Tuesday, March 20, 2007

बाजार की शक्तियों... जागो... भारत विश्व कप से बाहर हो जायेगा

बरमूडा को तथाकथित रूप से रौंदकर भारतवासियों ने थोडी चैन की साँस ली है... लेकिन अभी तो असली रण्संग्राम बाकी है... लेकिन यदि मेरी टेढी नजर से देखा जाये तो भारत सुपर-८ में जगह बना लेगा... आप पूछेंगे, कैसे ? तो भैये मुझे बाजार की शक्तियों और सट्टा बाजार पर पूरा भरोसा है... वे निश्चित रूप से कुछ जुगाड़ लगा लेंगे... श्रीलंका को "सेट" करेंगे, या बांग्लादेश को, पर हमारी टीम को सुपर-८ तक धक्का मारकर पहुँचायेंगे जरूर... आप पूछेंगे फ़िर भारत बांग्लादेश से क्यों हारा ? तो भैया बांग्लादेश में क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने का समूचा ठेका भारत ने ले रखा है... हम पहले भी उनसे हार चुके हैं... डालमिया साहब ने आईसीसी वोट की खातिर उसे टेस्ट का दर्जा दिला दिया था.. अब हमें विश्व कप के बाद बांग्लादेश का दौरा करना है तो भाई वहाँ भी तो कुछ माहौल तैयार करना पडेगा ना...मुझे मालूम है आप फ़िर सोच रहे होंगे कि भारत कैसे सुपर-८ में पहुँचेगा ? तो हमारे रण-बाँकुरे सटोरिये वहाँ तमाम लैपटॉप और हथियारों के साथ पहुँच चुके हैं... वे श्रीलंका से कहेंगे कि तू तो बांग्लादेश को हराकर पहले ही आगे बढ गया है... हमने भी बांग्लादेश से हारकर पडोसी धर्म निभा दिया है... अब तू हमसे बडे अन्तर से हार जा फ़िर हम दोनों सुपर-८ में और बांग्लादेश विश्वकप जीतकर (भारत को हराने के बाद उनके कप्तान ने यही कहा था ना..) अपने घर... यदि श्रीलंकाई चीतों पर देशप्रेम कुछ ज्यादा ही चढ गया होगा तो फ़िर बांग्लादेश को "सेट" किया जायेगा... कि छोटे भाई तू तो पहले ही हमें हरा चुका है... बरमूडा से हार जा... फ़िर हम सुपर-८ में और तुम घर... रहा पैसा तो वह स्विस बैंकों में पहुँचाने का हमें बहुत अनुभव है... तुम लोगों के बांग्लादेश पहुँचने से पहले पैसा तुम्हारे अकाऊंट में होगा...
तो भाईयों... यदि श्रीलंका और बांग्लादेशी खिलाडियों पर "देशप्रेम" नाम का भूत सवार हो जाये तो और बात है वरना भारत का सुपर-८ में पहुँचना तय है, ऐसा मेरा दिल कहता है... जय सटोरिया नमः, जय बाजाराय नमः, जय विज्ञापनाय नमः...

1 comment:

अनुनाद सिंह said...

ऐसे क्रिकेट का सत्यानाश हो जो दुनिया के सारे भूतपूर्व गुलामों की गुलाम मानसिकता को खाद-पानी दे रहा है, जबकि वहाँ जरूरत गुलाम मानसिकता को समूल नष्ट करने की है।