Tuesday, April 17, 2007

नई दिशा

एक बार एक युवक किसी गाँव में पहुँचा, जहाँ गधों का मेला लगा था । उसने एक गधा पसन्द किया और पाँच सौ रुपये अग्रिम देकर किसान से बोला, मैं कल आकर यह गधा ले जाऊँगा । अगले दिन जब वह वहाँ पहुँचा तो किसान बोला कि गधा तो मर गया, और मैं आपके पैसे भी नहीं लौटा सकता, क्योंकि वह तो मैने खर्चा कर दिये । खैर, उस युवक को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन वह बोला, ठीक है मरा हुआ गधा ही मेरी गाडी़ में लदवा दो । किसान बोला, मरे हुए गधे का क्या करोगे ? युवक ने कहा देखते जाओ...। कुछ दिनों बाद वही किसान शहर गया तो उसने देखा कि वही युवक बहुत अमीर बन गया है । उसने पूछा कि ऐसा कैसे हुआ ? युवक ने कहा - उसी मरे हुए गधे की बदौलत । किसान बोला- वो कैसे ? युवक ने बताया - उस मरे हुए गधे के लिये मैने सौ-सौ रुपये के लॉटरी के टिकट यह कहकर बेचे कि "सिर्फ़ सौ रुपये में हट्टा-कट्टा गधा लॉटरी में जीतिये", हजारों लोगों ने सौ-सौ रुपये के टिकट खरीदे और मुझे भारी मुनाफ़ा हुआ । किसान बोला - लेकिन जिसने लॉटरी में गधे का इनाम जीत होगा, क्या उसने मरे हुए गधे को लेकर कोई शिकायत नहीं की ? युवक बोला - बराबर की, बल्कि खूब झगडा हुआ कि यह तो मरा हुआ गधा है । फ़िर मैने उससे माफ़ी माँगते हुए उसके सौ रुपये वापस कर दिये, और बाकी के हजारों रुपये मेरी जेब में !
यही युवक आगे चलकर हर्षद मेहता बना, और उसने भारत को एक "नई दिशा" दी.... उसी दिशा का अनुसरण करते हुए अब लाखों युवक मुम्बई, दुबई, शारजाह और जाने कहाँ-कहाँ बैठकर लाखों कमा रहे हैं, टिकट खरीदने वाले बेवकूफ़ बन रहे हैं और मरा हुआ गधा पुनः भुस भरकर बांग्लादेश रवाना कर दिया जायेगा, अगली कमाई के लिये....

1 comment:

yunus said...

सुरेश जी
नेहरू गांधी राजवंश पर जो जानकारियां आपने दीं, वो मेरी उम्र के लोगों को नहीं पता होंगी । मेरे पिता अपने समय के कई रिफरेन्‍स बताया करते हैं । ये कमाल का दस्‍तावेज है । बहरहाल
धन्‍यवाद मुझे भेजे संदेश के लिये । आपने मेरी तस्‍वीर नई दुनिया में देखी होगी, सुधी श्रोता और पाठक जो हैं आप । इस चिट्ठे पर मन की बहुत सारी बातें करने की तमन्‍ना है, देखिये ना इसी बहाने आपसे संपर्क हो गया, मुझसे संपर्क करने के कई तरीक़े हैं मेल पर yunus.radiojockey@gmail.com
या फिर yunuskhanvividhbharati@yahoo.co.in
तो फिर जोड़ लीजिये संपर्क के तार । एक बार फिर धन्‍यवाद यूनुस