Sunday, April 1, 2007

Reservation in Education and Job in India

आरक्षण : आ....क थू 

(१) गत वर्ष मेरे भतीजे को AIEEE में 142 अंक मिले जबकि उसके आरक्षित वर्ग के दोस्त को मात्र 48 अंक, लेकिन 142 अंक वाले को काऊंसिलिंग तक के लिये नहीं बुलाया गया, जबकि 48 अंक वाले को लगभग मनचाहे विषय में BE करने की पात्रता मिल गई...

(२) गत वर्ष के IIT Entrance के आँकडों के अनुसार जितने अंकों पर आरक्षित वर्ग को 10 वीं रैंक मिली है उतने ही अंक यदि सामान्य वर्ग के छात्र के हैं तो उसकी रैंक होगी 3800 वीं...इतना अन्तर सिर्फ़ आरक्षण के कारण है और यदि आरक्षण नहीं होता तो वह नालायक कभी इंजीनियरिंग कॉलेज में घुस भी नहीं पाता...

(३) सुमन गत बीस वर्षों से एक सरकारी ऑफ़िस में एलडीसी के पद पर कार्यरत है, जबकि मात्र पाँच वर्ष पहले नौकरी में लगी उसकी जूनियर चार प्रमोशन पाकर उसकी बॉस बन गई है, सिर्फ़ इसलिये कि वह आरक्षित वर्ग से है (ये और बात है कि उसे अंग्रेजी का एक पत्र ड्राफ़्ट करना नहीं आता)..प्रतिभा और विभागीय कार्य जाये भाड में...

ऐसे हजारों-लाखों उदाहरण गिनाये जा सकते हैं.. लेकिन क्या किया जा सकता है ? जब २१ वीं सदी में सत्ता ही जन्म के आधार पर प्रतिभा को लतिया रही हो.. तब क्या रास्ता बचता है ? आरक्षण समर्थकों का एक तर्क यह होता है कि आरक्षण से सामाजिक समरसता बढेगी (?).. क्या ऐसे ही बढेगी ? यदि मैं मेरे भतीजे की जगह होता तो अपने दोस्त के प्रति मेरे मन में हमेशा के लिये एक विषमता जन्म ले लेती..कि मैं इससे ज्यादा प्रतिभाशाली हूँ फ़िर भी यह मुझसे आगे निकल गया तो फ़िर मैं क्यों इसके प्रति सदाशयता दिखाऊँ ? सुमन अपना कार्य ईमानदारी से क्यों करे, जबकि उसे मालूम है कि उसकी बॉस में इतनी भी अकल नहीं है कि वह उसके सामने सर उठाकर खडी हो सके, लेकिन वह मन मसोस कर उसके आदेश मानती है... और मसोसे हुए मन और कुचली हुई प्रतिभायें सामाजिक समरसता का निर्माण नहीं किया करतीं... लेकिन यह बात नेताओं और आरक्षण समर्थकों के कानों तक कौन पहुँचाये ? वे तो समाज को खण्ड-खण्ड कर देना चाहते हैं.. और नेताओं की बात छोड भी दें तो आरक्षण का एक्मात्र उद्देश्य लगता है... "बदला"...सवर्ण वर्ग के किसी छात्र के किसी पूर्वज ने कभी दलितों पर अत्याचार किया होगा उसका फ़ल उसे आज भुगतना पड़ रहा है..क्या इससे समरसता बढेगी ? दलितों पर अत्याचार हुए हैं यह एक कडवा सत्य है, लेकिन उसमें आज के प्रतिभाशाली युवा की क्या गलती है ?

लेकिन वह अपने पूर्वजों की गलतियों को ढोने पर मजबूर है, ठीक वैसे ही जैसे कि वह भीषण जनसंख्या के दुष्परिणामों को भुगत रहा है, जाहिर है कि उसमें भी उसकी कोई गलती नहीं है । इस घृणित खेल में सबसे अधिक नुकसान हो रहा है गरीब.. या कहें मध्यमवर्गीय सामान्य वर्ग के छात्रों का...। मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं अपने बेटे को किसी महँगे (आजकल तो सभी महँगे हैं) कॉलेज में पैसे के बल पर एडमिशन दिलवाऊँ.. और प्रतिभा के बल पर तो वह कहीं स्थान पा ही नहीं सकता.. तो मेरे बेटे के लिये क्या रास्ता बचा ? लोगों ने Monster.com का विज्ञापन देखा होगा जिसकी "पंच लाईन" है "Caught in a wrong job" ठीक यही सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों के साथ होने वाला है.. जबकि कोई प्रतिभाशाली इंजीनियर कहीं तेल बेच रहा होगा.. या कोई होनहार भविष्य का वैज्ञानिक किसी गाँव में सरपंच की चाकरी करते हुए मास्टरी करता होगा... या IIM की प्रतिभा रखने वाला कोई लडका कहीं मैकेनिकगिरी में लगा होगा... यही हो रहा है.. लेकिन सुनेगा कौन ? सबको तो अपनी-अपनी जाति की पडी है.. सब पिछडे़ होने के लिये मरे जा रहे हैं..और नेता मरे जा रहे हैं अपने वोटों के लिये और निजी क्षेत्र के दरवाजे भी हमारे मुँह पर बन्द करने में..। मेरे पास तीन "M" (Money, Muscle, Manipulation) में से एक भी नहीं है, तो मैं भी अपने बेटे से कहूँगा कि यदि उसके आरक्षित वर्ग के कई दोस्तॊं से ज्यादा अंक पाने के बावजूद उसे किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता.. तो दाऊद या बबलू गैंग का रुख कर.. कम से कम वहाँ "प्रतिभा" की कद्र तो होगी...

सुप्रीम कोर्ट से जूते खाने के बावजूद जैसा कि हमेशा होता आया है अब हमारे नेता (?) अध्यादेश के जरिये अपनी बात थोपने की कोशिश करेंगे, और सुप्रीम कोर्ट के हाथ बाँध दिये जायेंगे और सवर्णों.. विशेषकर गरीब सवर्णों की प्रतिभा की भ्रूण हत्या करके खुशी मनाई जायेगी । सुप्रीम कोर्ट इससे अधिक क्या कर सकता है... सुप्रीम कोर्ट नहीं होता तो दिल्ली में कभी CNG लागू नहीं होता, सुप्रीम कोर्ट नहीं होता तो दिल्ली के भ्रष्ट शासक और उतने ही बेईमान अतिक्रमणकर्ता बेशर्मी से कब्जा जमाये रहते और सीलिंग कभी नहीं होती.., सुप्रीम कोर्ट ना होता तो मायावती ताजमहल भी बेच खाती... ऐसे अनेकों उदाहरण हैं कि यदि सुप्रीम कोर्ट ना हो तो ये नेता समूचे देश को SEZ (Special Exploitation Zone) बना डालें.. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की भी एक सीमा है.. फ़िर हमारी नजर जाती है राष्ट्रपति पर..बात आती है अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने की तो हमारे यहाँ जैल सिंह को छोडकर कोई भी "मर्द" राष्ट्रपति नहीं हुआ जो सरकार के अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने से मना कर दे, और यदि वह मना कर भी दे तो लोकसभा में बैठे 525 गधे (या शायद 540..क्या फ़र्क पडता है) उसे फ़िर पास करके वापस भेज देंगे और फ़िर राष्ट्रपति को उस पर दस्तखत करना ही होंगे । जबकि कम से कम राष्ट्रपति ऐसा तो कर ही सकता है कि वह विवादित अध्यादेश को अनिश्चितकाल के लिये विचाराधीन रख ले.. विचार करने की सीमा पर लोकसभा की कोई पाबन्दी नहीं है इसलिये राष्ट्रपति को चाहिये कि वे अपने कार्यकाल की समाप्ति तक उक्त अध्यादेश पर "विचार" करते ही रहें... करते ही रहें.. फ़िर उनका कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात वह अध्यादेश स्वतः ही समाप्त हो जायेगा और नये राष्ट्रपति के चुने जाने और आने तक बात टल जायेगी, फ़िर से लोकसभा को उसे पास करके विचारार्थ और हस्ताक्षर करने राष्ट्रपति के पास भेजा जायेगा.. फ़िर चाहे तो अगला राष्ट्रपति उस अध्यादेश पर पाँच साल तक बैठ सकता है । जैसे वे इस वक्त वे अफ़जल के केस में उस पर कुंडली मारे बैठे हैं..उसी तरह हम गरीबों के हक के लिये वे क्यों नहीं सरकार के सामने अपनी कमर सीधी करते ?

लेकिन यदि आजादी के साठ वर्षों बाद भी जनसंख्या नियंत्रित नहीं हो पाई, प्राथमिक शाला के अभाव में चालीस प्रतिशत निरक्षर हैं, नेहरू के जमाने से पुष्पित-पल्लवित हुआ भ्रष्टाचार अब लोकाचार बन गया है.. तो इसमें आम आदमी की क्या गलती है ? सजा मिलनी किसे चाहिये और मिल किसे रही है... यही है हमारा आज का "शाईनिंग इंडिया"... यानी सो कॉल्ड "मेरा भारत महान"...

37 comments:

Sagar Chand Nahar said...

सही लेख पर दोष इसमें हमारा ही है। हम वोट देने से जी चुराते हैं। या गलत उम्मीदवार को चुन लेते हैं। जब इस तरह चुने हुए गधे ऐसा मूर्खता पूर्ण निर्णय लें तो हमें क्योंकर आश्चर्य होना चाहिये?
आरक्षण अब किसी तरह से रोका नहीं जा सकता जब तक कोई चमत्कार ना हो.... और चमत्कार कहाँ होते हैं।
अब तो चमत्कारॊं पर भी आरक्षण लगने वाला है।
हमें अब चिल्लपौं मचाना बन्द कर देना चाहिये। नियती को स्वीकार कर लेना चाहिये।

अरुण said...

बडे भाई मैने आपके वो १७ सवाल ज्यो के त्यो उठा कर महल्ले वालो से पूछने शुरु कर दिये है माफ़ी चाहता हू कि आप से अनुमति भी नही ली पर उस समय जहा से जो इक्कठा हुआ दे मारा
और घेर दिया उनको आपके सवालो के घेरे मे पर अपने नाम से आपसे पुन: माफ़ी चाहूगा और यहा पर दिये आपके सवाल भी मै वहा उठाना चाहुगा
कृप्या अब अनुमति प्रदान करे
आपका छोटा भाई
aroonarora@gmail.com
अरुण

abhinav said...

i am engineering student & i have faced the same problem. ican't get admission in IITdue to reservation. it should be removed immediately.

anitakumar said...

Suresh ji
aapne politically itne volatile issue per lekh likha sabse pehle to iske liye aapko badhaai ..verna real life mein toh her koi iske baare mein churcha kerne se derta hai kyunki jinko aarkshan ka faayada mil rahaa hai woh itne militant hain apne naye miley adhikaaron ko bachaa ke rakhne ke liye ki woh is per koi churcha bhi nahi hone dena chaahte
aur aapne jo kutch apne lekh mein kahaa woh ek dum sahi hai

amit said...

Dear Suresh,

Could you tell how many people(in percentage) are getting negative effects from reservation?

Amit B Alte

pramod said...

hindu dharma men manyata hai ki picchale janma men kiye gaye karmon ka phal agale janmon men milata hai. jo log aarkshan se pareshan hain, unhen apane pichhale janmon ki yad rakhani chahiye. jab tak suresh chiploonkar jaisi nalayak aur ghatiya aatmaon ka ant nahin hoga tab tak aarkshan jari rahega.
pramod gawali.

naveen said...

Your ideas are good. We all have seen such kind of problems in our family or neighbourhood.

Issue is how it will be solved? Somebody commented that we don't vote that's why it is happening. My question is if we vote, will the govt. change reservation rule. "Koi bhi vote bank nahi khona chahta" We have to tell politicians that we will vote u only if reservation system will be removed.

P.S. I APOLOGISE FOR WRITING IN ENGLISH. I DON'T KNOW HINDI TYPING. & I FEEL BAD WRITNG HINDI IN ROMAN.

पी.सी.गोदियाल said...

सुरेश जी, पूरा लेख पढ़ा, सही लिखा है ! और यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि तथाकथित सिस्टम के आगे हम सब लाचार है ! अफ़सोस की बात है कि गंभीर विषयों पर आज का पाठक वर्ग भी गंभीर नहीं है ! आज ही टाइम्स आफ इंडिया में एक लेख पढ़ रहा था कि आजादी के साठ बर्षो बाद भी समाज में अस्पृश्यता ज्यों की त्यं है ! फिर ये सब आरक्षण और अन्य बातो का फायदा किसे हुआ ? और जिन्हें फायदा मिला उन्होंने इस बारे में क्या किया बजाये अपनी रोटियाँ सेकने के ! जिन लोगो ने कभी जोर शोर से ये मुद्दे उठा कर अपना घर सवारा, क्या उन्हें ये लोग दोष देते है ? एससी/ एसटी कानूनों की भरमार है मगर क्या उनका सही सदुपयोग हुआ ? नहीं, हाल में बूटा सिंह कह लो या फिर उनके बेटे का केस कह लो उसे देखिये, मायावती, करूणानिधि, बंगारू लक्ष्मण अजित जोगी इत्यादि-इत्यादि ये सब इन दलितों के मसीहा है और इन्होने इनके लिए क्या किया सिवाए अपना घर भरने के ! उल्टे लोलीपोप के तौर पर आरक्षण का झुनझुना पकडा देते है, यह नहीं देखते कि इससे देश को क्या नुकशान होगा! आज जो निर्माण के क्षेत्र में इंजीनियरिंग की विफलता की वजह से जो हादसे हम देख रहे है , उसका एक कारन यह भी है कि आरक्षण के माध्यम से अयोग्य व्यक्तियों को हमने इंजिनियर बना दिया है ! आज निजी क्षत्र में भी आरक्षण की बात ये हमारे भरष्ट नेता लोग करते है, लेकिन इसके क्या दुष्प्रभाव है कोई देखने को राजी नहीं, साथ ही नियोक्ता भी इस लिए भयभीत है कि अगर यह लागू किया गया और आरक्षित व्यक्ति एक बड़ी तादाद में उनके उद्योग में घुसे तो कभी अगर छंटनी या किसी मजबूरी में निकालने की बात ई तो ये लोग एस सी /एस टी कानूनों का दुरुपयोग भी कर सकते है ! डाक्टरी पेशे में अगर आरक्षण लेकर कोई डॉक्टर बना तो क्या इलाज करेगा अप्प खुद सोच सकते है

परमजीत बाली said...

आरक्षण पर पुन:विचार होना चाहिए....आरक्षण जाति के आधार पर नही आर्थिक आधार पर हो तभी देश का भला होगा....वर्ना रब राखा।

मुनीश ( munish ) said...
This comment has been removed by the author.
मुनीश ( munish ) said...

सरकारी इदारों और तालीमी शोबे में आरक्षण के पैरोकारों से मयखान्वी पूछना चाहेता है दोस्तो के हिन्दोस्तानी फौज में आरक्षण की मांग कब उठाई जाने वाली है ? चूंकि ले-दे के जाने कैसे यही एक इदारा है जो समाजी बराबरी के इस लासानी इलाज से महरूम है । यही नहीं वहां अभी तक ऊंचे तबके के लोग ही कमान संभालते आए हैं , अब बताइए इतने बड़े सितम को जाने क्यूं नज़रंदाज़ किया जाता आ रहा है ? फौज भी तो society का अहम् हिस्सा है ! जब डाक्टर और इंजिनियर बनने से , सिविल अफसर बनने से समाजी बराबरी आती है तो कर्नल और जनरल बनने से भी यकीनन आयेगी ही । देश के लिए मरने के मामले में अब मेरिट खत्म करनेपर विचार करने का वक़्त क्या नहीं आ गया है ? जिस दिन ये सवाल देश के किसी बड़े अखबार के पहले पन्ने पे जगह पा लेगा वो दिन तवारीख में दर्ज होने लायक होगा कहिये क्या ख़याल है ?
आरक्षण मात्र मलाई खाने के लिए है ,12 बोर की गोली और १३५ एम. एम. . की मोर्टार का गोला खाने के लिए नहीं , वाह ! ये प्रश्न एक दिन हम सबको डसेगा !

मुनीश ( munish ) said...

ऐ रोना -धोना बंद करो सब लोग ! भारत की सेना में आरक्षण क्यों नहीं है ? कोई ये पूछे ,सब ठीक हो जायेगा !

SANJAY KUMAR said...

Dear Mr. Abhinav
Ref : Your comment dt. April 13, 2007
What I understand from your comment that we could not admission in IIT due to reservation system.

Suppose Cut off marks for General Category candidate was 90 out of 100, had reservation been not there, it would have lowered to 85 due to availability of more number of seats.

Are you sure your score was between 85 to 90 . If yes. How do you know?

IIT has introduced reservation for OBC but at the same time seats were increased proportionately.
Moreover, a number of IITs were opened up in recent year.

Do not try to hide your incompetency.
Work harder

SANJAY KUMAR said...

Dear Munish,

Inspite of fact there is no Caste based reservation in armed forces, you shall find a sizable number of people from Backward Castes like Jat, Gujar, Meena, Yadav, Mahar, Dusadh, Pal, kunbi, Vellala,Koorg, Ezhawa, Gangota, Dhanuk etc. They have tradition to serve in armed forces. Even they have much better representation than some of the Forward Caste like Brahmin and Kayastha.

They may not significant representation at Officer level but they have adequate representation at Soldier and artisan level

However, they are people who faces bullet first on the call of their officer

SANJAY KUMAR said...

Dear Mr. Bali,

How does reservation on economic criteria addresses the issue of "justice with merit" raised by Mr. Chiplunkar.

SANJAY KUMAR said...

Dear Mr. Godiyal,

If leaders from Backward classes has not done much to remove social discrimination, un-touchbility and other social evil, other than imposing reservation.

At your personal level, what you have done eradicate those social evil other than cursing reservation.

SANJAY KUMAR said...

Shri Chiplunkar,

On perusal of your post, I understand you vehemently support the cause of Bhoomi-putra raised by Raj Thakrey i.e. Job Vacancy in a particular State (Maharashtra) should be meant for people of Maharashtra means RESERVATION BASED ON REGIONAL BASIS. (Do you remember your Post or you want me to give reference of your own posts)

How does your opposition for Caste based reservation justifies your support for Reservation based on regionalism. What do think by providing reservation based on regional basis, can you do justice with the merit.

Let me to cite a real example, In 1996 a Mumbai based repute Public Sector Untertaking had recruited 48 Engineering Graduates as Engineer trainees for position based at Mumbai and selection was based on written examination followed by Interview. In the recruited candidate only 3 were from Maharashtra ( Please trust the fairness of recruitment process, as majority of interview panel members were Maharashtrians and the organization is dominated by Maharashtrians). Had all those positions were reserved for native of Maharashtra, people who were not capable enough to make it merit list would have been recruited and organization would have compromised with the merit.

Now second part, if the product of that company is used in all over India (rather forced to used, as that particular product was produced by only that company at their plant based at Mumbai and Private companies were not allowed in that sector in those days), why those job should have been reserved for native of Maharashtra.

In summary, why such a double standard adopted by you.

मुनीश ( munish ) said...

Mister Sanjay,
In army, every officer is a soldier first . He leads from the front . I wonder why nobody wants Mandalisation of Army ? Why nobody wants to equal the true KSHATRIYAS ? The question should haunt u in ur dreams .

SANJAY KUMAR said...

Mr Munish,

Why there is no reservation is Armed Forces?

The answer lies in the question that Why there is no reservation in Private Sector, Judicicary, IIT faculy, IIM faculty etc.

Right or Wrong,

Those who are reserved categories shall welcome reservation in Armed forces too.
From time to time the supporter of reservation raise the demand for reservation in arm forces.

Even without reservation, there are sizable number of personnel from Backward Castes EVEN IN OFFICER CADRE.
A sizable no. of Sikh Officer are from backward caste like Ramgarhia, Ghirath and you shall find a number of Jat Officers also

Rajesh Pilot, Kirori Singh Bainsala, Admiral Sushil Kumar ( A backward Class christian)are few from backward caste and served in armed forces as an officer who came in limelight because of right or wrong reasons.

Anyway, in that issue, please do not draw the controversy of Officer Vs. Soldier
At least there is unanimity in Armed forces that contribution and risk of life of officer and soldier is at par and it cannot be discounted.

Devesh said...

माफ करना आपकी पुरानी पोस्ट बहुत विलंब से पढ़ी (दरअसल यहां अचानक पहुंच गया) इसलिए प्रतिक्रिया में देर हो गई... लेकिन पढ़ा तो समझ में आया चिपलूनकर जी तो बड़े ही चीप निकले, मैं तो समझता था आप अकल की अनचाही दुकान (ब्लाग) के बेहतरीन बनिए हैं जो बदलती भगवा सोच का चरणामृत बांट रहे हैं, लेकिन आप भी उन सामंती चिरकुटों से अलग नहीं हैं, जिनके लिए देश से लेकर हिंदुत्व और प्रगतिशीलता सबकुछ केवल बेचने और लाभ कमाने की चीज है। इस ब्लाग आरक्षण आ....क थू में आप जो ज्ञान देने की कोशिश कर रहे हैं वह अकल की बदबूदार उल्टी सी सड़ांध मार रही है। शायद प्रज्ञा का पाचकतंत्र भी सामंती संस्कारों के कुअन्न को पचा नहीं पाया है। कुछ तथ्य हैं इन पर नजर ड़ालें तो आप पाएंगे कि आपके तर्क कितने दिशाहीन और बोथरे हैं।
1 भारत की कितनी आबादी अनुपयोगी है (शैक्षिक लिहाज से)
2 इस अनुपयोगी आबादी में कितने फीसदी लोग आरक्षण श्रेणी में आने वाले तबके के हैं।
3 इन अनुपयोगी लोगों में कितनी महिलाएं हैं।
4 आरक्षित आबादी के कितने लोगों को आरक्षण का लाभ मिला है और किस श्रेणी पर
5 भारत की सर्वोच्च सिविल सेवाओं के शीर्षस्थ पदों पर कितने फीसदी लोग आरक्षण से पहुंचे हैं। तीसरे और चौथे दर्जे पर पहुंचने वालों को आधार न बनाएं तो बेहतर।
6 देश की किसी भी तरह की शीर्षस्थ संस्थाओं में उच्च पदों पर जातिगत समीकरण क्या है, इसमें आप अपनी सुविधा के लिए डिब्बाबंद सुअर मांस बेचने वालों से लेकर सरकार तक सभी को शामिल कर सकते हैं।
अगर इन पर विचार करने के बाद सोई प्रज्ञा (अगर है और वाकई में सुप्त है तो, वरना जिसे हिए से नहीं उसे किए से भी क्या) जाग जाए तो या तो देशभक्त होने का ढकोसका छोड़ देना या तर्कसम्मत ढंग से सोचना कि हमारी बढ़ती आबादी आग क्यों बन रही है ऊर्जा क्यों नहीं। फिर भी कहीं कसर बच जाए तो इन बिंदुओं का ध्यान करना बात बन जाएगी।
1 जापान किस चीज के दम पर दुनिया में अपनी हस्ती बनाए हुए है?
2 इजराइल की अस्मिता का राज क्या है?
3 आबादी में आगे चीन इतना ताकतवर कैसे हो गया?

1947 से अब तक अगर शैक्षिक व सरकारी तंत्र में वास्तविक रूप से आरक्षण प्रभावी होता तो देश में साक्षरता सौ फीसदी तक पहुंच गई होती और आज हालात ये हैं कि भारतीय मस्तिष्क जिसका लोहा दुनिया मानती है, उसके दो तिहाई युवा निरक्षर हैं (इसका स्रोत संयुक्त राष्ट्र की रपट है), सोचो अगर ये सब काबिल होते तो क्या केवल आरक्षित-अनारक्षित नौकरियों के लिए रेस लगाते या रोजगार के नए क्षेत्रों और आयामों का सजृन करते हुए दुनिया की जरूरत बन जाते। अगर वैसे कुछ होता तो तकनीक या अन्य तरह के विविध ज्ञान के अस्त्रों से लैस यह युवा आज देश को किस स्थिति में पहुंचा चुके होते।
सुरेश जी अगर जोर लगाना है और वाकई देश का भला चाहते हैं तो हजारों साल से आप जैसे लोगों के सताए हुए वर्ग पर टिप्पणियां छोड़ कर यह सोचना कि अगर यह वर्ग भी किसी तरह से शिक्षित हो कर मुख्यधारा में शामिल हो गया तो आपका सामाजिक संस्तरण भले ही बराबरी पर आ जाए लेकिन देश कहां पहुंचेगा। संसद में देश का प्रतिनिधित्व करने वालों को गरियाने से बेहतर तो यह होता कि यह सोचते कि देश के युवाओं को किसी नई दिशा में जाना चाहिए न कि ठहरे हुए पानी की कम पड़ती मछलियों (नौकरियां और शैक्षणिक संस्थाओं पर आरक्षण) पर हक जमाने के लिए जातिवाद और नस्लवाद को भड़काते।

पद्म सिंह said...

देर से आने के लिए माफ़ी चाहूँगा लेकिन प्रश्न अभी तक वहीँ खड़ा हुआ है ... मेरा तो एक प्रश्न है जो मुझे अक्सर व्यथित करता है कि अगर देश में एक योग्य को हतोत्साहित कर के एक अयोग्य को डाक्टर बनाया जाएगा तो चिकित्सा की क्या स्थिति होगी ... एक अयोग्य इंजीनियर आने वाले समय के विकास को कितनी सफलता से गति दे पायेगा ये जानना सहज है ... क्या आरक्षण के पक्षधर नेता ऐसे डाक्टरों से इलाज करवाना पसंद करेंगे ? दलित वर्ग या पिछड़े वर्ग को मुख्य धरा में लाया जाय इसमें कोई आपत्ति किसी को भी नहीं होनी चाहिए लेकिन आरक्षण योग्य बनाने के लिए होना चाहिए क्योंकि Quality does matter... अच्छी से अच्छी शिक्षा और ट्रेनिंग का पक्षधर मै भी हूँ ...लेकिन एक अयोग्य प्रसाशन देश को खोखला कर के छोडेगा ... मै अपने विभाग की ही बात करता हूँ. मेरे विभाग में कई अधिकारी आज भी प्रमोशन के लिए पड़े हुए हैं जब कि उनसे दस दस पन्द्रह साल पुराने लोग उनके अधिकारी बन चुके हैं ... एक आरक्षित अधिशासी अभियंता महोदय तो आज भी किसी मीटिंग में बिना अपने जे ई को लिए नहीं जाते क्योकि उन्हें अपने अधिकारियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब जो दिलवाना होता है ... ये बात सबको पता है और इस से ऊपर के अधिकारियों में और मातहत कर्मचारियों में एक हताशा सी है ... लेकिन वो हैं कि निरंकुश और मनमाने ढंग से टेंडर और अन्य विभागीय कार्य करते हैं और अपने बसपा सांसद की शह पर किसी से भी डरते नहीं ... दुर्भाग्य है इस देश का ... आरक्षण आक् थू !!

shishir said...

chipulakar ji aapke vichar bahut sachai ko bayan karte hain.

sisir chandra said...

i wanted to write in hindi. but i am unable to get hindi link for that. i yesterday tried to send blog. but the author must give it place. if any word or sentence is seems not appropriate, that must be removed but not to all. i hope i can see my comments on the blog.
thanx

sisir chandra said...

please tell me how could i make my comments in hindi?

dschauhan said...

ऐसे आरक्षण से क्या लाभ जिसने आजादी के 63 वर्ष के बाद भी आज तक एक जाति का 1 प्रतिशत भी विकास नहीं किया है और उल्टा यह कि इसमें अन्य जातियों को भी शामिल किया जा रहा है।

Anonymous said...

Your thinking over Reservation is completely biased!! which Rashtr Nav Nirman you can do if you don't even understand the philosophy of reservation!! A completely selfish and stupid presentation of reservation!! see you later, you can't be forgiven.

suryapratap rathore said...

वाह सुरेश जी ,
आपके इस कार्य के लिए आपको धनयाद देता हु की आपने आराक्षंद पर बहुत आछा लिखा है
मेरे पास कुछ प्रशन है जो सीधे भारत सरकार पर है उन कमीनो और घटिया राजनीतिज्ञों पर है जो इस वक़्त कुर्सी पर बैठे है और पैसे छाप रहे है जो अपना इम्मान और अपनी इज्ज़त को बेचकर कुर्सियों पर बैठे है में उनसे पूछना चाहता हु की
१.क्या आरक्षण की वजह से भारत आगे बाधा है
२.क्या आरक्षण समरसता लाता है
३.क्या आरक्षण की वजह से किसी सही और सच्चे व्यक्ति का भला हुआ है
४.क्या आरक्षण की वजह से आज तक कोई सही और उच्च शिक्षा वाला इंसान खुश है
५. क्या आरक्षण हमारी जातिवाद को बढ़ावा देता है या कम करता है
६. क्या आरक्षण भारत देश में आज के आधुनिकतम युग में सही है
७. भारत स्वतंत्रता के समाया आरक्षण कितने साल के लिए लागू हुआ था सिर्फ १० साल के लिए में पूछना चाहता हु की बाद में इसे किसने और क्यों बध्वया .
८.क्या आरक्षण नेताओं की गन्दी राजनीती का एक हिस्सा नहीं है ?
९.क्या आरक्षण किसी पढ़े लिखे को रोजगार दे सकता है
१० कितने % युवा है जो चाहते है की भारत में आज भी आरक्षण लागू रहे
११ कितने % व्यक्ति है और कितने % हमारे भारत की जनता है जो इस आरक्षण के लिए वोते डालना चाहेगी .....

suryapratap rathore said...

वाह सुरेश जी ,
आपके इस कार्य के लिए आपको धन्यवाद देता हु की आपने आरक्षण पर बहुत आछा लिखा है
मेरे पास कुछ प्रशन है जो सीधे भारत सरकार पर है उन कमीनो और घटिया राजनीतिज्ञों पर है जो इस वक़्त कुर्सी पर बैठे है और पैसे छाप रहे है जो अपना इम्मान और अपनी इज्ज़त को बेचकर कुर्सियों पर बैठे है में उनसे पूछना चाहता हु की
१.क्या आरक्षण की वजह से भारत आगे बढ़ा है
२.क्या आरक्षण समरसता लाता है
३.क्या आरक्षण की वजह से किसी सही और सच्चे व्यक्ति का भला हुआ है
४.क्या आरक्षण की वजह से आज तक कोई सही और उच्च शिक्षा वाला इंसान खुश है
५. क्या आरक्षण हमारी जातिवाद को बढ़ावा देता है या कम करता है
६. क्या आरक्षण भारत देश में आज के आधुनिकतम युग में सही है
७. भारत स्वतंत्रता के समाया आरक्षण कितने साल के लिए लागू हुआ था सिर्फ १० साल के लिए में पूछना चाहता हु की बाद में इसे किसने और क्यों बढ़वाया .
८.क्या आरक्षण नेताओं की गन्दी राजनीती का एक हिस्सा नहीं है ?

अवनीश सिंह said...

i also think so. i am an engineering student . in 2008 i faced IIT - JEE exam and scored 148 marks but not got selected because the seats are reserved for these people who had not scored even 140

Balkishan said...

Mr. Snajay ke sawal
1.भारत की कितनी आबादी अनुपयोगी है (शैक्षिक लिहाज से)
2 इस अनुपयोगी आबादी में कितने फीसदी लोग आरक्षण श्रेणी में आने वाले तबके के हैं।
3 इन अनुपयोगी लोगों में कितनी महिलाएं हैं।
4 आरक्षित आबादी के कितने लोगों को आरक्षण का लाभ मिला है और किस श्रेणी पर
5 भारत की सर्वोच्च सिविल सेवाओं के शीर्षस्थ पदों पर कितने फीसदी लोग आरक्षण से पहुंचे हैं। तीसरे और चौथे दर्जे पर पहुंचने वालों को आधार न बनाएं तो बेहतर।
6 देश की किसी भी तरह की शीर्षस्थ संस्थाओं में उच्च पदों पर जातिगत समीकरण क्या है, इसमें आप अपनी सुविधा के लिए डिब्बाबंद सुअर मांस बेचने वालों से लेकर सरकार तक सभी को शामिल कर सकते हैं।


aadrniya Suresh ji
Mr. snajay ka jo post apne publish kiya hai unhe unke sawalo ke jawab aise nahi milenge Mr. sanjay ko ,90 % Govt services ke liye hue exams ke results bataiye ,or phir unhe kahiye ki jis aarkshit aabadi ki wo baat kar rahe hai jo ki un govt exam me select hue hai us ka academic record check karke ek baar unke marks ka average pata kar lijiye (((kyonki kam se kam marks to reservation based nahi milte)))) or unhe General castes se compare karwakar phir bataiyega ki aaj jis result ke baad wo sarkari damad ban gaye hai us post ke liye kisne kitni mehnat ki hai.

Mr. snajay ke sawal no. 1 aur 2 ke aankade to mujhe nahi pata lekin ((yadi aap de sake to achha hoga kyonki jo bhi haal hai wo Govt. ke corruption {{mera Govt. se matlab yaha sabhi sarkari vibhago se hai jinme ki ye reservation system se selected log pahuche hai}} ki wajah se hi hai sawal no. 3 to sanjay ne bilkul hi subject se hatkar hi poocha hai hum yaha par mahila aarkshan ke % ki baat to kar hi nahi rahe hai (((or jaha tak ladkiyon ki siksha ka sawal hai to wo aankade utha kar dekh lo ki General caste wale majduri karke bhi ladkiyon ko padha rahe he or bahut se aarkashit nimn samuday sarkari damad hokar bhi ladkiyon ko waha tak nahi padhate jisse ki sarkari naukari lage or jo padh leti hai wo lag bhi jati hai)))

Mr. Snajay ke 4 No. sawal ka jawab to unhe Govt sector ke exam result se mil hi jayega phir bhi unhe ye URL dekhna chahiye ashttp://passport.gov.in/jaipur.html see list of officers

Mr Sanjay ke 5 we sawal ka jawab inhi se poochhiye ki agar ye teesre or chhote tabke ko aadhar banane se mana kar rahe hai to bataiye ki shirshath pado par kitne % employee hai or jise ye aadhar maanane se mana kar rahe hai un pado par kitne %. kya tark sharto ke aadhar par kiye jaate
hai????

unke 6 no. ke sawal me unse ye poochhiye ki kya jin shirshath pado ki ye duhai de rahe hai wo pad puri tarah se General ke liye reserved hai ??? nahi wo nahi hai un pado par wo apni mehnat se pahuche hai or yadi Mr. Snajay use mehnat nahi or corruption mante hai to unko kahiye ki jaakar private sector ke Manager level ke aankade banaiye kyonki Private sector kam se kam abhi tak to Mehnat or output se chalta hai ((us level par)))

Please suresh ji aap bhale hi yeh post publish naa kare lekin Mr. snajay or un jaise aarkashan ke pakshdharo ke sawalo ke jawab jaroor de !!!!
Dhanywad

MADAN LAL said...

DEVESH,PRAMOD JI AAP SAHI KAH RAHE HAI ,JO LOG YE DEKH RAHE HAI KI RESERVATION KI VAJH SE UNHE SAFLTA NAHI MILI..MAHAJ SIRF AAP APNE BARE ME SOCH RAHE HAI .JARA UNSE JAA KER PUCHIYE JO PAISE KI VAJAH SE PICHE RAH JATE HAI.. UNHE HER EK SAMAY APNA AUR APNE PARIVAR KE BARE ME SOCHNA PADTA HAI..JAB GARIB AADMI KE PAS ROTI ,KADPDA ,MAKAN JAISE MULBHUT SUVIDHYE HI NAHI MIL PATI TO WO AAGE KYA SOCENGE..AAP KAHTE HAI KI UNKI KNOLEDGE KAM HAI...GENERAL CATGORI SE ..KYU GENERAL CAT ME SABHI PANDIT HAI..JO LOG RESERVATION KO KHATM KARNE KI BAT KER RAHE HAI WO SWAYAM SE PUCCHE ...
AAP KO RESERVATION SE PARHEJ NAHI KARNA CHAHIYE BALKI UN PAHLUO PER DHYA DENA CHAHIYE ..YE PRASN GOVERMENT SE KARNA CHAHIYE KYU AAZZDI KE BAD BHI RESERVE CATG. KE LOG DEVELOP NAHI KER PA RAHE HAI...
MAI YE PUCHNA CHAHTA HU KI KYU AAP KE 142 MARK HONE KE BAD BHI NAHI BULYA GYA....KYU 48 NO.KE AAP KE DOST KO BULYA GYA ......
JARA DHYAN SE SOCHIYE ....
IS SE AAP ANUMAN LAGA SAKTE HAI KI ...AAP ME USME KITNA ANTER HAI...RESERVE CATG. NICHE SE UPER BAD RAHI HAI...
UN LOGO KO JARA BHI NIRAS NAHI HONA CHAHIYE ...UNHE UNKE BARE ME SOCHNA CHAHIYE JINHO NE CHALNA SURU KIYA.....JAB BHI AAP SOCHE TO YR JARUR SOCHE KI AAP KA SAMNE..
10 {UR} ASAFAL LOG RESERVE CATG KE 100{RESERVED} CATG KE BARABER HAI...
JIS DIN YE RATIO BARABER HO JAYEGA US DIN RESERVATION KI KOI JARURAT NAHI HOGI...
YE KAHNA GALAT HOGA KI EK RESERVE CATG KI VAJH SE MERA ADMISSON NAHI MILA, NAUKRI NAHI MILI...YE AAP HI KI DEN HAI ..AGER UNHE PAHLE SE UNHE DOOR NAHI RAKHA GYA HOTA, TO AAJ KABHI RESERVATION KI JARURAT NAHI PADTI..AAP YE MAT GINE 65 YEARS HOGYA ,YE DEKHE IN SALO ME UNKA KITNA VIKAS HUA...

MADAN LAL said...

DEVESH,PRAMOD JI AAP SAHI KAH RAHE HAI ,JO LOG YE DEKH RAHE HAI KI RESERVATION KI VAJH SE UNHE SAFLTA NAHI MILI..MAHAJ SIRF AAP APNE BARE ME SOCH RAHE HAI .JARA UNSE JAA KER PUCHIYE JO PAISE KI VAJAH SE PICHE RAH JATE HAI.. UNHE HER EK SAMAY APNA AUR APNE PARIVAR KE BARE ME SOCHNA PADTA HAI..JAB GARIB AADMI KE PAS ROTI ,KADPDA ,MAKAN JAISE MULBHUT SUVIDHYE HI NAHI MIL PATI TO WO AAGE KYA SOCENGE..AAP KAHTE HAI KI UNKI KNOLEDGE KAM HAI...GENERAL CATGORI SE ..KYU GENERAL CAT ME SABHI PANDIT HAI..JO LOG RESERVATION KO KHATM KARNE KI BAT KER RAHE HAI WO SWAYAM SE PUCCHE ...
AAP KO RESERVATION SE PARHEJ NAHI KARNA CHAHIYE BALKI UN PAHLUO PER DHYA DENA CHAHIYE ..YE PRASN GOVERMENT SE KARNA CHAHIYE KYU AAZZDI KE BAD BHI RESERVE CATG. KE LOG DEVELOP NAHI KER PA RAHE HAI...
MAI YE PUCHNA CHAHTA HU KI KYU AAP KE 142 MARK HONE KE BAD BHI NAHI BULYA GYA....KYU 48 NO.KE AAP KE DOST KO BULYA GYA ......
JARA DHYAN SE SOCHIYE ....
IS SE AAP ANUMAN LAGA SAKTE HAI KI ...AAP ME USME KITNA ANTER HAI...RESERVE CATG. NICHE SE UPER BAD RAHI HAI...
UN LOGO KO JARA BHI NIRAS NAHI HONA CHAHIYE ...UNHE UNKE BARE ME SOCHNA CHAHIYE JINHO NE CHALNA SURU KIYA.....JAB BHI AAP SOCHE TO YR JARUR SOCHE KI AAP KA SAMNE..
10 {UR} ASAFAL LOG RESERVE CATG KE 100{RESERVED} CATG KE BARABER HAI...
JIS DIN YE RATIO BARABER HO JAYEGA US DIN RESERVATION KI KOI JARURAT NAHI HOGI...
YE KAHNA GALAT HOGA KI EK RESERVE CATG KI VAJH SE MERA ADMISSON NAHI MILA, NAUKRI NAHI MILI...YE AAP HI KI DEN HAI ..AGER UNHE PAHLE SE UNHE DOOR NAHI RAKHA GYA HOTA, TO AAJ KABHI RESERVATION KI JARURAT NAHI PADTI..AAP YE MAT GINE 65 YEARS HOGYA ,YE DEKHE IN SALO ME UNKA KITNA VIKAS HUA...

Anonymous said...

lekh pasand nahi aaya suresh ji daud ya bablu gang me shamil hone ki jaroorat nahi hai ish field me utna paisa nahi hai jitna dharmik karyon me hai to kyon na koi baba , pujari bana jaye mandiron me jitna dhan hai utna to kahin nahi hai. aap kehte hai ki arakshan ne samaj ko batne ka kaam kiya to galat hai samaj to bahut pehle hi bat diya gaya bramhan chatriya aur shudrya ke roop me . aur ye kyon bhool jate hai ki yadi aaj sawarn samaj janha bhi hai uske piche bhi to ak tarah ke arakshan kam kar raha hai bramhan hi pujari hoga aur shikha samadhi karya karega aisa kyon kaha gaya hamare grantho me kyon aap ne is arakshan ka virodh nahi kiya thik hai pehle log shikshit nahi the pujari ka karya nahi kar sakte the per aaj kya aap ish arakshan ke khilaf hai. aur ek baat yadi bramhan samaj ko shiksha sambandhi karya diya gaya tha to kyon samaj shiksha se itni door raha. problem ye hai sir ki hame kewal apne fayede ki baat hi sahi lagti hai.

Gaurav Misra said...

आदरणीय चिपलूनकर जी,
आरक्षण और राजनीति के विषय में आपके विचार पढ़े, जहां एक तरफ राजनीति के विषय में आपके मत को पढ़ कर ख़ुशी हुई वहीँ आरक्षण के प्रति आपकी सोच/विचारधारा/मानसिकता को जानकर अत्यंत खेद भी हुआ|
महोदय आपको याद दिलाने की आवश्यकता नहीं है कि दलितों को आरक्षण केवल इस कारण मिल रहा है क्योंकि हमारे ही पूर्वजों ने उच्च जाति का तकाज़ा देकर उनके साथ अत्याचार किये हैं| शायद आपने अपनी अवधारणा महानगर में बसे लोगों को देख कर बना ली, आपका कोई दोष नहीं है...जो प्रगति कर चुके हैं उन्हें आरक्षण देना गलत है...लेकिन क्या आपने भारत की उस आधी से ज्यादा आबादी के बारे में सोचा है जो गाँव में बसती है और जिनके लिए आरक्षण कोई सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता है...मैंने अपनी आँखों से देखा है कि अगर उन लोंगो को आरक्षण न मिला होता तो शायद वो वही जाति कि चक्की में पिस कर खत्म हो गए होते.
अगर आप आरक्षण विरोधी हैं तो ठीक है, आप स्वतंत्र है अपने मत को व्यक्त करने के लिए परन्तु क्या आप अपने इसी ब्लॉग के द्वारा कोई सुझाव देंगे उन दलितों के लिए जो वाकई अभी भी दलित (दबे, कुचले, और पिछड़े) है?
धन्यवाद
गौरव मिश्रा

जाति से ऊपर उठ कर विवेक से सोचने पर ही समाज बदलेगा वरना बदलाव लाने की कोशिश तो तालिबानी भी कर रहे हैं|

C Ram Mahilane said...

सुरेश जी,

कल ही मैं एक फिल्‍म देख रहा था नाम है 'आरक्षण' इसमें इसी मुद्वे पर अभिनेता शैफ अलि खान ने कहा की दौड में जित और हार का फैसला केवल पहले और बाद में पहुचनें के आधार पर नही किया जाना चाहिए। बल्‍की यह भि देखना चाहिए की दोनों नें दौड कहां से शुरू किया था।

माफ कीजिए पर मुझे आरक्षण पर आपकी टिप्‍प्‍णी से इनका विचार ज्‍यादा अच्‍छा लगा। अगर आपनें यह देखा नही है तो प्‍लीस एक बार यह द़श्‍य अवश्‍य देख लेवें।

इस ब्‍लाग में आपके विचारों के समर्थन में टिप्‍पणी करनें वालों की संख्‍या अधिक होगी और पर इसका विरोध करनें वाले कम होंगे। इसका कारण यह नही की आपनें सत प्रतिशत सत्‍य कहा है बल्कि यह है कि आपके ब्‍लाग पडनें और उसे नकारनें वालों के पास तो यह सुविधा ही नही हैा आग्रह है कि पहले इन्‍हें यह सुविधायें तो दिजिए फिर देखिऐ।

योगेश कुमार 'शीतल' said...

अगर आप दलित या पिछड़े होते तो खुद का गला घोंट देते इस लेख को दुबारा पढने के बाद. शर्म शर्म शर्म.

Rathod Harshad said...

dear.your blog divide Hindu.next why you not leave ego and mix with over backward Hindu brother?.reservation save Hinduism.Next think your self by placing in backwards class.I know person ego.your Brahmanism which kill Hinduism in past and you continue this.