Monday, January 29, 2007

पिता का रूपांतरण

Father's Day Special

अपने जीवनकाल में विभिन्न पडावों पर पिता की ओर देखने का नजरिया बदलता रहता है...
चार वर्ष की आयु में - मेरे पिता महान हैं..
छह वर्ष की आयु में - मेरे पिता तो सब कुछ जानते हैं..
दस वर्ष की आयु में - मेरे पिता बहुत अच्छे हैं लेकिन गुस्सा बहुत जल्दी हो जाते हैं..
तेरह वर्ष (टीनएज) की आयु में - मेरे पिता बहुत अच्छे थे, जब मैं छोटा था...
चौदहवें वर्ष में - पिताजी तो बहुत तुनकमिजाज होते जा रहे हैं...
सोलहवें वर्ष में - पिताजी तो बहुत पुराने खयालात के हैं, नये जमाने के साथ चल ही नहीं पाते..
अठारहवें वर्ष में - पिताजी तो लगभग सनकी हो चले हैं..
बीसवें वर्ष में - हे भगवान अब तो पिताजी को झेलना बहुत मुश्किल होता जा रहा है.. पता नहीं माँ उन्हें कैसे सहन करती है...
पच्चीसवें वर्ष में - पिताजी तो मेरी हर बात का विरोध करते हैं...
तीसवें वर्ष में - मेरे बच्चे को समझाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है... जबकि मैं अपने पिताजी से बहुत डरता था...
चालीसवें वर्ष में - मेरे पिता ने मुझे बहुत अनुशासन के साथ पाला, मुझे भी अपने बच्चे के साथ ऐसा ही व्यवहार करना चाहिये...
पैंतालीसवें वर्ष में - मैं आश्चर्यचकित हूँ कि मेरे पिता ने हमें कैसे बडा किया होगा...
पचासवें वर्ष में - मेरे पिता ने हमें यहाँ तक पहुँचाने के लिये बहुत कष्ट उठाये... जबकि मैं अपने इकलौते बेटे की ठीक से देखभाल नहीं कर पाता...
पचपनवें वर्ष में - मेरे पिता ने हमारे लिये बहुत अच्छी योजनायें बनाईं और निवेश किया...वे एक उच्च कोटि के इन्सान थे... जबकि मेरा बेटा मुझे सनकी समझता है...
साठवें वर्ष में - मेरे पिता वाकई महान थे...
अर्थात "पिता महान हैं" यह समझने में व्यक्ति को पूरे छ्प्पन वर्ष लग जाते हैं....

5 comments:

Upasthit said...

Matlab apke hisab se abhi mujhe apane pita ji ko jhelna mushkil hai aur haan kabhi kabhi meri baton ka virodh karte bhi lag rahe hain... :) .

Raag said...

एकदम सही।

संजय बेंगाणी said...

हा हा

यह हर पिता-पुत्र के साथ होता आया है, और शायद होता भी रहेगा.

Shrish said...

वाह एकदम सही अध्ययन किया आपने।

सञ्जय झा said...

sukham avlokan......

pranam.