Sunday, February 4, 2007

कारपोरेट गीता-सार (Corporate Geeta)

Corporate Geeta

आज के गलाकाट जमाने में किसी निजी कम्पनी में कार्यरत "अर्जुन" के लिये गीता-सार -

हे पार्थ,
वेतनवृद्धि नहीं मिली, बुरा हुआ
तनख्वाह में कटौती हो रही है, बुरा हो रहा है
कर्मचारियों की छँटनी होगी, वह भी बुरा ही होगा...
तुम पिछली वेतनवृद्धि न होने का पश्चाताप ना करो
तुम आने वाली वेतनवृद्धि के न होने की भी चिंता ना करो
तालाबन्दी होने वाली है... जो होना है वह होकर रहेगा...
तुम्हारी जेब से क्या गया जो तुम रोते हो ?
तुम कम्पनी के लिये क्या लाये थे, जो तुमने खो दिया ?
तुम कोई "एक्स्पीरियंस" लेकर नहीं लेकर आये थे...
जो अनुभव लिया कम्पनी से लिया, जो काम किया कम्पनी के लिये किया
डिग्री लेकर आये थे, अनुभव लेकर चले जाओगे....
जो काम आज तुम्हारा है
वह कल किसी और का होगा, परसों किसी और का होगा...
तुम इसे अपना समझकर क्यों मगन हो रहे हो...
यही "खुशी" तुम्हारे दुःख का कारण है वत्स
क्यों व्यर्थ चिन्ता करते हो, किससे व्यर्थ डरते हो...
कौन तुम्हें निकाल सकता है ?
"पालिसी चेंज" कम्पनी का नियम है...
जिसे तुम "पालिसी चेंज" कहते हो, वह मैनेजमेण्ट की चाल है
एक पल में तुम सुपरवाइजर बन जाते हो...
दूसरे ही पल में "डेली वेजेस" वाले बन जाते हो...
समीक्षा, वेतनवृद्धि, प्रमोशन आदि-आदि से मन को हटा दो.....
विचार से मिटा दो, फ़िर कम्पनी तुम्हारी है, तुम कम्पनी के हो....
ना ये वेतनवृद्धि वगैरह तुम्हारे लिये है, ना तुम इसके काबिल हो
परन्तु नौकरी बरकरार है, फ़िर तुम्हें "टेंशन" क्यों है ?
तुम अपने आपको कम्पनी को अर्पित कर दो
यही सबसे उत्तम नियम है, जो इस उत्तम नियम को जान जाता है,
वह "असेसमेण्ट", पुरस्कार, वेतनवृद्धि, प्रमोशन, छँटनी, तालाबन्दी...
आदि समस्त चिन्ताओं से मुक्त हो जाता है...।
सिर्फ़ अपना कर्म करो पार्थ... फ़ल मैनेजमेण्ट पर छोड दो...
ओम शांति...

6 comments:

Divine India said...

लीजिए यह हुई एक नई गीता…बहुत खुब रचा अब इसका रहस्य भी लिखिये…गहरी सच्चाई को लपेटा है।

अनुराग श्रीवास्तव said...

HR विभाग से इस गीता सार को दूर रखना होगा.

संजय बेंगाणी said...

हे देव, ज्ञान पा कर धन्य हुए

Raviratlami said...

वो तो ठीक है कॉमरेड, परंतु एम्प्लाई गीता सार कहाँ छुपा कर रखा हुआ है. जरा उसे भी तो सार्वजनिक कीजिए!

वैसे, बढ़िया है. और भी गीता-सारों को पढ़ना चाहेंगे.

जगदीश भाटिया said...

सुरेश जी आपका स्वागत है।
आप मेरे चिट्ठे पूंजी बाजार पर आये इसके लिये धन्यवाद।
मेरा मुख्य चिट्ठा 'आईना' है।
http://aaina2.wordpress.com/

उडन तश्तरी said...

स्वागत है.
अब हिन्दी चिट्ठाकारी में आ गये हैं, तो चिट्ठाकारों के लिये गीता सार भी जान लें, यहाँ देखे:

http://udantashtari.blogspot.com/2006/12/blog-post_25.html

--बधाई और शुभकामनाऐं.