Wednesday, May 9, 2007

India Pakistan Atomic War

भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध...

अब चूँकि अमेरिका की लाख कोशिशों के बावजूद भारत-पाकिस्तान दोनो के पास परमाणु मिसाईल तकनीक मौजूद है, ऐसे में यदि भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध छिड जाये तो क्या मंज़र होगा इसका अध्ययन किया गया, और चूंकि अध्ययन एक अमेरिकी एजेन्सी ने किया है, इसलिये वह सही ही होगा (ऐसा मानने वाले अमेरिका से भारत में ज्यादा हैं)। उक्त अध्ययन के निष्कर्ष इस प्रकार हैं -

एक बार पाकिस्तानी सेना ने निश्चय किया कि भारत पर परमाणु मिसाइलों से हमला किया जाये, उन्होंने उसे लांच-पैड पर लगा दिया, क्योंकि उन्हें पाक सरकार की इजाजत की आवश्यकता नहीं थी, और मिसाइल दागने के लिये उल्टी गिनती चालू कर दी । भारत की तकनीक इतनी उन्नत है कि मात्र अठारह सेकंड में भारत को पता चल गया कि हम पर परमाणु हमला होने वाला है, लेकिन भरतीय सेना को सरकार की मंजूरी लेना होती है इसलिये भारतीय सेना ने सरकार के सामने परमाणु हमले को विफ़ल करने के लिये स्वयं पहले हमला करने की अनुमति राष्ट्रपति से माँगी । राष्ट्रपति ने सेना की यह सिफ़ारिश मंत्रिमण्डल के सामने रखी । प्रधानमन्त्री ने तत्काल लोकसभा की एक आपात बैठक बुलाई । लोकसभा का वह विशेष सत्र बहिष्कार और नारेबाजी के कारण अनिश्चितकाल के लिये स्थगित कर दिया । राष्ट्रपति ने टीवी पर भाषण देकर तुरन्त निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बीच पाकिस्तान की मिसाइल में कुछ तकनीकी खराबी आ गई, और उन्होंने दोबारा उलटी गिनती चालू की । लेकिन इधर भारत मे सरकार अल्पमत में आ गई, क्योंकि उसे समर्थन दे रही एक विशेष पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया । राष्ट्रपति ने प्रधानमन्त्री को विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दिया । सरकार विश्वास मत में पराजित हो गई और राष्ट्रपति ने अगली व्यवस्था होने तक कामचलाऊ प्रधानमन्त्री को बने रहने को कहा ।

कामचलाऊ प्रधानमन्त्री ने सेना को परमाणु मिसाइल छोडने के आदेश दिये, लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि कामचलाऊ सरकार नीतिगत फ़ैसले नहीं कर सकती, क्योंकि चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है, चुनाव आयोग ने एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई । हालांकि उच्चतम न्यायालय ने सत्ता और शक्ति के दुरुपयोग को मान लिया लेकिन "इमरजेंसी" को देखते हुए कामचलाऊ प्रधानमन्त्री को मिसाइल के उपयोग के लिये अधिकृत कर दिया । उसी समय पाक मिसाइल सही ढंग से छूट तो गई, लेकिन अपने निशाने से चार सौ किलोमीटर दूर इस्लामबाद में पाकिस्तान की ही एक सरकारी इमारत पर ठीक बारह बजे गिरी, संयोग से कोई जनहानि नहीं हुई, क्योंकि भारत की ही तरह वहाँ भी सरकारी कर्मचारी इमारत से बाहर थे । साथ ही उस मिसाइल पर लगा परमाणु बम भी कहीं पास की झील में जा गिरा था । अब पाकिस्तान ने चीन से उच्च तकनीक आयात करने का फ़ैसला किया । इस दरम्यान, भारत में इस मुद्दे पर विचार करने के लिये एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई और सर्वसम्मति से फ़ैसला हुआ कि भारत को पाकिस्तान पर परमाणु हमला कर देना चाहिये, तब तक सेना को अनुमति माँगे तीन माह का समय बीत चुका था ।

इसी समय अचानक मीडिया में "मानवतावादी", "परमाणु विरोधी" आदि लोगों ने मानव-श्रंखला वगैरह बनाना शुरु कर दिया था, एक विपक्षी पार्टी ने "रास्ता-रोको" का आयोजन कर डाला था, कुछ लोग जो तेंडुलकर का पुतला नहीं जला सके थे, उन्होंने टीवी पर आने के लिये मुशर्रफ़ का पुतला हाथों-हाथ जला लिया और अपने चेहरे टीवी पर देख कर खुश हो लिये । आप्रवासी भारतीयों ने भी वॉशिंगटन और कैलिफ़ोर्निया से ई-मेल का ढेर लगा दिया, उन्हें अपने देश से ज्यादा निवेश की चिंता होने लगी थी । दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की मिसाइलें एक के बाद एक फ़ेल होती गईं, कुछ मिसाइलें तेज राजस्थानी हवाओं के कारण अरब सागर में जा गिरीं तो कुछ पाक अधिकृत जंगलों में । आखिर में अमेरिका से तस्करी की हुई एक मिसाईल सही तरीके से चली, लेकिन चूँकि पाकिस्तानियों को उसका सॉफ़्टवेयर समझ में नहीं आया था और वे कोड नहीं बदल पाये थे, इसलिये मिसाइल उसके मूल निशाने अर्थात मास्को की तरफ़ बढ चली । रूसियों ने तत्काल उस मिसाइल को मार गिराया और अपनी ओर से एक मिसाइल इस्लामाबाद पर गिरा दी । बस फ़िर क्या था, अफ़रातफ़री मच गई ।

हजारों मौतों के कारण पाकिस्तान ने विश्व समुदाय से मदद की अपील की, भारत ने भी इस घटना पर गहरा अफ़सोस जाहिर किया और एक हवाई जहाज भरकर बिस्किट भेजने का प्रबन्ध किया, ताकि उनके "भाई" भूखे ना रहें । फ़िर एक बार भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कसम खाई कि वह कभी भी अपनी ओर से परमाणु हमले की पहल नहीं करेगा, और खुशी-खुशी रहने लगा । पाकिस्तान की जनता में तो कभी भी सेना से जवाबतलब करने की हिम्मत नहीं थी, सो वह भी खुशी-खुशी रहने लगी, और इस तरह समूचे "तंत्र" की "जागरूकता" और "सक्रियता" के कारण भारत-पाकिस्तान के बीच का परमाणु युद्ध होते-होते रह गया और मानवता कलंकित होने से बच गई ।

8 comments:

अरुण said...

भाइ इतना सही चित्रण भविष्य का आप तो अब भविष्य वक्ता क कम भी शुरु करदॊ पर एक भि मिसाईल गलती से सही जगह लग गई तो

Shrish said...

वाह आपकी कल्पनाशीलता का जवाब नहीं। खूब खिंचाई की दोनों देशों की आपने। मजेदार लेख।

ढंढोरची said...

सुरेस भाउ,ये क्या भविष्य वाणी बांच रहे हो।हमे तो डर लगने लग्गा है।कहीं सही निसाना लगा तो मेरा क्या होगा सुरेसवा भाउ?

Udan Tashtari said...

बहुत सही, महाराज. आपका भी जबाब नहीं.

संजय बेंगाणी said...

लगातार डर बना रहा की मिसाइल अब गीरअब गीरी. आपने बचा लिया.
खुब लिखा. मजा आया. :)

अतुल शर्मा said...

अच्छा कटाक्ष किया है।

Anonymous said...

बहुत मज़ेदार था

Sagar Chand Nahar said...

बहुत मजा आया पढ़कर। खासकर भारत का चित्रण बखूबी किया।