Wednesday, April 18, 2007

Nehru Dynasty and Gandhi Family in India

नेहरू-गाँधी राजवंश (?)

(प्रस्तुत लेख में दी गई जानकारियाँ विभिन्न पुस्तकों के अंशों, वेबसाईटों की सामग्रियों से संकलित की गई हैं, जिनके लिंक्स साथ में दिये गये हैं… इन जानकारियों को लेखक ने सिर्फ़ संकलित और अनु्वादित किया है)

आजकल जबसे "बबुआ" राहुल गाँधी ने राजनीति में आकर अपने बयान देना शुरू कर दिया है, तब से "नेहरू राजवंश" नामक शब्द बार-बार आ रहा है । नेहरू राजवंश अर्थात Nehru Dynasty... इस सम्बन्ध में अंग्रेजी में विभिन्न साईटों और ग्रुप्स में बहुत चर्चा हुई है....बहुत दिनों से सोच रहा था कि इसका हिन्दी में अनुवाद करूँ या नहीं, गूगल बाबा पर भी खोजा, लेकिन इसका हिन्दी अनुवाद कहीं नहीं मिला, इसलिये फ़िर सोचा कि हिन्दी के पाठकों को इन महत्वपूर्ण सूचनाओं से महरूम क्यों रखा जाये. यह जानकारियाँ यहाँ, यहाँ तथा और भी कई जगहों पर उपलब्ध हैं मुख्य समस्या थी कि इसे कैसे संयोजित करूँ, क्योंकि सामग्री बहुत ज्यादा है और टुकडों-टुकडों में है, फ़िर भी मैने कोशिश की है इसका सही अनुवाद करने की और उसे तारतम्यता के साथ पठनीय बनाने की...जाहिर है कि यह सारी सामग्री अनुवाद भर है, इसमें मेरा सिर्फ़ यही योगदान है... हालांकि मैने लगभग सभी सन्दर्भों (references) का उल्लेख करने की कोशिश की है, ताकि लोग इसे वहाँ जाकर अंग्रेजी में पढ सकें, लेकिन हिन्दी में पढने का मजा कुछ और ही है... बाकी सब पाठकों की मर्जी...हजारों-हजार पाठकों ने इसे अंग्रेजी में पढ ही रखा होगा, लेकिन जो नहीं पढ़ पाये हैं और वह भी हिन्दी में, तो उनके लिये यह पेश है...


"नेहरू-गाँधी राजवंश (?) की असलियत"...इसको पढने से हमें यह समझ में आता है कि कैसे सत्ता शिखरों पर सडाँध फ़ैली हुई है और इतिहास को कैसे तोडा-मरोडा जा सकता है, कैसे आम जनता को सत्य से वंचित रखा जा सकता है । हम इतिहास के बारे में उतना ही जानते हैं जितना कि वह हमें सत्ताधीशों द्वारा बताया जाता है, समझाया जाता है (बल्कि कहना चाहिये पीढी-दर-पीढी गले उतारा जाता है) । फ़िर एक समय आता है जब हम उसे ही सच समझने लगते हैं क्योंकि वाद-विवाद की कोई गुंजाईश ही नहीं छोडी जाती । हमारे वामपंथी मित्र इस मामले में बडे़ पहुँचे हुए उस्ताद हैं, यह उनसे सीखना चाहिये कि कैसे किताबों में फ़ेरबदल करके अपनी विचारधारा को कच्चे दिमागों पर थोपा जाये, कैसे जेएनयू और आईसीएचआर जैसी संस्थाओं पर कब्जा करके वहाँ फ़र्जी विद्वान भरे जायें और अपना मनचाहा इतिहास लिखवाया जाये..कैसे मीडिया में अपने आदमी भरे जायें और हिन्दुत्व, भारत, भारतीय संस्कृति को गरियाया जाये...ताकि लोगों को असली और सच्ची बात कभी पता ही ना चले... हम और आप तो इस खेल में कहीं भी नहीं हैं, एक पुर्जे मात्र हैं जिसकी कोई अहमियत नहीं (सिवाय एक ब्लोग लिखने और भूल जाने के)...तो किस्सा-ए-गाँधी परिवार शुरु होता है साहेबान...शुरुआत होती है "गंगाधर" (गंगाधर नेहरू नहीं), यानी मोतीलाल नेहरू के पिता से । नेहरू उपनाम बाद में मोतीलाल ने खुद लगा लिया था, जिसका शाब्दिक अर्थ था "नहर वाले", वरना तो उनका नाम होना चाहिये था "मोतीलाल धर", लेकिन जैसा कि इस खानदान की नाम बदलने की आदत थी उसी के मुताबिक उन्होंने यह किया । रॉबर्ट हार्डी एन्ड्रूज की किताब "ए लैम्प फ़ॉर इंडिया - द स्टोरी ऑफ़ मदाम पंडित" में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान था, जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था. लोग सोचेंगे कि यह खोज कैसे हुई ?

दरअसल नेहरू ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा था कि उनके दादा अर्थात मोतीलाल के पिता गंगा धर थे, ठीक वैसा ही जवाहर की बहन कृष्णा ने भी एक जगह लिखा है कि उनके दादाजी मुगल सल्तनत (बहादुरशाह जफ़र के समय) में नगर कोतवाल थे. अब इतिहासकारों ने खोजबीन की तो पाया कि बहादुरशाह जफ़र के समय कोई भी हिन्दू इतनी महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था..और खोजबीन पर पता चला कि उस वक्त के दो नायब कोतवाल हिन्दू थे नाम थे भाऊ सिंह और काशीनाथ, जो कि लाहौरी गेट दिल्ली में तैनात थे, लेकिन किसी गंगा धर नाम के व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला (मेहदी हुसैन की पुस्तक : बहादुरशाह जफ़र और १८५७ का गदर, १९८७ की आवृत्ति), रिकॉर्ड मिलता भी कैसे, क्योंकि गंगा धर नाम तो बाद में अंग्रेजों के कहर से डर कर बदला गया था, असली नाम तो था "गयासुद्दीन गाजी" । जब अंग्रेजों ने दिल्ली को लगभग जीत लिया था,तब मुगलों और मुसलमानों के दोबारा विद्रोह के डर से उन्होंने दिल्ली के सारे हिन्दुओं और मुसलमानों को शहर से बाहर करके तम्बुओं में ठहरा दिया था (जैसे कि आज कश्मीरी पंडित रह रहे हैं), अंग्रेज वह गलती नहीं दोहराना चाहते थे, जो हिन्दू राजाओं (पृथ्वीराज चौहान ने) ने मुसलमान आक्रांताओं को जीवित छोडकर की थी, इसलिये उन्होंने चुन-चुन कर मुसलमानों को मारना शुरु किया, लेकिन कुछ मुसलमान दिल्ली से भागकर पास के इलाकों मे चले गये थे । उसी समय यह परिवार भी आगरा की तरफ़ कूच कर गया...हमने यह कैसे जाना ? नेहरू ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि आगरा जाते समय उनके दादा गंगा धर को अंग्रेजों ने रोक कर पूछताछ की थी, लेकिन तब गंगा धर ने उनसे कहा था कि वे मुसलमान नहीं हैं, बल्कि कश्मीरी पंडित हैं और अंग्रेजों ने उन्हें आगरा जाने दिया... बाकी तो इतिहास है ही । यह "धर" उपनाम कश्मीरी पंडितों में आमतौर पाया जाता है, और इसी का अपभ्रंश होते-होते और धर्मान्तरण होते-होते यह "दर" या "डार" हो गया जो कि कश्मीर के अविभाजित हिस्से में आमतौर पाया जाने वाला नाम है । लेकिन मोतीलाल ने नेहरू नाम चुना ताकि यह पूरी तरह से हिन्दू सा लगे । इतने पीछे से शुरुआत करने का मकसद सिर्फ़ यही है कि हमें पता चले कि "खानदानी" लोग क्या होते हैं । कहा जाता है कि आदमी और घोडे़ को उसकी नस्ल से पहचानना चाहिये, प्रत्येक व्यक्ति और घोडा अपनी नस्लीय विशेषताओं के हिसाब से ही व्यवहार करता है, संस्कार उसमें थोडा सा बदलाव ला सकते हैं, लेकिन उसका मूल स्वभाव आसानी से बदलता नहीं है.... फ़िलहाल गाँधी-नेहरू परिवार पर फ़ोकस...


अपनी पुस्तक "द नेहरू डायनेस्टी" में लेखक के.एन.राव (यहाँ उपलब्ध है) लिखते हैं....ऐसा माना जाता है कि जवाहरलाल, मोतीलाल नेहरू के पुत्र थे और मोतीलाल के पिता का नाम था गंगाधर । यह तो हम जानते ही हैं कि जवाहरलाल की एक पुत्री थी इन्दिरा प्रियदर्शिनी नेहरू । कमला नेहरू उनकी माता का नाम था, जिनकी मृत्यु स्विटजरलैण्ड में टीबी से हुई थी । कमला शुरु से ही इन्दिरा के फ़िरोज से विवाह के खिलाफ़ थीं... क्यों ? यह हमें नहीं बताया जाता...लेकिन यह फ़िरोज गाँधी कौन थे ? फ़िरोज उस व्यापारी के बेटे थे, जो "आनन्द भवन" में घरेलू सामान और शराब पहुँचाने का काम करता था...नाम... बताता हूँ.... पहले आनन्द भवन के बारे में थोडा सा... आनन्द भवन का असली नाम था "इशरत मंजिल" और उसके मालिक थे मुबारक अली... मोतीलाल नेहरू पहले इन्हीं मुबारक अली के यहाँ काम करते थे...खैर...हममें से सभी जानते हैं कि राजीव गाँधी के नाना का नाम था जवाहरलाल नेहरू, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के नाना के साथ ही दादा भी तो होते हैं... और अधिकतर परिवारों में दादा और पिता का नाम ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, बजाय नाना या मामा के... तो फ़िर राजीव गाँधी के दादाजी का नाम क्या था.... किसी को मालूम है ? नहीं ना... ऐसा इसलिये है, क्योंकि राजीव गाँधी के दादा थे नवाब खान, एक मुस्लिम व्यापारी जो आनन्द भवन में सामान सप्लाय करता था और जिसका मूल निवास था जूनागढ गुजरात में... नवाब खान ने एक पारसी महिला से शादी की और उसे मुस्लिम बनाया... फ़िरोज इसी महिला की सन्तान थे और उनकी माँ का उपनाम था "घांदी" (गाँधी नहीं)... घांदी नाम पारसियों में अक्सर पाया जाता था...विवाह से पहले फ़िरोज गाँधी ना होकर फ़िरोज खान थे और कमला नेहरू के विरोध का असली कारण भी यही था...हमें बताया जाता है कि राजीव गाँधी पहले पारसी थे... यह मात्र एक भ्रम पैदा किया गया है । इन्दिरा गाँधी अकेलेपन और अवसाद का शिकार थीं । शांति निकेतन में पढते वक्त ही रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें अनुचित व्यवहार के लिये निकाल बाहर किया था... अब आप खुद ही सोचिये... एक तन्हा जवान लडकी जिसके पिता राजनीति में पूरी तरह से व्यस्त और माँ लगभग मृत्यु शैया पर पडी़ हुई हों... थोडी सी सहानुभूति मात्र से क्यों ना पिघलेगी, और विपरीत लिंग की ओर क्यों ना आकर्षित होगी ? इसी बात का फ़ायदा फ़िरोज खान ने उठाया और इन्दिरा को बहला-फ़ुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन करवाकर लन्दन की एक मस्जिद में उससे शादी रचा ली (नाम रखा "मैमूना बेगम") । नेहरू को पता चला तो वे बहुत लाल-पीले हुए, लेकिन अब क्या किया जा सकता था...जब यह खबर मोहनदास करमचन्द गाँधी को मिली तो उन्होंने ताबडतोड नेहरू को बुलाकर समझाया, राजनैतिक छवि की खातिर फ़िरोज को मनाया कि वह अपना नाम गाँधी रख ले.. यह एक आसान काम था कि एक शपथ पत्र के जरिये, बजाय धर्म बदलने के सिर्फ़ नाम बदला जाये... तो फ़िरोज खान (घांदी) बन गये फ़िरोज गाँधी । और विडम्बना यह है कि सत्य-सत्य का जाप करने वाले और "सत्य के साथ मेरे प्रयोग" लिखने वाले गाँधी ने इस बात का उल्लेख आज तक कहीं नहीं किया, और वे महात्मा भी कहलाये...खैर... उन दोनों (फ़िरोज और इन्दिरा) को भारत बुलाकर जनता के सामने दिखावे के लिये एक बार पुनः वैदिक रीति से उनका विवाह करवाया गया, ताकि उनके खानदान की ऊँची नाक (?) का भ्रम बना रहे । इस बारे में नेहरू के सेक्रेटरी एम.ओ.मथाई अपनी पुस्तक "रेमेनिसेन्सेस ऑफ़ थे नेहरू एज" (पृष्ट ९४ पैरा २) (अब भारत सरकार द्वारा प्रतिबन्धित) में लिखते हैं कि "पता नहीं क्यों नेहरू ने सन १९४२ में एक अन्तर्जातीय और अन्तर्धार्मिक विवाह को वैदिक रीतिरिवाजों से किये जाने को अनुमति दी, जबकि उस समय यह अवैधानिक था, कानूनी रूप से उसे "सिविल मैरिज" होना चाहिये था" । यह तो एक स्थापित तथ्य है कि राजीव गाँधी के जन्म के कुछ समय बाद इन्दिरा और फ़िरोज अलग हो गये थे, हालाँकि तलाक नहीं हुआ था । फ़िरोज गाँधी अक्सर नेहरू परिवार को पैसे माँगते हुए परेशान किया करते थे, और नेहरू की राजनैतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप तक करने लगे थे । तंग आकर नेहरू ने फ़िरोज का "तीन मूर्ति भवन" मे आने-जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था । मथाई लिखते हैं फ़िरोज की मृत्यु से नेहरू और इन्दिरा को बडी़ राहत मिली थी । १९६० में फ़िरोज गाँधी की मृत्यु भी रहस्यमय हालात में हुई थी, जबकि वह दूसरी शादी रचाने की योजना बना चुके थे । अपुष्ट सूत्रों, कुछ खोजी पत्रकारों और इन्दिरा गाँधी के फ़िरोज से अलगाव के कारण यह तथ्य भी स्थापित हुआ कि श्रीमती इन्दिरा गाँधी (या श्रीमती फ़िरोज खान) का दूसरा बेटा अर्थात संजय गाँधी, फ़िरोज की सन्तान नहीं था, संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस का बेटा था । संजय गाँधी का असली नाम दरअसल संजीव गाँधी था, अपने बडे भाई राजीव गाँधी से मिलता जुलता । लेकिन संजय नाम रखने की नौबत इसलिये आई क्योंकि उसे लन्दन पुलिस ने इंग्लैण्ड में कार चोरी के आरोप में पकड़ लिया था और उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था । ब्रिटेन में तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त कृष्ण मेनन ने तब मदद करके संजीव गाँधी का नाम बदलकर नया पासपोर्ट संजय गाँधी के नाम से बनवाया था (इन्हीं कृष्ण मेनन साहब को भ्रष्टाचार के एक मामले में नेहरू और इन्दिरा ने बचाया था) । अब संयोग पर संयोग देखिये... संजय गाँधी का विवाह "मेनका आनन्द" से हुआ... कहाँ... मोहम्मद यूनुस के घर पर (है ना आश्चर्य की बात)... मोहम्मद यूनुस की पुस्तक "पर्सन्स, पैशन्स एण्ड पोलिटिक्स" में बालक संजय का इस्लामी रीतिरिवाजों के मुताबिक खतना बताया गया है, हालांकि उसे "फ़िमोसिस" नामक बीमारी के कारण किया गया कृत्य बताया गया है, ताकि हम लोग (आम जनता) गाफ़िल रहें.... मेनका जो कि एक सिख लडकी थी, संजय की रंगरेलियों की वजह से गर्भवती हो गईं थीं और फ़िर मेनका के पिता कर्नल आनन्द ने संजय को जान से मारने की धमकी दी थी, फ़िर उनकी शादी हुई और मेनका का नाम बदलकर "मानेका" किया गया, क्योंकि इन्दिरा गाँधी को "मेनका" नाम पसन्द नहीं था (यह इन्द्रसभा की नृत्यांगना टाईप का नाम लगता था), पसन्द तो मेनका, मोहम्मद यूनुस को भी नहीं थी क्योंकि उन्होंने एक मुस्लिम लडकी संजय के लिये देख रखी थी । फ़िर भी मेनका कोई साधारण लडकी नहीं थीं, क्योंकि उस जमाने में उन्होंने बॉम्बे डाईंग के लिये सिर्फ़ एक तौलिये में विज्ञापन किया था । आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि संजय गाँधी अपनी माँ को ब्लैकमेल करते थे और जिसके कारण उनके सभी बुरे कृत्यों पर इन्दिरा ने हमेशा परदा डाला और उसे अपनी मनमानी करने की छूट दी । ऐसा प्रतीत होता है कि शायद संजय गाँधी को उसके असली पिता का नाम मालूम हो गया था और यही इन्दिरा की कमजोर नस थी, वरना क्या कारण था कि संजय के विशेष नसबन्दी अभियान (जिसका मुसलमानों ने भारी विरोध किया था) के दौरान उन्होंने चुप्पी साधे रखी, और संजय की मौत के तत्काल बाद काफ़ी समय तक वे एक चाभियों का गुच्छा खोजती रहीं थी, जबकि मोहम्मद यूनुस संजय की लाश पर दहाडें मार कर रोने वाले एकमात्र बाहरी व्यक्ति थे...। (संजय गाँधी के तीन अन्य मित्र कमलनाथ, अकबर अहमद डम्पी और विद्याचरण शुक्ल, ये चारों उन दिनों "चाण्डाल चौकडी" कहलाते थे... इनकी रंगरेलियों के किस्से तो बहुत मशहूर हो चुके हैं जैसे कि अंबिका सोनी और रुखसाना सुलताना [अभिनेत्री अमृता सिंह की माँ] के साथ इन लोगों की विशेष नजदीकियाँ....)एम.ओ.मथाई अपनी पुस्तक के पृष्ठ २०६ पर लिखते हैं - "१९४८ में वाराणसी से एक सन्यासिन दिल्ली आई जिसका काल्पनिक नाम श्रद्धा माता था । वह संस्कृत की विद्वान थी और कई सांसद उसके व्याख्यान सुनने को बेताब रहते थे । वह भारतीय पुरालेखों और सनातन संस्कृति की अच्छी जानकार थी । नेहरू के पुराने कर्मचारी एस.डी.उपाध्याय ने एक हिन्दी का पत्र नेहरू को सौंपा जिसके कारण नेहरू उस सन्यासिन को एक इंटरव्यू देने को राजी हुए । चूँकि देश तब आजाद हुआ ही था और काम बहुत था, नेहरू ने अधिकतर बार इंटरव्य़ू आधी रात के समय ही दिये । मथाई के शब्दों में - एक रात मैने उसे पीएम हाऊस से निकलते देखा, वह बहुत ही जवान, खूबसूरत और दिलकश थी - । एक बार नेहरू के लखनऊ दौरे के समय श्रध्दामाता उनसे मिली और उपाध्याय जी हमेशा की तरह एक पत्र लेकर नेहरू के पास आये, नेहरू ने भी उसे उत्तर दिया, और अचानक एक दिन श्रद्धा माता गायब हो गईं, किसी के ढूँढे से नहीं मिलीं । नवम्बर १९४९ में बेंगलूर के एक कॉन्वेंट से एक सुदर्शन सा आदमी पत्रों का एक बंडल लेकर आया । उसने कहा कि उत्तर भारत से एक युवती उस कॉन्वेंट में कुछ महीने पहले आई थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया । उस युवती ने अपना नाम पता नहीं बताया और बच्चे के जन्म के तुरन्त बाद ही उस बच्चे को वहाँ छोडकर गायब हो गई थी । उसकी निजी वस्तुओं में हिन्दी में लिखे कुछ पत्र बरामद हुए जो प्रधानमन्त्री द्वारा लिखे गये हैं, पत्रों का वह बंडल उस आदमी ने अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया ।

मथाई लिखते हैं - मैने उस बच्चे और उसकी माँ की खोजबीन की काफ़ी कोशिश की, लेकिन कॉन्वेंट की मुख्य मिस्ट्रेस, जो कि एक विदेशी महिला थी, बहुत कठोर अनुशासन वाली थी और उसने इस मामले में एक शब्द भी किसी से नहीं कहा.....लेकिन मेरी इच्छा थी कि उस बच्चे का पालन-पोषण मैं करुँ और उसे रोमन कैथोलिक संस्कारों में बडा करूँ, चाहे उसे अपने पिता का नाम कभी भी मालूम ना हो.... लेकिन विधाता को यह मंजूर नहीं था.... खैर... हम बात कर रहे थे राजीव गाँधी की...जैसा कि हमें मालूम है राजीव गाँधी ने, तूरिन (इटली) की महिला सानिया माईनो से विवाह करने के लिये अपना तथाकथित पारसी धर्म छोडकर कैथोलिक ईसाई धर्म अपना लिया था । राजीव गाँधी बन गये थे रोबेर्तो और उनके दो बच्चे हुए जिसमें से लडकी का नाम था "बियेन्का" और लडके का "रॉल" । बडी ही चालाकी से भारतीय जनता को बेवकूफ़ बनाने के लिये राजीव-सोनिया का हिन्दू रीतिरिवाजों से पुनर्विवाह करवाया गया और बच्चों का नाम "बियेन्का" से बदलकर प्रियंका और "रॉल" से बदलकर राहुल कर दिया गया... बेचारी भोली-भाली आम जनता !

प्रधानमन्त्री बनने के बाद राजीव गाँधी ने लन्दन की एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में अपने-आप को पारसी की सन्तान बताया था, जबकि पारसियों से उनका कोई लेना-देना ही नहीं था, क्योंकि वे तो एक मुस्लिम की सन्तान थे जिसने नाम बदलकर पारसी उपनाम रख लिया था । हमें बताया गया है कि राजीव गाँधी केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के स्नातक थे, यह अर्धसत्य है... ये तो सच है कि राजीव केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे, लेकिन उन्हें वहाँ से बिना किसी डिग्री के निकलना पडा था, क्योंकि वे लगातार तीन साल फ़ेल हो गये थे... लगभग यही हाल सानिया माईनो का था...हमें यही बताया गया है कि वे भी केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की स्नातक हैं... जबकि सच्चाई यह है कि सोनिया स्नातक हैं ही नहीं, वे केम्ब्रिज में पढने जरूर गईं थीं लेकिन केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में नहीं । सोनिया गाँधी केम्ब्रिज में अंग्रेजी सीखने का एक कोर्स करने गई थी, ना कि विश्वविद्यालय में (यह बात हाल ही में लोकसभा सचिवालय द्वारा माँगी गई जानकारी के तहत खुद सोनिया गाँधी ने मुहैया कराई है, उन्होंने बडे ही मासूम अन्दाज में कहा कि उन्होंने कब यह दावा किया था कि वे केम्ब्रिज की स्नातक हैं, अर्थात उनके चमचों ने यह बेपर की उडाई थी)। क्रूरता की हद तो यह थी कि राजीव का अन्तिम संस्कार हिन्दू रीतिरिवाजों के तहत किया गया, ना ही पारसी तरीके से ना ही मुस्लिम तरीके से । इसी नेहरू खानदान की भारत की जनता पूजा करती है, एक इटालियन महिला जिसकी एकमात्र योग्यता यह है कि वह इस खानदान की बहू है आज देश की सबसे बडी पार्टी की कर्ताधर्ता है और "रॉल" को भारत का भविष्य बताया जा रहा है । मेनका गाँधी को विपक्षी पार्टियों द्वारा हाथोंहाथ इसीलिये लिया था कि वे नेहरू खानदान की बहू हैं, इसलिये नहीं कि वे कोई समाजसेवी या प्राणियों पर दया रखने वाली हैं....और यदि कोई सानिया माइनो की तुलना मदर टेरेसा या एनीबेसेण्ट से करता है तो उसकी बुद्धि पर तरस खाया जा सकता है और हिन्दुस्तान की बदकिस्मती पर सिर धुनना ही होगा...

 यह अनुवाद सिर्फ़ इसीलिये किया गया है कि जो बात बरसों पहले से ही अंग्रेजी में उपलब्ध है, उसे हिन्दी में भी अनुवादित भी होना चाहिये.... यह करने के पीछे उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं है, ना ही अपने चिठ्ठे की टीआरपी बढाने का है... हाँ यह स्वार्थ जरूर है कि यदि पाठकों को अनुवाद पसन्द आया तो इस क्षेत्र में भी हाथ आजमाया जाये और इस गरीब की झोली में थोडा़ सा नावां-पत्ता आ गिरे.... (नीले रंग से इटैलिक किये हुए शब्द मेरे हैं, बाकी सब अनुवाद है)

83 comments:

Anonymous said...

After reading these translations and if they are true.... having nothing untold or hidden in it ..... It becomes a dark patch on the face of such a great nation ...... and the biggest question that comes into mind is that what r the so called historians doing.... And if all this is true then I believe that till independence Indians were the slaves of British and now the Gandhi's.

Rama said...

भाई साहब बधाई हो. मैं सोचता रह गया और आप ने कर दिखाया. बहुत ही अच्छा प्रयास रहा. लेकिन आपके ब्लाग में हिन्दी दिखाई नहीं दे रही. इनकोडिंग utf-8 होने के बाद भी. बाद में मैटर कॉपी करके नोटपैड पर लेजाकर पढ़ना पड़ा. इसे सही करें. कुछ यही हालत पंगेबाज के चिट्ठे की भी है.

Sanjeeva Tiwari said...

भईया ! आपने तो आंखे खोल दी
सचमुच में अंग्रेजी नही जानने से हम सच से चूक गये थे
पर आपने हमें अपनी भासा में हकीकत बयां कर दिया
वाह रे राजनीति !
हिंदी अनुवाद एवं नीले विचार के लिये
बधाई हो

Srijan Shilpi said...

अच्छा किया जो आपने यह सब हिन्दी में प्रस्तुत कर दिया। भारतीय लोकतंत्र के शाही घराने की असलियत की यह एक बानगी भर है। बहुत सारा सच ऐसा है जो सामने नहीं आ सका है। क़ानूनी रूप से मान्य सबूतों के अभाव में वे बातें सार्वजनिक करना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन कभी-न-कभी वह सच सामने जरूर आएगा। और जिस दिन वह सच जनता के सामने आएगा, लोग इतिहास की किताबों में से उस घराने के हुक्मरानों के नाम नोंच-नोंचकर फेंक देंगे।

संजय बेंगाणी said...

हे भारत भाग्य विधाताओ, जय हो जय हो जय हो...

मुर्ख बनती है जनता, बनाने वाले चाहिए.

आप द्वारा अच्छा कार्य हुआ है. टिप्पणीयों की परवाह न करे. अमुमन ऐसे लेखो पर लोग टिप्पणी कर अपनी छवि खराब करवाना नहीं चाह्ते.

Sanjeet Tripathi said...

अच्छा अनुवाद।
जो सत्य है वह किसी ना किसी रुप मे प्रकट होता ही है।

अरुण said...

सुरेश जी मुझे थोडा सा पता था पर सोचा गंदगी मे हाथ न डालु पर आपने तो नंगा कर दिया राहुल बाबा को
मुझे तो अब कविता दुबारा लिखनी पडेगी मै तो राहुल को भेज रहा था रोड शो मे सुनाने के लिये
मेरे तो पैसे मारे गये राहुल बाबा ने प्रोमिस किया था

अरुण said...

सुरेश जी मुझे थोडा सा पता था पर सोचा गंदगी मे हाथ न डालु पर आपने तो नंगा कर दिया राहुल बाबा को
मुझे तो अब कविता दुबारा लिखनी पडेगी मै तो राहुल को भेज रहा था रोड शो मे सुनाने के लिये
मेरे तो पैसे मारे गये राहुल बाबा ने प्रोमिस किया था

Anonymous said...

सुरेश जी;
पढा मैने भी है। मोतीलाल नेहरू आगरे में माईथान में पैदा हुये थे. तब वह हिन्दू नहीं बने थे।

बड़े लोगों का एक आभा मंडल होता है. लोग उस आभा मंडल के बाहर नहीं देख पाते।

ANURAAG MUSKAAN said...

जमाने के साथ हिटलर भी बदल जाते हैं... बढ़िया लिखा है...।

yunus said...

सुरेश जी
नेहरू गांधी राजवंश पर जो जानकारियां आपने दीं, वो मेरी उम्र के लोगों को नहीं पता होंगी । मेरे पिता अपने समय के कई रिफरेन्‍स बताया करते हैं । ये कमाल का दस्‍तावेज है । बहरहाल
धन्‍यवाद मुझे भेजे संदेश के लिये । आपने मेरी तस्‍वीर नई दुनिया में देखी होगी, सुधी श्रोता और पाठक जो हैं आप । इस चिट्ठे पर मन की बहुत सारी बातें करने की तमन्‍ना है, देखिये ना इसी बहाने आपसे संपर्क हो गया, मुझसे संपर्क करने के कई तरीक़े हैं मेल पर yunus.radiojockey@gmail.com
या फिर yunuskhanvividhbharati@yahoo.co.in
तो फिर जोड़ लीजिये संपर्क के तार । एक बार फिर धन्‍यवाद यूनुस

अतुल शर्मा said...

सुरेशजी आपने तो दिमाग की चूलें हिला कर रख दीं। अनुवाद और प्रस्तुति दोनों बहुत अच्छे हैं और आलेख उम्दा बन पड़ा है। धन्यवाद इस जानकारी के लिए।

sushant jha said...

मै भौचक्का हूं....

umashankar said...

chiplunkar sahab...! aap jaise hi sachche bhartiya hote hain. mujhe garva hai aap par. saath he request hai is blog ko padhne walon se ki aisee charchayen kewal paan ki dookan ya band kamre ki shobha na bane, party politics se hat kar sochen, samjhe, aur fir logon ko bataye... aapko DHANYAWAD Suresh Ji .

Yusuf said...

yesahi hai kuchh man mafik mil jata hai to usko chhap dene men khushi hoti hai par meine apki is poori shrinkhala ko padhne ke baad paya ki isme dehr sari galtiyan hain jo tathyatmak hain. un galtiyon ka matlab yahi hai ki un cheejon ko likhne walon ke pas jankari ki kami thi. agar aap apni pratishta is mudde par laga rahe hain to cheejen bhi jaanch lijiye kisi ko badnaam karne ki itni bhi kya hadbadi ki apni pratishta bhi daanv par lag jay

Bhushan Sharma said...

Sureshji itni pramanik jankari ke liye bahut dhanyawad. Is tathakathit desh premiyon ki saza yahi hai ki iss desh ki raajneeti se inhein itna door kar diya jaye ki dobara ye sar na utha sakein. Inki sahi jagah hogi kaalkothri, inki kartooton ki saza inhein zinda rakhkar hi di ja sakti hai.

Datacare said...

Suresh G You have done a great job. We salute you for all these eye opening facts. Thankyou for this great information and get ready for the work of sweeper, so that we can wash away these potties from our India.

Indian and other girls Nude Gallaries said...
This comment has been removed by the author.
Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

मैं ये खबर पहले अंगरेजी मैं पढ़ चूका था | phir भी हिंदी मैं पढ़ कर अच्छा लगा | मैं समझ सकता हूँ की आपने कितनी मिहनत की होगी इसे लिखने मैं | अनुवाद भी अच्छा है |

ऐसे हजारों लेख हैं जो सिर्फ अंगरेजी मैं ही उपलब्ध है | आपनी अच्छी सुरुवात की है |

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बढ़िया लगा।
आगे भी लिखते रहें।
बधाई।

Dr. Smt. ajit gupta said...

हमें पता था कि दाल काली है लेकिन सारी ही दाल काली है यह तो आज ही पता लगा। लेकिन प्रश्‍न वही है कि हमारे इतिहासज्ञ क्‍या कर रहे हैं या ये सब भी इसी राजवंश के बनाए हुए मोहरे हैं। अब जरा यह भी बता दीजिए कि इस परिवार का और शेख अबदुल्‍ला से क्‍या रिश्‍ता है?

amit kumar viccy said...

bhai apne likhi to aisi batein hai jo apust roop se mujhe bhi mili this isme nargis ki maan aur nehru ke samband ke bare mein bhi tha. lekin yeh harmare yaha se hata sirf is karan ki communist ne nehru khaas kar indira ko seekh di ki kase logo ko apna gulam banaya jata hai aur iski keemat woh indira se vasool karte rahe hai. ek najboot neta hone ke babjood comunisto ne unka bharpoor istemal kiya itna to sanjay gandhi ne bhi nahi kiya aur unhone poore itihaas ko tod-mador kar comunist aur nehru ka itihas aur unki hi azadi ki ladai ise bana diya

कुमार said...

श्रद्धा माता के बारे में विस्तार से पढ़ें: 'मेरी Orkut डायरी'(my orkut community) में एक लेख "नेहरू जी: कुछ भी तो नहीं बदला राजनेताओं में"
http://www.orkut.co.in/Main#CommMsgs?cmm=24835004&tid=2527861243977078047

RAJENDRA said...

itni jaankari to thi is poore khandaan kee ki men bhayankar gandagee hai ab to jahir ho gya ki desh ka haal aaj jo hai vah kyon hai

निर्झर'नीर said...

जियो भाई ..इनती कडवी हकीक़त के स्वाद से आपने रु-ब-रु कराया

आपका परियास सराहनीय है .लोगों ने तो इतिहास ही बदल दिया

Rakesh Ojha said...

bahut badiya article h bhai.

i m far a lot from politics, but ye saari baate pata chalne k baad samaj aaya ki politics mein itni gandhgi(burai) kyo h.

we r with u.

unfold these type of politicians.

best wishes.

yash said...

http://www.youtube.com/user/ZoomIndianMedia#p/a/u/0/kkU7GUVGGMQ

yash said...

http://www.youtube.com/watch?v=3sAZheAgVG0&feature=related

Neelam Goyal said...

PLease read this also on The Nehru-Gandhi dynasty Dirt and Scandals

http://forum.santabanta.com/showthread.htm?t=120291

JANU said...

AAP NE JO KUCH LIKHA HAI USE AAJ KI ELOCTRENIC MIDIYA KO UJAGAR KARNA CHAHIYE JISHSE LOGO KA GANDHI PARIWAR KE BAREME BHRAM DUR HO SAKE AUR GANDHI PARIVAR KE CHAPLUSO KI AANKH KHUL JAY AAP KA PRAYASH SARAHNIY HAI........

Dev said...

ye bilkul dimaag main bijli dauda dene wala blog tha main apne rom rom se aapko dhanya waad deta hu ki aap waha pahuchey jaha koi na pahucha main din par din aapka fan hota ja raha hu..aapne jo tathya samne rakhey wo ek dum sach hain inmei se kaafi maine pehle bhi sunei thei but wo gangadhar wali baat..i have no words..

priynka gadhi ke mamle main ek baat jo mujhe raksha bhawan ke sarakari driver se pata chali ki inki kartoot kya thi or kyu shaadi robert se kin halato main hue..ye pregnent ho gayi thi pehle hi or raul baba ka tagda virodh hua tha jab kam % par bhi unka dakhila sabse badei cllg main hua sports kotei ke naam par.. he ws d eye witness or priynka ka bachha shaadi ke kuch hi mahino baad hua..

ywe sab in mahan khandan walo ke maahaan -2 kaam hain..raul baba din main kurta or raat main kya pehen ke nikaltey hai is par media chup rehta hain..

bt thanks to you sir ji..u r great

राव एसोसिएट्स said...

Yadi yah satya hai to behad sharmnak baat hai

हिन्दुस्तानी said...

बहुत बढिया सुरेश जी,

इतना बढिया लेख ओर इतिहास मैं दर्ज होने के कारण हम सभी वंचित ?

ओर इस आँखे खोलते लेख से ये भी पता चलता है की क्यों ये नेहरु खानदान भारत ओर भारतीयता से इतना चिडता है ओर सदैव इसे समाप्त करने के ही प्रयासों मैं लगा रहता है ||

धनवाद जो अंग्रेजी से हिंदी मैं रूपांतरित कर हम हिंदी भाषियों मैं साझा किया ||

हरीश चारण said...

धन्यवाद भाईसाहब,पर ये बताओ कि क्या कभी क्लास ६ से १० की इतिहास की किताबों में ये सब आयेगा कि नहीं? इस जानकारी का क्या किया जा सकता है ?

Amit said...

Thanks you sir !

Waise ye sab maine English main bhi padha hua hai aur aaj aapki krapa se Hindi main bhi padh liya. Lekin jab maine Enghlish main padha tha tabh bhi soch raha tha aur ab bhi ki ye sab desh ki janta jo ki gaon main basti hai tak kaise pahunchaya jaye taki en pakhandiyon ke vote dene wali janta ko pata chale ki vo kya kar rahe hain. Aur rahi bat Mohandas ke sach bolne ki to us par poora ek granth likha ja sakta hai. Agar sab kuch sach hota to Indian Currency par, Netaji Subhash Chandra Bose, Saheed Bhagat Singh, Chandra Shekhar Azad ki picuture hoti.

रंजना said...

उफ़ !!! दिमाग के सारे तार झनझना गए....

बहुत बहुत आभार आपका...

Anonymous said...

संघियों के पास और कोई काम नहीं बचा है। दूसरों के चरित्र पर उंगली उठाने वाले और काली टोपी पहनने वाले अपने संघ की ओर झांको। आतंकवाद फैला रहे हो। तूम्‍हारी वजह से इस देश का हिन्‍दू आतंकवादी कहलाएगा।

KUNAL said...

जो सत्य है वह किसी ना किसी रुप मे प्रकट होता ही है।
बहुत सारा सच ऐसा है जो सामने नहीं आ सका है। क़ानूनी रूप से मान्य सबूतों के अभाव में वे बातें सार्वजनिक करना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन कभी-न-कभी वह सच सामने जरूर आएगा। और जिस दिन वह सच जनता के सामने आएगा, लोग इतिहास की किताबों में से उस घराने के हुक्मरानों के नाम नोंच-नोंचकर फेंक देंगे।

आगे भी लिखते रहें। बधाई।
बहुत बहुत आभार आपका...

ASHISH KAMAT said...

मुझे तो ये लगता हैं के ये सब सोनिया बेबी के कारनामे हैं की राहूल गाँधी को पम बनाये | खैर यह तो वक्त बताएगा |
मैं तो नहीं चाहता राहूल पम बने |

Ashok Soni said...

Thanx
Lot of thanx
kyaa tarif kare aapki shabd nahi mil rahe hai.
isi tarah likhte rahiye...

kamal k. jain said...

sir aapka prayas kafi achcha laga
ek sujhav hai
apne har article ke sath use share karane ke liye facebook, twitter ke sharing tool bhi jode.
isse na keval aapke prayaso ko sambal milega balki bahut se log sach se rubaru bhi ho payenge

SUNDER KARALIA said...

KGB NE BHI KAHA THA KI SONIA CIA AGENT HAI. AB INDIA KA KYA HOGA.MAR GAYE

HC said...

SUresh ji Nice work ,

gr8 info ,

Kahane wale shayad ise Aakshep kahen, but Seems much true as by the actions of these people

anuj mishra said...

desh ka durbhagya hai ki aise logon ke hathon hai. aankehin khol dene wala lekh.

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

itni saari jankari muhaiya karwane ke liye bahut bahut dhanyawad.. itna kuchh jankar bhi Gandhi parivar ke andh bhakto ki ankh na khule to ye Bharat ki badnashibi hi kahi jayegi.. Sochiye aaj hamara desh chalane wale aur Bhawishya samjhe jane walo ki asliyat kya hai..

blogtaknik said...

सोनिया गाँधी के विषय में कही पढ़ा था की वो पहले भारत के खिलाफ जासूसी में भी फंश चुकी थी और नेहरुजी के तो ठाठ ही निराले थे एक अंग्रेज की बीवी के साथ सम्बन्ध थे जिससे एक लड़की भी पैदा हुई थी. राज तो अभी और भी है इसे राज नहीं दुर्भाग्य कह सकते है दुर्भाग्य के किसे भी और भी है.

Anonymous said...

बहुत खूब सुरेश जी...क्या कोई वकील जनहित याचिका दायर करके सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर सकता है? ये देशहित के लिए बहुत जरुरी है..और हां नेहरु-अडविना के अवैध प्रेम प्रसंगों पैर भी एक लेख हो जाए.....!!

I and god said...

I and god said...
श्री जी ,

आप बहरी कोम के आगे नगारा बजा रहे हैं. फिर भी साधुवाद.

सब सच है , इसीलिए तो चाचा नेहरु , जो योवन रोग से मरे, उन्होंने कहा था ,

I am Hindu… by accident. यानि , में हिंदू दुर्घटना से हूं.

यह कहा कर उन्होंने अपनी माता को गाली दी है.



”Source: ‘Reminiscences of the Nehru Age’ by M. O. Mathai
(This book is banned by Congress Government)I am Hindu… by accident - Jawaharlal NehruTo talk of Hindu culture would injure India’s interests. By education I am an Englishman, by views an internationalist, by culture a Muslim, and I am a Hindu only by accident of birth.

पर कुछ भी कहो ब्रदर , कुछ तो है इस खानदान में , कि ६४ सालों से एक खानदान ही राज कर रहा है.

बरे बरे नेता , कोंग्रेस , और विपक्ष में हो कर मर गए, और बहुत से जिन्दा हैं, पर सबकी जान सांसत में ही रहती है.

इतने बहादुर बाबा रामदेव को भी दिल्ली से तरी पार कर दिया.

इसे कहते हैं इटालियन ट्रेनिंग.

सौरी मैडम जी, मैन तो छोटा सा मजाकिया बच्चा हूं, मुझे माफ करना जी, में

10/6/11 1:14 AM


i and god said...

सौरी मैडम जी, मैन तो छोटा सा मजाकिया बच्चा हूं, मुझे माफ करना जी, में तो आपका छोटा सा मजाकिया बच्चा हूं.

बाबा के पास तो छुपने की जगह भी है मेरे पास कुछ भी नहीं.

अरे कोई बताये, लिखा हुआ कैसे , मिटाया जा सकता है.

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

इसे कहते है, छुपा हुआ सत्य।

Dr. shyam gupta said...

बहुत सही ---- मोतीलाल के पिता अपने साथ छुपाकर बहुत सा धन भी आगरा ले गए होंगे ...मोतीलाल आगरा के गोकुलपुरा , राजा की मंडी..में रहते थे एवं उस समय हाईकोर्ट आगरा में थी जहाँ वे वकालत करने लगे....हाईकोर्ट अलाहाबाद जाने पर परिवार वहाँ शिफ्ट होगया ...

Anonymous said...

Suresh Ji thanks for this valuable knowledge. The people of India is still very unknown to this bloody truth. The so called "Dynasty of Nehru" is nothing but a gathering of bloody rascals.

Jai Hindu said...

बहुत अच्छा सुरेश जी !
इंग्लिश न जानने बालो को आपने बहुत ही अच्छा लेख उपलब्ध कराया है हम आप से आशा करतेह है की यु ही आगे भी आप हमारा इसी तरह ज्ञान वर्धन करते रहेंगे !
बहुत बहुत dhanyabad !

Robin Rana said...

सुरेश जी आपको सधन्यवाद जो आप राष्ट्र के उन यूवाओ को प्रेरित कर रहे हैं जो इस गंदे राजनितिक समूह का हिस्सा बन चुके है उम्मीद है की उनकी आखें खुल चुकी होंगी वन्दे मातरम

डॉ. हरिओम पंवार - वीर रस के कवि said...

sach se rubru hone ko betab hain sab, sadhuvad aapko itni mahtvpoorn sachchai ke liye

Anonymous said...

its shocking!!!!
if all of this is true then people must think about our leaders and their leadership.
also they must try to bring transparency in the system.

we have a good information about american president obama's life but what about our own nation's leaders.

A Soul In Exile said...

The details are known to me. But during my earlier days if life I was always wondering how a Kashmiri Pandit JL Nehru accorded special status to J and K. Was he blind by intellect. I had been trying to find Nehru's ancestral home in Kashmir but could not. How could I? He was a muslim, a typical Ghazi. I am from Kashmir, Kashmiri Pandit (A Soul-In-Exile). Even today my community members consider him among one of their own and take pride while mentioning his name. Such is the level of ignorance among people. Good the piece has been translated into Hindi, so that Hindi speaking brethren of mine will also come to know how we are being deceived and made to believe that we are being governed by own people. But the reality is quite contrary. Hindu's and Hinduism is under siege from every corner. Be it Arab world, Vatican, Vatican controlled Media, NGO's, Sickular Polity and sold-out bureaucracy. till now they have been successful and I hope a day will come when there will be true nationalistic party at New Delhi, who will work for India, India and India only. Jai Bharat.

satyendra said...

बहुत बढ़िया लिखो खूब लिखो नंगा कर दो इस सरकार को. बहुत बड़े बड़े गंदे चरित वाले लोग हैं इस सरकार में हैं. आपका लेख बहुत सराहनीय है| कृपया अपने लेखो में सब भारत की सच्चाई उड़ेल दीजिये .

Anonymous said...

Kamina parivar...sub ayyash hain saale...kute ki maut marenge sub ke sub ....

Anonymous said...

congress ki gandgi ke charche to bahut sune they,,,,but dis time.....its EXRTEME.....BRAVO MAN,,,,KEEP IT UP..HATS OF!!!

Manu Tripathi said...

ha ha ha correct.
manu

Anonymous said...

kya sikhu. . . Aesi baat padh kar bas yahi lagta he. . . Agar hum thik hote na to na mughal hum pe raaj krte or nahi angrej. . . . Mjhe oro ka ni pata. . Magar me apne desh or dharam k liye acha krta hu or karunga. . . .kya sikhu. . . Aesi baat padh kar bas yahi lagta he. . . Agar hum thik hote na to na mughal hum pe raaj krte or nahi angrej. . . . Mjhe oro ka ni pata. . Magar me apne desh or dharam k liye acha krta hu or karunga. . . .

Anonymous said...

bhai sahab mere vichar se iski ek kitab banakar desh bhar mein batni chahiye

SEO New York said...

bhai sahab bahut khoob, baaki saari cheej to padhi hui thi, bas ye jo GANGADHAR ji kamal kar gaye, inka aaj hi pata chala hai, filhal to ye MEDIA may aa nahi sakta, but haan agar MEDIA may aa jaae to bahut khoob rahega.. Abhi filhal to koi kuch kar hi nahi sakta, Abhi isme ek aur cheej reh gayi hai RAHUL GANDHI ne bhi apne hi party ke ek sansad ki ladki ka rape kiya hai...

http://www.ndtv.com/article/india/questions-over-rahul-gandhi-s-charges-of-rape-in-greater-noida-106848

abhishek said...

suresh ji nice attempt in hindi. well,for me this was not a shock at all. i knew most of the details except for gangadhar part. there are other details which are worst and damaging for this family, which is missing in your article.

if you are interested in knowing more about this dynasty, watch videos of Shri RAJIV DIXIT AND also DR.SUBRAMANIAN SWAMY.

विचारशील राजनैतिक मंच said...

इतिहास को जानकार आने वाले भविष्य में गलतियाँ ना करने के लिए वातावरण तैयार करना ही बौद्धिक वर्ग के लिए चुनौती है . समय की इस कसौटी पर खरे उतरना होगा और एतिहासिक गलतियों का जितना हो सके सुधार करना होगा . ऐसे में जित्र्ना ज्यादाविचार किया जायेगा जितनी अधेक्क चर्चा की जाएगी और जितना धैर्य से दूसरे पक्षों को सुना जायेगा , ईमानदारी रखी जाएगी , उतना ही समाधान आसन होगा, क्योंकि राजतन्त्र से निकलकर सीधे लोकतंत्र का प्रवेश मिलने पर भौतिक सम्पदा पर अधिकार जताने का अवसर पाने पर सभ्यता, संस्कृति, धर्मं, संवेदना सभी विकृत हो रहे हैं . इस्सिलिये कठिनाई ज़रूर होगी, बद्धिकता का परिक्षण है ये..

dinesh said...

आपका लेख अच्छा लगा बहुत कुछ जानने को मिला .....और लिखते रहिए ।

nagourcity said...

BAHUT ACCHA LAGA HAI, SAYAD ABB FACEBOOK OR YAI INTERNET KE SOCIAL NETWORK APNE SOYE HUYE DESH KO JAGHA SAKTE HAI...jai hind...!

Anonymous said...

जो बात हम जानते नही थे,वही बात आप लिख कर बहुत ही अच्छी काम किया । जो लोग English का कीताव पड़ नहीं सकते ऐसे लोग केलिए आपने बहुत खुब ही अच्छी काम करके दिखाया इसीलिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।आप इसी प्रकार लिखते रहिए॥"भारत माता की जय"

Anonymous said...

All fabricated and fake comments written , it has no authenticity and clearly it shows its a rage of some one to defame nehru family however these so called "facts" were also baseless , writer could not put any valid reason to fortifies his statements , all rubbish.

मनमोहन "सिंह" said...

ये देश के गद्दार हैं .....पर क्या करें इन्हें हमारे ऊपर थोप दिया गया इससे बड़ा इस देश का दुर्भाग्य नहीं हो सकता

जय आर्य जय आर्यावर्त said...

मैंने कहीं कहीं सुना था लेकिन आज पूर्णता से जितना आपने जनाया है जाना आगे भी जहायें

कट्टरपंथी महाकाल का दास said...

दरअसल ये नीच लोग काबिल नहीं है, बल्कि जनता मुर्ख है,
जब कोई पिता अपनी पुत्री का विवाह करता है तो जमीन खोद का सारी जानकारी
प्राप्त करता है, मगर देश की बागडोर किसी नीच के हातो सौपते समय ये नहीं सोचता है..
खैर गर हम दूसरों से उम्मीद लगा बैठे गे अपने घर की सुरक्षा की तो वो
हमारी बहु बेटी की इज्ज़त इसी तरह से लुटे गा जैसे इस नेहरु खानदान ने लूटी है
जय माँ भारती

Anonymous said...

kutte kyon jhoot bolta hai

Anonymous said...

bhartiya itihaas ko janana bahut jaruri hai varna hum log aise hi bevkuf bante rahenge Gandhi Nehru kk chakkar me

Anonymous said...

प्रिय भाई चिपलूंकर जी भाई इस तैमूर+चंगेजी वंश की बेहद रोचक एवम ध्माकेदार प्रस्तुति के लिए बधाई भारत का यह दुर्भाग्य ही है की संकर नस्ल के माफिया गिरोहों के हाथों की यह कठपुतली बना हुआ है और अब तो हद ही हो गई है अपने सगे वाले अब्बा लोगों को और भी खाश बनाने की मुहिम चालू आहे :)

Anandashri Mahant said...

सत्यमेव जयते ना अनृतम्.......

Anonymous said...

http://in.answers.yahoo.com/question/index?qid=20080121154502AAqH0ww

Anonymous said...

Jai ho Baba Nathu ram Godse ki, Sahi kaha tha unhone apni last statement mein, ki Aaj Shayad kuh log mujhe galat samjhein par itihas gawah hoga ki unhone jo kiya wo bilkul sahi tha... Hatsoff...

Anonymous said...

Suresh ji,

Padhke bahut khushi hui, maine ye sab Hindutv ki shakti aur kai blog par padh rakha tha. Aaj aap ka lekh par ke man ko shanti mil gayi ki chalo ek aadmi aur mila jo yein jaanta hein.

Bahut bahut Dhanyabaad.

Aise hi likhte rahe aur log ko jhute itihaas se bachaye.

Dhanyabaad

Anonymous said...

Hats Off! sir ji


Brajendra Shukla

Anonymous said...

very nice keep writting plz.
brajendra kr shukla

ramanuj tidke said...

dhanyawad sir

Dr.Gaur said...

Electronic media will never do what you want. They didn't even gave news of Owaisi initially. All rascals. All of them. Press is not free. Circulation could be done by social sites and RSS and other channel that has given complete recording of Ovaisi's speech.