Wednesday, April 4, 2007

Secularism in India and Politics


धर्मनिरपेक्षता की जय ?

क्या आप धर्मनिरपेक्ष हैं ? जरा फ़िर सोचिये और स्वयं के लिये इन प्रश्नों के उत्तर खोजिये.....

१. विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ?

२. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?

३. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ ८५% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, १५% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?

४. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ?

५. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?

६. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?

७. १९४७ में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ?

८. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ?

९. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है" ?

१०. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ?

११. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

१२. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?

१३. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ?

१४. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ?

१५. क्या आप मानते हैं - संस्कृत सांप्रदायिक और उर्दू धर्मनिरपेक्ष, मन्दिर साम्प्रदायिक और मस्जिद धर्मनिरपेक्ष, तोगडिया राष्ट्रविरोधी और ईमाम देशभक्त, भाजपा सांप्रदायिक और मुस्लिम लीग धर्मनिरपेक्ष, हिन्दुस्तान कहना सांप्रदायिकता और इटली कहना धर्मनिरपेक्ष ?

१६. अब्दुल रहमान अन्तुले को सिद्धिविनायक मन्दिर का ट्रस्टी बनाया गया था, क्या मुलायम सिंह को हजरत बल दरगाह का ट्रस्टी बनाया जा सकता है ?

१७. एक मुस्लिम राष्ट्रपति, एक सिख प्रधानमन्त्री और एक ईसाई रक्षामन्त्री, क्या किसी और देश में यह सम्भव है, यह सिर्फ़ सम्भव है हिन्दुस्तान में क्योंकि हम हिन्दू हैं और हमें इस बात पर गर्व है, दिक्कत सिर्फ़ तभी होती है जब हिन्दू और हिन्दुत्व को साम्प्रदायिक कहा जाता है ।

स्वामी विवेकानन्द ने कहा था - "हिन्दुत्व कोई धर्म नहीं है, यह एक उत्तम जीवन पद्धति है" । गाँधी के खिलाफ़त आन्दोलन के समर्थन और धारा ३७० पर भी काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है और ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं है, इसलिये नहीं लिखा, फ़िर भी.....उपरिलिखित विचार किसी राजनैतिक उद्देश्य के लिये नहीं हैं, ये सिर्फ़ ध्यान से चारों तरफ़ देखने पर स्वमेव ही दिमाग में आते हैं और एक सच्चे देशभक्त नागरिक होने के नाते इन पर प्रकाश डालना मेरा कर्तव्य है
(एक ई-मेल के सम्पादन और अनुवाद पर आधारित)

20 comments:

संजय बेंगाणी said...

ई-मेल से लिया गया मसौदा! हमे लगा आपके विचार है. :)

इन प्रश्नो के उत्तर तो वे ही देंगे जो धर्मनिरपेक्ष है. हम तो उस श्रेणी में आते नहीं.

एक बात और जोड़ लें. कौन-सा देश होगा जिसका सुपर-प्रधानमंत्री एक विदेशी हो. कमाल तो यह है, उन्हे राष्ट्रपति के रूप में देखने की इच्छा वाले भी कई हैं.

अतुल शर्मा said...

ईमेल का संपादन है, कोई बात नहीं। आप ईमानदारी से बताईये, क्या ये विचार आपको कभी नहीं आए। मुझे तो आए हैं और मैं धर्मनिरपेक्ष नहीं हूँ, हाँ धर्म के सापेक्ष ज़रूर हूँ।

Suresh Chiplunkar said...

भाईयों,
इस तरह के विचार मेरे भी हैं, लेकिन चूँकि यह ई-मेल से लिया गया था इसलिये उसे उल्लेखित कर दिया, नहीं तो यहाँ भाई लोग तत्काल इसे अपना विचार बताकर मुझे चोर बताने लगते...हमें कई तरह के मेल मिलते हैं जिनसे विचार बनते-बिगडते हैं और उनसे ही हम कई बार ब्लोग लिखते हैं, लेकिन कहीं कोई "क्लेम" ना कर दे कि "भाई यह तो आपने मेरे मेल से उठाया है" इसलिये उल्लेख कर देना अच्छा...

Sagar Chand Nahar said...

ये सवाल ऐसे हैं जिनका किसी के पास जवाब नहीं है या कोई देना भी नहीं चाहता। जैसे मुर्गी पहले आई या....

जिस दिन इनके जवाब मिल जायें हमें बताईयेगा, हम भी खुश हो लेंगे। :) :)

अरुण said...

सुरेश जी इसमे कुछ सवाल और जुडने है

lata said...

suresh ji, abhi kuch hi din pahle se aapke blog par aa rahi hun, aur aapko jankar mujhe bahut achcha laga ki kahi to vo baten sabke dimag me chal rahi hain jo mai bhi sochti hun.
aapne bahut se alag-alag mudde uthaye hain jo samajik sarokar se jude hue hain..mai bahut padhti hun par kabhi kuch likhti nahi par aaj khud ko rok nahi pai, ashcharya hai ki itne blog likhne padhne wale log hain par EK AISA LEKH JO HUM SAB HINDUSTANIYON SE JUDA HAI, us par COMMENT ke nam par ya to HASYA,VYANG hota hai ya to log itna bachke chalne lage hain ki samajik sarokar ke nam par SHOONYA ho gae hain.
Agar is lekh apr jada nahi to kam se kam 50 comments bhi hote to thoda sa santosh hota mujhe par....Aisa lagta hai ki HINDUSTANIYON ki niyati hai sirf chup aur ghulam rahna.
kahi koi josh nahi, kahi koi prerna nahi, hum bas filme dekhkar, 2-4 deshbhakti geet sunkar, rashtragan par sawdhan khade hokar hi apne desh ke prati prem prakat kar lete hain bas isse jada kahi koi gunjaish nahi.Afsos.

annu said...

dekhie, yeh vichar ham me se bahut logon ke man men pal rahe hote hain.saubhagya se blog ek achha madhyam hai apne jaison se judne ka, par itna hi kafi nahi hai.aiye logon ko amntrit karen ki ham jaise (sampradayik log) ek sath juden aur kuch sakriya karen.Akele chalne se shuruat haoti hai aur karvan banta chala jata hai. ek aisa lekh likhie jisse kuch karne ki shuruat ho sake.mai sath chlon ga.

Mujhe Hindi mein type karne ke bare me help chahie!

drmeakinmittu said...

स्वाल इस बात का नही हे िक ये लेख कहा से लिया ग्या हे या ये िवचार उन्के मोिलक िवचार हे या न्ही ....अिपतु स्वाल ये हे िक क्या ये स्वाल सही हे...क्या इन्का कोई ज्वाब ह्मारे पास हे ... क्या एक िहन्दु देश, िजसे की एक िहन्दू देश की उपाधी भी नही दी गयी हे, उस्मे रह्ने वाले िहन्दु अगर अप्ने अस्िततव की ल्डाई लडे या अवाज बुलन्द करे तो कया ये गलत हे...क्या ये कट्ट्र्वािद्ता हे

मेरे िवचार से िबल्कुल भी नही ......

safat alam taimi said...
This comment has been removed by the author.
safat alam taimi said...

धन्यवाद! पर आप अजीब अजीब प्रकार की बातें कर रहे हैं,क्या हमारे इन प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं? आप की रचना किसने की? आप संसार में क्यों ? आए आपको कहाँ जाना है ? यह धरती क्यों बनाई गई ?

ram said...

Suresh ji,Mere bichar bhi aapse milte hain. aaj hamare desh ko aise yuva imandar chahiye taki hum apne desh ko bacha sake nahi to hamara desh , pata nahi kaha jayega..

Hum AApke hamesha saath hai.
Jai Hind!
Ram Shanker

yogssg said...

सफत आलम साहब, वैसे तो आपने अपने कमेन्ट से जाहिर कर ही दिया है की आप में कितनी समझ हैं जो ऐसा बचकाना सवाल कर रहे हैं | मान लीजिये की एक बहस ऐसी जिसमे दो कम्पुटर इंजीनियर हो और उनमे से एक दुसरे से किसी तकनीक के बारे में पूछे तो समझ में आता है, लेकिन वही इंजीनियर एक किसान से पूछे की बताओ फलां तकनीक कैसे काम करती है तो वो किसान शायद ही बता पायेगा और वोही किसान उस इंजीनियर से कोई खेती वाला सवाल पूछ ले तो इंजीनियर के छक्के छुट जायेंगे | आपने जो सवाल उठाये उनका उपस्थित लेख से कोई लेना देना नहीं ये तो कोई भी सामान्य आदमी भी समझ सकता है फिर भी मैं ये स्पष्ट कर देता हूँ की आप वाले सवालों के जवाब तो न आपके पास होंगे और न मेरे पास लेकिन इस लेख के ज्यादातर प्रश्नों को हाँ या न में ही ख़त्म किया जा सकता है | सवाल पढ़ते जाईये और जवाब देखते जाईये स्क्रॉल की जेहमत के लिए माफ़ कर देना | Ans1. एक भी मुस्लिम देश नहीं, 2. कोई भी देश नहीं, 3. इसका जवाब कमेन्ट में समेटना मुश्किल है, 4. एक भी नहीं, 5. इसमें जरूर मुझे थोडा संशय है एक आध मामले ऐसे हो सकते हैं जिनमे फतवे जरी हुए हों, 6. हाँ या न वाला प्रश्न नहीं है, Q7. व Q8. के लिए यही कहूँगा की यदि आप भारत के अधिकारिक आंकडों को सही मानते हैं तो पाकिस्तान और बांग्लादेश के जनसँख्या आंकडों को भी एक बार देख लीजियेगा आगे और आगे के प्रशोनों का भी जवाब दे सकता हूँ लेकिन एक समझदार आदमी के लिए काफी होगा और फिर कमेन्ट काफी बड़ी हो चुकी है | वैसे मैंने अभी तक यही देखा है की थोड़े बहुत जिन मुस्लिम भाइयों ने कमेन्ट किया हैं उनमे जयादातर प्रश्न ही करते नज़र आ रहे हैं कोई जवाब देता नज़र नहीं आ रहा है जबकि दुसरे लोग सवाल और जवाब दोनों कर रहे हैं |

ePandit said...

बहुत ही ज्वलन्त प्रश्न उठाये आपने। बात-बात पर हिन्दुओं के विरुद्ध बोलने-लिखने वाले "सैकुलर" अब इन प्रश्नों का क्या जवाब देंगे। ऐसे तमाम सैकुलरों को ये प्रश्न नंगा कर देते हैं।

Onlineengineer said...

Dear Suresh Ji,

I am a regular reader of your blog. One very interesting thing about your blog is you produce lot of data to favor your arguments. That is like a Mathematician or an engineer.

One suggestion- Many of my friends are not good in hindi reading so if possible please provide english version of your blogs. Young generation students are not acquinted with these things and if published in English there will be a impact.

Thanks

shishir said...

suresh ji ye sab satta ke devi ki mahima hai. har koi short cut khojta hai. ab yadi neta achchha karne jaye to kai kintu parantu honge.lekin yadi party muslim votebank, sc/st votebank bana ke chale to jeet sunishchit hai. iske alava hamesha virodhiyon ko sampradayik kahke satta se dur rakha ja sakta hai. wase bhi rashtravadiyon me pakad to rss ka hai to bhala dusri party kyon barra ke chhatte me haath dalega. haath sirf jalega vote kisi aur ko milne wala nahi. dusra yadi hindu bhi musalmaan ki tarah asabhya ban jayen to sambhav hai hinduon ko haq mile.

HC said...

@ Suresh ji , abhi kuch hi din huye blog Jagat mein blog padhane aur likhane ke liye , so dhoondh dhoondh ke puraane post padh raha hoon , sach mein vichar bahut jwwalant hain ,

Mere khyal se Hindu ka Dil hi itana udar ho sakta hai , ki in Saare prashnon ka uttar usake favour mein na hote huye bhi , woh itani fikar nahi karata .

Karan (for politician : simply politics , Votebank)

For General man like me : vichar toh khair aate hi hain Dimaag mein , par Do june, teen april se (roji roti) ki bhagdaud se fursat mile toh , aur dosh dalane ke liye politician toh hai hi.


Par Sabse bada karan Jo Insaan jaisa hota hai waise hi doosaron ko bhi sochata hai

aur yahan Hindu ke Sanskaar ) VIshva Bandhutva ,Vasudhaiv kutumbkam aur , SarvDharm Sam Bhav(not using dharm nirpeksh bcoz it differs alot)

Sabhi Dharmon ko Aadar Dena ...


par fir bhi Vicharneeya Prashn..

Sabhi Bharteeyon ke liye ..

अज्ञात भ्रमणकर्ता said...

ये लेख और इस का लिंक में अपने खाते में लगा रहा हु अगर आप को कोई आपति हो तो मेल करे इससे में हटा दूंगा/

akram ahamad said...

bhaiyon mera naam ikram ahmad hai mai ek ganv mai rahta hunn sures ji ne jo kuchh likha hai mai us se sahmat nahi hu bhrat mai abhi musalmano ka utna chhut nahi mila mila hai kyonki maine jahan bhi dekha hai ek police se lekar bade officer jyada tar hndu hi hai .....muslaim 20% to hindu 60% se bhi jyada hain ....aap ye kahan se likh diye ki mulasman hi jayada hai...

Anonymous said...

bhai akaram aap mudde se hat gaye ho bat pure world ki ho rahi hai aap apne pe le bathe aaj k date me aap ko pata hoga pak and bagladesh me hindu koun si naukri karte hai jaan bachani muskil hai darmantaran ho raha hai.... histroy gawah hai koi bhi hindu raja ya gorvment ne ye dabaw nahi banaya ki aap apna dharm badal do but duniya aur histroy dekho pata chal jayaga aapko........

kushagra sisodia said...

The only reason why all this happens is beacause of identity crises amongst the hindus--we dont tend to think ourselves as one civilization but many with numerous affiliations like caste,region,language,etc.
Therefore we are never taken seriously by the bootlegger politicians who find a strong and dependable vote bank in muslims.
The day we are able to forge a united front all this will change with in a matter of minutes.