन्हे सबक सिखाने का तय किया । जब पार्टी शबाब पर थी मैनेजर साहब दो मिनट के लिये टॉयलेट गये तो एक व्यक्ति ने उनके कोट की जेब से पर्स निकाला और देखा कि उसमें क्या-क्या सामान है, उसके हाथ उसी रात घोषित होने वाली लॉटरी का टिकट लगा, उन्होंने उसका नम्बर नोट करके उसे वापस उनके कोट की जेब में रख दिया । अब वे लोग मजाक के लिये तैयार थे । फ़िर उन्होंने होटल के बैरे को एक कोने में ले जाकर कुछ गुफ़्तगू की । मैनेजर साहब टॉयलेट से वापस आकर पार्टी का आनन्द उठाने लगे ।
अचानक थोडी देर बाद एक वेटर ने हॉल में आकर घोषणा की कि आज रात को जो महालॉटरी खुलने वाली थी उसकी घोषणा हो गई है, और उसने एक नम्बर बताया और कहा कि इस नम्बर के मालिक को दस करोड़ रुपये मिलने वाले हैं । मैनेजर साहब ने चुपचाप पर्स निकालकर नम्बरों का मिलान किया और मन-ही-मन बहुत खुश हुआ, लेकिन जैसी कि उसकी आदत थी, उसने यह किसी पर जाहिर नहीं किया, हालांकि मजाक करने वाले कर्मचारी सब कुछ जानते थे । सभी ने देखा कि मैनेजर साहब बहुत मस्त हो गये हैं और बहुत पीने लगे हैं । कुछ देर बाद मैनेजर साहब उठे और जोर-जोर से उन्होंने घोषणा की - इस कम्पनी का मालिक बेहद खूसट है और उसका लडका जो कि मेरा बॉस भी है बेहद निकम्मा और नालायक है । इस कम्पनी के सभी कर्मचारी कामचोर और चमचागिरी में माहिर हैं । मेरी सेक्रेटरी को मैं बहुत चाहता हूँ और उससे शादी करने वाला हूँ, इसलिये मेरी पत्नी सहित तुम सभी भाड़ में जाओ, मैं इस घटिया कम्पनी को लात मारता हूँ...
अगली सुबह न नौकरी थी, न बीवी, न सेक्रेटरी और जाहिर है कि न ही लॉटरी का पैसा भी ।
सबक : या तो किसी के साथ बुरा मजाक मत करो या फ़िर अपने साथ भी वैसा ही होने के लिये तैयार रहो ।

(२) गरीब पर एक शॉर्ट नोट
हाल ही में जारी आँकडों के मुताबिक भारत में अमीरों और करोडपतियों की संख्या तेजी से बढ रही है, कुछ कम्पनियों में कुछ लोगों के वेतन एक करोड रुपये से भी ऊपर निकल गये हैं... दस-पन्द्रह वर्षों में तो कई नौनिहाल पैदा होते ही करोडपति और युवा होते-होते अरबपति हो जायेंगे । गरीबी या अभाव क्या होता है वे कभी भी नहीं जान पायेंगे । ऐसे माहौल (?) सन २०४० में कक्षा पाँचवीं के एक बालक से "एक गरीब परिवार" पर "शॉर्ट नोट" लिखने को कहा गया, उसने लिखा - ..."एक बार एक बहुत ही गरीब फ़ैमिली थी, पति और पत्नी दोनों बहुत गरीब थे, दो बच्चे थे वे भी बहुत गरीब थे । उनके घर के सारे नौकर भी गरीब थे, माली, ड्रायवर और गार्ड भी बहुत गरीब थे । तीन मर्सिडीज में से दो की सर्विसिंग छः महीने से नहीं हुई थी और एक गाडी का एसी काम नहीं कर रहा था । पाँच कलर टीवी में से दो खराब पडे थे । उस गरीब फ़ैमिली ने दो साल से घर में फ़र्नीचर और "रेनोवेशन" नहीं करवाया था । यहाँ तक कि छुट्टियाँ बिताने सिंगापुर और मलेशिया तक गये एक साल से ऊपर हो गया था । दोनों बच्चे जो कि मेरी उम्र के हैं उनके पास क्रेडिट कार्ड तक नहीं है, उनके कुत्तों को चार दिन से चिकन खाने को नहीं मिला था । मतलब यह कि "ऑल-इन-ऑल" वह एक बहुत ही गरीब परिवार है ।...

4 comments:

विकास कुमार said...

हा हा!
दोनो कहानियाँ मजेदार हैं। पढ़कर आनंद आ गया।

Shrish said...

बेचारा मैनेजर, माया मिली न राम। :)

Udan Tashtari said...

इसी मैनेजर पर लिख देता तो गरीब वाला नोट भी पूर हो जाता.

मजेदार कहानियाँ.

Anonymous said...

मेनेजर ने जो किया बुरा किया परन्तु कर्मचारी किसी साधारण तरिके से समझाते तो अच्छा होता ।