Wednesday, April 1, 2015

Bharti Singh - The Chinese Bamboo

बच्चे नहीं, बल्कि प्रतिभा परीक्षण का हमारा "सिस्टम" खराब है... 

(प्रस्तुत पोस्ट भाई Ajit Singh - https://www.facebook.com/SinghCorpt की फेसबुक वाल से साभार ली गई है. अजीत सिंह एक मस्तमौला लेखक हैं जो दिल से लिखते हैं तथा अपनी लेखनी में हिन्दी शब्दों की शुद्धता अथवा व्याकरण आदि की कतई परवाह नहीं करते. अजीत सिंह, माहपुर में "मुसहर" बच्चों के लिए अपने NGO "उदयन" के तहत एक स्कूल भी चलाते हैं... मैं अजीत सिंह जी की इस पोस्ट को बिना किसी सुधार के जस का तस रहने देना चाहता हूँ, ताकि अन्य पाठक भी देखें-समझे-जानें कि लिखने के लिए भाषा की नहीं "दिल" की जरूरत होती है, हिन्दी-अंग्रेजी की खिचड़ी, देशज शब्दों के उपयोग के सहारे भी कोई शानदार लेख लिख सकता है, उसके लिए किसी को लेखक होना जरूरी नहीं है, बस आँखें-कान खुले हों और मन में तड़प हो). 
पूरा पढ़िए और एक सच्चाई से रू-ब-रू होने का आनंद लीजिए... 


सावधान, आपके आसपास ज़मीन में चाईनीज बाँस गड़े हुए हैं. 
दोस्तों........अपने लेख कई बार मैं एक कहानी सुना के शुरू करता हूँ जो ज़्यादातर काल्पनिक होती है ....आज फिर एक कहानी सुना रहा हूँ ,,,,,पर ये काल्पनिक नहीं है. यह एक सच्ची घटना है .........काफी पुरानी बात है ...एक लड़की थी ........बचपन में एकदम सामान्य ........सामान्य से घर में जन्मी थी .अक्सर बीमार रहती थी .....बचपन में पैर जल गए ...महीनों बिस्तर में पड़ी रही ....dull सी personality थी ......स्कूल जाने लगी ......पढने में शुरू से ही dull थी ....बाकी activities में भी कोई बहुत अच्छी नहीं थी .........सो ऐसे बच्चों को स्कूल में भी कोई विशेष प्रोत्साहन नहीं मिलता ..........वो अक्सर back benchers बन के रह जाते हैं ...स्कूल के गुमनाम चेहरे ........तो साहब उसके जीवन में शुरू से ही एक सिलसिला शुरू हो गया ....fail होने का ......हर टेस्ट में fail .....क्लास टेस्ट में ...fail ....unit टेस्ट में fail ....half yearly ....fail ...annual exam ...fail ....अब CBSE बोर्ड की कोई policy है शायद की पांचवीं तक किसी को fail नहीं करना है ...उसे अगली क्लास में promote कर देना है ...... सो वो fail होते होते 6th में पहुँच गयी ........अब साहब fail होना तो उसका जैसे trade mark हो गया था सो वो 6th में भी fail हो गयी ......

इस बीच ऐसा भी नहीं था की घर वालों ने कोई कोशिश नहीं की ...पर तमाम कोशिशों का कोई रिजल्ट नहीं निकला ....और ये भी नहीं की स्कूल वालों का कोई दुराग्रह था क्योंकि स्कूल तो उसका हर 2 या 3 साल में बदल जाता था ....खैर जब 6th में भी फेल हो गयी तो इस बार promotion नहीं हुआ ...उसी क्लास में रोक दी गयी ......घर वालों ने हाथ पाँव जोड़ के किसी तरह अगली क्लास में promote कराया .......और इसी तरह वो लुढ़कते पुढ़कते .......consistently and persistently ....हर एक टेस्ट में fail होती हुआती 10th में पहुँच गयी .......अब CBSE बोर्ड के exam में कौन सी सिफारिश चलनी थी सो वहां भी उसने असफलता का झंडा गाड़ दिया .....यानी 10th में भी फेल.......... 

अब आप ये बताइये की क्या किया जा सकता है ..........एक बच्चा जो लगातार 10 साल तक रोजाना fail हुआ उसका क्या किया जा सकता है .....कभी सोच के देखा है ????????? 10th fail लड़की का क्या future होता है ....आइये मैं बताता हूँ...
१) वो 11th में admission नहीं ले सकती .इसलिए BA का भी कोई चांस नहीं ......
२) वो सारी जिंदगी 10th fail कहलाएगी .
३) उसे कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी .....चपरासी की भी नहीं .....अब तो फ़ौज में भी भर्ती नहीं हो सकती ...वहां भी 10th पास मांगते हैं .....
४) उसकी शादी किसी अच्छे, पढ़े लिखे well settled लड़के से नहीं होगी .... अजी 10th फ़ैल लड़की से कौन शादी करना चाहता है आजकल .....
५) कहने का मतलब उसका future ख़तम ......

आइये अब ये देखते हैं की ऐसे बच्चे ,जो की पढ़ाई में dull होते हैं उनके साथ क्या होता है समाज में ........रोज़ रोज़ का तिरस्कार .....teachers की रोज़ रोज़ की डांट फटकार ...कई बार तो मार पीट .....हर रोज़ हर subject में failure का ठप्पा ......ऊपर से घर में डांट .... उन्हें पूरी तरह नकारा ...निकम्मा ...कामचोर ....नालायक ....मान लिया जाता है ........सहपाठियों द्वारा तिरस्कार ,दुत्कार ....ऐसे बच्चों से अक्सर तेज़ तर्रार बच्चे कोई मेल मिलाप नहीं रखते .......और वो और ज्यादा dull होते चले जाते हैं .......उन्हें एक ऐसे सिस्टम ने failure ...नकारा घोषित किया है जो की एक फूल प्रूफ सिस्टम माना जाता है ........जो हर साल लाखों करोड़ों बच्चों का मूल्यांकन करता है ...सैकड़ों साल पुराना एक जांचा परखा सिस्टम है .......अब आप यूँ समझ लीजिये की जौहरियों की एक संस्था जो हर साल लाखों पत्थरों का मूल्यांकन करती है ,उसने एक पत्थर का 10 साल मूल्यांकन कर के उसे पत्थर घोषित कर दिया और बाकियों को हीरा तो ऐसी संस्था के ऊपर शक भी कैसे किया जा सकता है .......तो साहब अब आप कल्पना कीजिये की उस लड़की का क्या हुआ होगा .... ज्यादातर लोग यही कहेंगे की शादी कर के बच्चे पाल रही होगी ........ 

तो सुनिए साहब ....जिस दिन उस लड़की को certified नाकारा यानि failure ....... घोषित किया गया ,उसके ठीक 10 साल बाद वो लड़की राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में ....हिन्दुस्तान की नामचीन और महान हस्तियों की तालियों की गडगडाहट के बीच , अपने क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट सेवाओं और उपलब्धियों के लिए ...देश का सबसे बड़ा पुरस्कार ,खुद महामहिम राष्ट्रपति जी के हाथों से प्राप्त कर रही थी .......उस लड़की का नाम है भारती सिंह ......और उसे मैं इसलिए जानता हूँ क्योंकि वो मेरी सगी छोटी बहन है ..........और मैंने उसे प्रतिदिन ......असफलता से आगे निकल कर सफलता की बुलंदियों तक पहुँचते देखा है .......भारती ने 1996 में भारत का sports का सर्वोच्च पुरस्कार ..."अर्जुन पुरस्कार" प्राप्त किया और वो अपने करियर में विश्व के सबसे महान weightlifters में गिनी गयीं ...और उन्होंने world championship और Asian games में कई पदक जीते ......Olympics में उन दिनों Women Weightlifting नहीं थी ....नहीं तो वहां भी मेडल जीतती .उन्होंने हाल ही में CISF से ASSISTANT COMMANDANT के पद से Voluntary Retirement लिया है ...अगर वो अपनी पूरी नौकरी करती तो शायद DIG या IG बन के retire होतीं ......अब सोचने वाली बात ये है की आखिर गड़बड़ कहाँ हुई इस कहानी में ...और भारती सिंह की लाइफ में turning point कहाँ से आया . 


गौर से देखने पर पता लगता है की वो जीवन में कभी भी एक dull या failure बच्चा नहीं थी ...दरअसल हमारा सिस्टम उसको गलत पैमाने से नाप रहा था .........अब साहब अगर आपको Quadratic Equation ...और Trignometry नहीं आती तो आप fail .......अगर आप लिखने में Spelling Mistake करते हैं तो आप fail .....सूर्य ग्रहण कैसे लगता है ... ये आपने रटा नहीं है तो आप fail .......फिर आपमें चाहे जितनी भी प्रतिभा है ....चाहे आप किसी अन्य field में विश्व की महानतम हस्ती बनने की क्षमता रखते हों ..........पर चूंकि आपको quadratic equation नहीं आती इसलिए आप फेल ...और आपका future ख़तम .......हमारे education system ने तो आपको fail यानी नकारा घोषित कर दिया है .......अब आप ऐसा करो सब्जी की रेड़ी लगा लो सड़क पे.. 


(चित्र में बाँए से तीसरी भारती सिंह... अर्जुन सिंह एवं राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा के साथ)

कायदे से होना तो ये चाहिए कि सिस्टम उस बच्चे का मूल्यांकन करे और यह बताये की बेशक इस बच्चे को Trignometry नहीं आती ..और ये Shakespeare के नाटकों पर निबंध नहीं लिख सकता ...पर इसमें ... xyz field में अपार क्षमता है लिहाजा इसे 10th में पास किया जाता है और आगे पढने की इजाज़त दी जाती है ...इसे आगे इस इस field में पढाई करनी चाहिए ...... अब मुझे आप ये बताइये की भारती सिंह के केस में ...भारती सिंह fail हुई या भारती सिंह का मूल्यांकन करने में हमारा education system fail हुआ ..... दरअसल भारती सिंह तो एक विलक्षण प्रतिभा की धनी थीं ...पर उस प्रतिभा को पहचानने में हमारे अकादमिक महारथी और हमारा अकादमिक सिस्टम fail हो गए और खामखाह 10 साल तक उस बेचारी बच्ची को परेशान करते रहे ...उसे दुत्कारते रहे ..........अब ये तो उसकी हिम्मत थी की उसने हार नहीं मानी और तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करती रही और एक दिन दुनिया के शीर्ष पर विराजमान हुई .......पर न जाने ऐसी कितनी भारती सिंह होंगी इस दुनिया में जिसे ये सिस्टम अपने पैरों तले कुचल देता है.

यहाँ एक बात मैं और साफ़ कर देना चाहता हूँ की अपने Professional Career में भारती ने सिर्फ sports में ही excell नहीं किया बल्कि हर field में टॉप किया ..........कॉलेज से BA किया 2nd division ...बढ़िया अंग्रेजी बोलती है .........फिर CISF में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किया और promotion ले कर Assistant Commandant तक पहुंची .......300 से 500 मर्दों की कंपनी को सफलता पूर्वक कमांड किया .....लखनऊ .जोधपुर और दिल्ली के International Airports की security की incharge रही और इस दौरान लीडरशिप की मिसाल पेश की ....अपने करियर के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे cases solve किये जहाँ उनकी intelligence को देख के उनके senior officers दंग रह गए, CISF की ट्रेनिंग की passing out parade में बेस्ट कैडेट घोषित हुई और परेड को command किया .......1 किलोमीटर लम्बे मैदान में हजारों Dignitries की भीड़ के सामने 1500 officers को command देना कोई हंसी खेल नहीं होता ....अच्छे अच्छों की टांगें कांपने लगती हैं ......जब वो retirement लेने लगी तो उनके एक senior ऑफिसर ने कहा था की आप गलती कर रही हैं ...अगर आप पूरी नौकरी करेंगी तो IG बन के retire होंगी .........विचारणीय विषय ये है की हमारे education system ने शुरू में ऐसी विलक्षण प्रतिभा को पहचानने में चूक कैसे कर दी ........क्या ये सिस्टम ऐसी ही हज़ारों लाखों प्रतिभाएं हर साल नष्ट कर रहा है ......मैं अक्सर ये प्रश्न अपने व्याख्यानों में उठता हूँ ........तो कुछ लोग इसका ये जवाब देते हैं की आप जिस सिस्टम की इतनी आलोचना कर रहे हैं वही सिस्टम विश्व स्तरीय प्रतिभाएं पैदा भी तो कर रहा है ....तो इसका जवाब ये है मेरे दोस्त ...की खराब से खराब सिस्टम भी कुछ results तो देता ही है ....100 किलो सरसों में 35 किलो तेल निकलना ही चाहिए ........अब अगर एक कोल्हू 20 किलो निकालता है तो आप उसे 20 किलो के लिए शाबाशी देंगे या उससे उस 15 किलो का हिसाब मांगेंगे जो waste हो गया.


यहाँ मैं ये बता दूं की इस success स्टोरी में उनके parents का क्या role रहा ....पहले तो उन्होंने उसे किसी तरह (व्याख्या करने की ज़रुरत नहीं है ) 10th पास कराया .अब चूंकि उसका maths और science से पिंड छूट गया इसलिए आगे पढ़ाई में कोई समस्या नहीं हुई .दुसरे जब उसे इतने सालों तक नाकारा घोषित किया जाता था तब उसके parents रोजाना ground में ये सिद्ध करते थे की देखो ...you are the best ...तुम तो यहाँ दौड़ में लड़कों को भी हरा देती हो ...you are the best ......तुम तो एक दिन world champion बनोगी ........और वो रोज़ इसी तरह जीतती रही ...रोज़ शाम को उसके लिए तालियाँ बजती थीं ......शाम को वो दिन भर का अपमान और तिरस्कार भूल जाती थी .........और इसी तरह धीरे धीरे ..एक दिन वो सचमुच world champion बन गयी ...... ज़रा कल्पना करें ...अगर उसके parents भी स्कूल वालों की तरह उसे नाकारा मान लेते तो ??

Moral of the Story

1 ) अगर आपका बच्चा आज पढने में कमजोर है तो ,निराश न हों .......वो कल का Thomas Alva Edison हो सकता है .

2 ) सब बच्चों को 9 नंबर का जूता पहना के मत दौड़ाओ ...........भाई मेरे सबके पाँव छोटे बड़े होते हैं .......आखिर एक ही question paper और एक ही syllabus से सारे देश के बच्चों का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है .......
3 ) 20 किस्म का बीज एक साथ खेत में डाल दोगे ...तो ध्यान रखो सबका जमाव एक साथ नहीं होगा .........मूंग तीसरे दिन जम जाएगी ,आम १५ दिन बाद निकलेगा ,सूरन ( जिमीकंद, yam ) दो महीने बाद जमेगा और chinese bamboo ...... 2 साल बाद निकलेगा ... इसलिए आपको कोई हक़ नहीं की आप उस बेचारे Chinese Bamboo को निकम्मा ,नाकारा या failure घोषित करें ......क्योकि आपको पता होना चाहिए की Chinese Bamboo बेशक शुरू में थोडा ज्यादा टाइम लेता है Germination में ,पर जिस दिन वो जमीन तोड़ के ऊपर आ जाता है तो सिर्फ 7 हफ्ते में 40 फुट लम्बा हो जाता है ........
सावधान : कृपया ध्यान दीजिये .....आपके इर्द गिर्द ज़मीन में ,आपके घर में , स्कूल में या समाज में .........कुछ Chinese Bamboo गड़े हो सकते हैं ....कृपया उन्हें अपने पैरों तले न कुचलें .......क्योंकि एक दिन वो जमीन तोड़ के बहार आने वाले हैं... 

है ना अदभुत... तो अकेले-अकेले मत पढ़िए... इसे दूसरे मित्रों से शेयर कीजिए..

Wednesday, March 25, 2015

How to Recognize Secular Vs Communal Rape

सेक्युलर बलात्कार बनाम साम्प्रदायिक बलात्कार

मित्रों भारत में आजकल रेप का फैशन चल रहा है. अखबार-चैनल-सोशल मीडिया सभी पर रेप छाया हुआ है. जिस दिन रेप की खबर नहीं होती, लगता है कि दिन सूना हो गया. इसलिए जब प्रगतिशील महिलाएँ बोर होने लगती हैं तब सात-आठ साल से लिव-इन में रखैल की तरह खुशी-खुशी रहने के बाद अचानक उन्हें याद आता है कि, अरे!! ये तो रेप हो गया. सो सेकुलर बौद्धिक तरक्की करते हुए आधुनिक भारत में ऐसी ख़बरें भी सुनाई दे जाती हैं. अब तो बुद्धिजीवियों के पसंदीदा चैनल BBC ने भी दुनिया को समझा दिया है कि भारत के सारे मर्द रेपिस्ट होते हैं. तालियाँ बजाते हुए सभी प्रगतिशीलों ने BBC की इस राय का समर्थन भी किया और मुकेश नामक हीरो की फिल्म भारत में दिखाने की पुरज़ोर माँग रखी. बहरहाल, वह झमेला अलग है, मैं तो आपको इस लेख में रेप के एक बिलकुल नए दृष्टिकोण के बारे में बताने जा रहा हूँ. वह है सेकुलर रेप और साम्प्रदायिक रेप... हैरान हो गए ना!!! जी हाँ... भारत में अधिकाँश रेप इन्हीं दो प्रकारों का होता है...

आईये हम समझते हैं कि सेकुलर रेपऔर साम्प्रदायिक रेप में क्या अंतर होता है... पहले इस ब्लॉक डायग्राम को ध्यान से देख लीजिए. यही सेकुलर रेप का पूरा सार है, जिसे मैं शुद्ध हिन्दी में आपको समझाने की कोशिश करूँगा.




चलिए शुरू करते हैं... - जब भी देश में कहीं बलात्कार होता है तो “आदर्श लिबरल” या कहें कि प्रगतिशील सेकुलर बुद्धिजीवी सबसे पहले यह देखता है कि बलात्कार भाजपा शासित राज्य में हुआ है या गैर-भाजपा सरकारों के राज्य में. यदि भाजपा शासित राज्यों में बलात्कार हुआ है तब तो प्रगतिशीलों की बाँछें खिल जाती हैं. क्योंकि इस “कम्युनल रेप” के द्वारा यह सिद्ध करने का मौका मिलता है कि भाजपा शासित राज्यों में क़ानून-व्यवस्था नहीं है, महिलाओं की हालत बहुत खराब है. यदि बलात्कार किसी सेकुलर राज्य में हुआ हो, तो यहाँ फिर इसके दो भाग होते हैं, पहले भाग में यह देखा जाता है कि रेप पीड़ित लड़की हिन्दू है या गैर-हिन्दू. यदि लड़की हिन्दू हुई और आरोपी कोई सेकुलर किस्म का शांतिदूत हुआ तो मामला खत्म, कोई प्रगतिशील अथवा महिला संगठन उसके पक्ष में आवाज़ नहीं उठाएगा, यह होता है “सेकुलर रेप”. यदि वह लड़की गैर हिन्दू हुई तो यह देखा जाता है कि वह दलित है या अल्पसंख्यक और आरोपित कौन है. यदि आरोपी पुनः सेकुलर व्यक्ति निकला तो भूल जाईये कि कोई रेप हुआ था. लेकिन यदि रेपिस्ट कोई हिन्दू हुआ, तो ना सिर्फ उसका नाम जोर-जोर से चैनलों पर लिया जाएगा, बल्कि यह सिद्ध करने की पूरी कोशिश होगी कि किस तरह हिन्दू संस्कृति में बलात्कार जायज़ होता था, हिन्दू मर्द स्वभावगत बलात्कारी होते हैं आदि. 

यदि बलात्कार गैर-भाजपा शासित राज्य में हुआ है और आरोपी सेकुलर अथवा मुस्लिम है, तो लड़की पर ही आरोप मढ़ा जाएगा और उसे बदचलन साबित करने की कोशिश होगी, और यदि बलात्कार करने वाला हिन्दू है तो गरियाने के लिए भारतीय संस्कृति तो है ही. इसी प्रकार यदि बलात्कार भाजपा शासित राज्य में हुआ हो, आरोपी भी हिन्दू हो तो समूची भारतीय संस्कृति को बदकार साबित करना होता है, उस घटना को अल्पसंख्यकों पर भारी अत्याचार कहकर चित्रित किया जाता है तथा तमाम चैनलों पर कम से कम दस दिन बहस चलाई जाती है, यह होता है “कम्युनल रेप”. कहते हैं कि औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन होती है, यही स्थिति सेकुलर-कम्युनल बलात्कार के बारे में भी है. सवाल उठता है कि बलात्कार जैसे घृणित अपराध को धार्मिक रंग और राजनैतिक ट्विस्ट कैसे दिया जाता है, और यह मानसिकता शुरू कैसे होती है. यह इन दो प्रगतिशील महिलाओं के ट्वीट्स पढ़कर समझ में आ जाता है. 

पहला ट्वीट है आदर्श लिबरल (Adarsh Liberal) प्रगतिशील मालिनी पार्थसारथी का, जिसमें हिन्दू महिलाओं की मंगलसूत्र परम्परा को वे पाखण्ड और पुरुष सत्तात्मक प्रतीकात्मकता बताती हैं... जबकि दूसरे ट्वीट में मुस्लिम महिलाओं के बुर्के को वे हिन्दू पुरुषों के डर से अपनाई गई "परंपरा" बता रही हैं. 



दूसरा ट्वीट भी एक और प्रगतिशील महिला कविता कृष्णन जी का है. बेहद आधुनिक विचारों वाली महिला हैं, बहुत सारे NGOs चलाती हैं और आए दिन टीवी चैनलों पर महिला अधिकारों पर जमकर चिल्लाती हैं. फिलहाल वे टाईम्स नाऊ के अर्नब गोस्वामी से नाराज़ चल रही हैं, क्योंकि अर्नब ने सरेआम इनकी वैचारिक कंगाली को बेनकाब कर दिया था, और इन्हें देशद्रोही कहा). बहरहाल, देखिये ट्वीट में मोहतरमा कितनी गिरी हुई हरकत कर रही हैं. इसमें एक तरफ वे कहती हैं कि मुम्बई के गैंगरेप को "धार्मिक रंग" देने की कोशिश हो रही है फिर घोषणा करती हैं कि "Rape has no Religion". परन्तु अपने ही एक और ट्वीट में प्रगतिशीलता का बुर्का फाड़ते हुए "कंधमाल में हिन्दू दलित लड़की और संघ परिवार" का नाम ले लेती हैं... तात्पर्य यह है कि सेकुलर-प्रगतिशील मानसिकता के कारण ही भारत में बलात्कार के दो प्रकार हैं - सेकुलर रेप और कम्युनल रेप. 



अब अंत में संक्षेप में आपको एक-दो उदाहरण देकर समझाता हूँ कि सेक्युलर रेप क्या होता है और कम्युनल रेप कैसा होता है. पहला उदाहरण है पश्चिम बंगाल में एक नन के साथ लूट और बलात्कार का मामला. आपने देखा होगा कि किस तरह न सिर्फ आरोपियों के नाम छिपाए गए, बल्कि नन के उस संदिग्ध बलात्कार के कई झोलझाल किस्म के तथ्यों की ठीक से जाँच भी नहीं हुई. लेकिन ना सिर्फ इसे अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया गया, बल्कि यहाँ कोलकाता और दिल्ली में मोमबत्ती मार्च भी आयोजित हो गए.. यानी रेप हुआ कोलकाता में, आरोपी पाए गए अवैध बांग्लादेशी... लेकिन छाती कूटी जा रही है भाजपा के नाम पर... यह है “साम्प्रदायिक बलात्कार”. वहीं उसी बंगाल में रामकृष्ण मिशन की दो साध्वियों के साथ भी बलात्कार हुआ, क्या आपको पता चला?? किसी चैनल पर आपने किसी हिन्दू संगठन की कोई आवाज़ सुनी? क्या कोई मोमबत्ती मार्च निकला? नहीं... क्योंकि यह एक सेकुलर रेप है. इसमें हिन्दू साध्वी के साथ हुए बलात्कार को पूरी तरह निरस्त करने का प्रगतिशील फैशन है. इसी प्रकार जब बीबीसी की फिल्म मेकर लेस्ली उड़विन भारत के तिहाड़ में घुसकर फिल्म बना लेती है तो ना सिर्फ पीडिता का, बल्कि उसके माता-पिता का और आरोपी मुकेश का नाम सरेआम उजागर कर दिया जाता है. पहचान उजागर कर दी जाती है, क्योंकि ये सांप्रदायिक लोग हैं, लेकिन जिस नाबालिग(???) आरोपी ने निर्भया की आँतें बाहर निकाली थीं और जो क़ानून के पतली गली एवं सेकुलर मानवाधिकार गिरोह की वजह से फिलहाल चित्रकारी और मौज-मजे कर रहा है, उस “मोहम्मद अफरोज” का नाम जानबूझकर छिपा लिया जाता है, उसके माँ-बाप का चेहरा नहीं दिखाया जाता... यह “सेकुलर रेप” का ही एक प्रकार है.... 


तो मित्रों, अधिक न लिखते हुए भी आप समझ ही गए होंगे कि "सेकुलर रेप" क्या होता है और "कम्युनल रेप" कैसा होता है... तो अगली बार से ख़बरों पर ध्यान बनाए रखिए, मोमबत्ती गैंग की हरकतों और महिला अत्याचार के नाम पर सहानुभूति (यानी विदेशों से मोटा चन्दा) हासिल करने वालों पर भी निगाह बनाए रखियेगा... फिर आप इस खेल को और भी गहरे समझ सकेंगे... 

जय जय... 

Tuesday, March 24, 2015

How to Recognize Adarsh Liberal

"आदर्श लिबरल" (यानी छद्म प्रगतिशील) की पहचान... 

‪#‎AdarshLiberal‬

इस हैशटैग के साथ अंग्रेजी भाषा में लगातार "आदर्श लिबरल" की जमकर बखिया उधेड़ी जा रही है. बजाने का यह काम हिन्दी में हम पहले से ही "छद्म प्रगतिशील" (छद्म सेकुलर) कहकर करते आ रहे हैं. फिर भी संक्षेप में थोड़ा और परिचय दे दूँ. "आदर्श लिबरल" वह व्यक्ति होता है जो रात को सोते समय RSS को गाली देकर सोता है, सुबह उठकर "हिंदुत्व" को गाली देने के बाद ही मुँह धोता है और दोपहर में मोदी को कोसने के बाद ही उसका खाना पचता है. Adarsh Liberal के परिवार में कम से कम एक व्यक्ति "गे" या "लेस्बियन" होता है, और एक कम से कम व्यक्ति "भगवान एवं भारतीय संस्कारों को नकारते हुए नास्तिक" कहलाना पसंद करता है...


एक Adarsh Liberal की "दिमागी संरचना" कुछ इस प्रकार होती है... (केजरीवाल की खोपड़ी खोलोगे तो "लगभग-लगभग" ऐसी ही निकलेगी). 




इस संक्षिप्त प्रस्तावना से अब Adarsh Liberal "प्रजाति" का बेसिक स्वरूप तो आप समझ ही गए होंगे. चूँकि समय की कमी है, इसलिए एक और छोटा उदाहरण देकर अंत करता हूँ...

यदि RSS कहे कि "सूअर का गू" बेहद बुरी चीज़ है, तो Adarsh Liberal रोमिला थापर से लेकर बिपन चंद्रा के नकली इतिहास का रेफरेंस देकर यह सिद्ध करने की पुरज़ोर कोशिश करेगा कि सूअर का गू बेहद पौष्टिक होता है. शरीर के किसी हिस्से में मोमबत्ती खोंसे हुए कुछ अति-उत्साही Adarsh Liberal तो सूअर का गू खाकर यह सिद्ध देंगे कि संघ झूठा है... और निश्चित ही इसके पीछे उसका कोई साम्प्रदायिक एजेंडा है. होली पर पानी बचाओ और बकरीद पर चुप्पी साध लो... तथा PETA के विज्ञापन करो लेकिन गौमांस का समर्थन करो... Adarsh Liberal की खास पहचान हैं...अर्थात Adarsh Liberal = देश जाए भाड़ में - "एजेंडा" ऊँचा रहे हमारा...



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"छद्म प्रगतिशील" की कथाएँ अनंत हैं... इसलिए मोह संवरण नहीं कर पा रहा... तो एक और संक्षिप्त सा परिचय..

- शशिकपूर को दादासाहब फाल्के पुरस्कार मिला...
Adarsh Liberal कहेगा :- जरा पता लगाओ कि शशिकपूर का RSS कनेक्शन क्या है?