Wednesday, March 21, 2007

ब्लोग आचार संहिता - समस्या (२)

साथियों... मेरे लेख "देश बनाने के लिये चाहिये क्रांतिकारी युवा" (जबकि यह लेख "नईदुनिया" इन्दौर में १५ अगस्त २००४ को प्रकाशित हो चुका है) पर मुझे प्रतिक्रियायें मिली उससे मुझे बहुत दुःख हुआ... एक सज्जन ने कहा कि ये विचार तो मेरे हैं पर समयाभाव के कारण मैं इसे कॉपीराईट नहीं करवा पाया... लीजिये साहब, अब विचारों का भी कॉपीराईट होने लगा... लगता है ब्लोगिंग बन्द करना पडेगा, कोई विचारों का कॉपीराईट बताता है, कोई चुटकुलों पर अपना हक जताता है, एक लताड़ मुझे इसलिये पडी़ थी कि मुझे लेखक के सोर्स का नाम पता नहीं था और मैने उसका उल्लेख नहीं किया । यदि कल मुझे बैंक हडताल पर कुछ लिखना होगा तो कोई भी आकर कहेगा कि ये तो मेरा विचार था... पत्र-पत्रिकाओं मे लिखते-लिखते १५ वर्ष (नईदुनिया, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका आदि) हो गये ऐसी स्थिति आज तक नहीं आई थी... समझ में नहीं आता क्या किया जाये....

5 comments:

संजय बेंगाणी said...

अभी तक समझ में नहीं आया?!!

अरे भाई कान बन्द करें और लिखते रहें. बेफिक्र हो कर.

वैसे मुझे लगता है, आज जो आपने लिखा है उसे लिखने का मेरा विचार था.... :) :) जस्ट जोकिंग...

लिखते रहें.

Shrish said...

सुरेश भाई वोट टिप्पणी पढ़ी मैंने। उसमें कोई दम नहीं लिखने वाले का अता पता नहीं। आप ऐसी बेवजह बातों पर ध्यान न देकर लेखन जारी रखें। इस विषय पर मेरा आज का लेख भी पढ़ सकते हैं।

Raviratlami said...

विचारों पर कॉपीराइट? तब तो कॉपीराइट करने वाली संस्था भी विचारों में ही होगी.

इससे अधिक हास्यास्पद बात नहीं हो सकती.

सुरेश जी आप अपना निरंतर नियमित लेखन करते रहें.

Anonymous said...

भाई सुरेश
विचार तो विचार जो बचपन से लेकर जीवनपर्यन्‍त हम शब्‍द बोलते हैं, क्‍या वे हमारे अपने तैयार किए हुए होते हैं. वे भी तो हमने किसी दूसरे से ही लिए है. शब्‍द समाज के हैं और भाषा भी समाज की है. हम तो केवल प्रयोक्‍ता हैं,

शायद कोई कह देगा कि यह विचार तो उसका है, मैंने कमेन्‍ट में टेप दिया

अभी शुकर मनाइए कि अमेरिका की तर्ज पर बैठने और चलने के तरीकों का कॉपीराइट शुरू नहीं हुआ है.

Shrish said...

अनोनिमस जी अपनी स्टाइल का कॉपीराइट दक्षिण के अभिनेता रजनीकांत करा चुके है।